हरियाणा -मुख्यमंत्री मनोहर को आया गुस्सा  ग्रोवर को थमाई क्लीन चिट ,विधायक बलराज  कुंडू से बोले तो जाओ कोर्ट ।

हरियाणा में बजट से एक दिन पहले-
निर्दलीय विधायक कुंडू ने हरियाणा सरकार से समर्थन वापसी का किया ऐलान
बोले-भ्रष्ट सरकार को समर्थन करने वाले मुख्यमंत्री से समर्थन वापिस लेता हूं
कुंडू ने पूर्व सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर पर लगाए थे भ्रष्टाचार के आरोप  हमारी सरकार में न कोई घोटाला हुआ न होगा-मुख्यमंत्री

राजकुमार अग्रवाल
चंडीगढ। हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार में निर्दलीय विधायकों में फूट शुरू हो गई है। गुरुवार को महम के आजाद विधायक बलराज कुंडू ने समर्थन वापसी का ऐलान कर दिया। कुंडू ने कहा कि वे भ्रष्ट सरकार को समर्थन करने वाले मुख्यमंत्री से अपना समर्थन वापिस लेते हैं। गौरतलब है कि कुंडू ने पूर्व की भाजपा सरकार में सहकारिता मंत्री रहे मनीष ग्रोवर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर जांच की मांग की थी। इसी विवाद के चलते उन्होंने इस्तीफे का ऐलान किया है। वहीं,सीएम ने कहा है कि हम कुंडू से बात करेंगे। बिना सुबूत के किसी के भी खिलाफ जांच के आदेश कैसे दिए जा सकते हैं।

 

 

कुंडू ने पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर पर लगाए थे भ्रष्टाचार के आरोप
रोहतक के पूर्व विधायक व पूर्व सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर पर महम के विधायक बलराज कुंडू ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। कुंडू का आरोप था कि सहकारिता मंत्री रहते हुए मनीष ग्रोवर ने शुगर मिल से शीरे का घोटाला किया। इसके अलावा रोहतक नगर निगम में भी भ्रष्टाचार किया। कुंडू ने करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि सरकार ने मनीष ग्रोवर पर कार्रवाई नहीं की तो वे समर्थन वापिस ले लेंगे। इसके बाद उन्होंने गृह मंत्री अनिल विज को शिकायत दी थी। जिस पर विज ने एक एसआईटी गठित कर दी थी।

 

 

सदन में सीएम के बयान देने पर भड़के कुंडू
हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। गुरुवार को बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर जवाब देते हुए सीएम मनोहर लाल खट्टर बोल रहे थे। स्वास्थ्य खराब होने की वजह से बलराज कुंडू सदन से जा चुके थे। लेकिन उन्होंने जब देखा कि सीएम मनीष ग्रोवर के मामले पर बोल रहे हैं तो वे घर से वापिस सदन पहुंच गए। कुंडू ने कहा था कि जब मनीष ग्रोवर का शीरा का व्यापार है तो उन्हें सहकारिता विभाग क्यों दिया गया। इस पर सीएम मनोहर ने कहा कि जो व्यक्ति जिस पेशे से जुड़ा हुआ है, उसे वो विभाग दे देना कोई गलत नहीं है। इस पर बलराज कुंडू ने सीएम से कहा कि आप तो मनीष ग्रोवर को क्लीन चिट दे रहे हैं। इस पर सीएम ने कहा कि आप कोर्ट चले जाओ।

 

कुंडू ने सरकार को बताया भ्रष्ट
सदन से बाहर आकर बलराज कुंडू ने कहा कि एसआईटी गठित होने के बाद भी सीएम मनोहर लाल सदन में मनीष ग्रोवर पर लगे आरोपों को स्पष्टीकरण देने में जुटे हुए थे। लेकिन जिस प्रकार सीएम ने सदन में जवाब दिया है,मैं उस बात से आहत हूं। मुझे इस बात का बड़ा अफसोस है कि आज की राजनीतिक किस स्तर पर जा रही है। ईमानदारी की बात एक भाषण मात्र रह गई है। मैंने समर्थन ईमानदार सरकार और ईमानदार सीएम को दिया था। मैं ऐसी भ्रष्ट सरकार को अपना समर्थन नहीं दे सकता। अपना समर्थन वापिस लेता हूं और शुक्रवार को अपना समर्थन वापसी का पत्र स्पीकर और राज्यपाल को दे दूंगा।

 

विवाद के ये मानी जा रही जड़
इस विवाद की एक जड़ मंत्री पद भी माना जा रहा है। गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने निर्दलीय विधायकों में सिर्फ रणजीत सिंह को मंत्री पद दिया था। इसके अलावा 4 विधायकों को बोर्ड का चेयरमैन बना दिया था। कुंडू मंत्री पद की रेस में थे लेकिन पूर्व सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर के चलते उनका पत्ता कट गया। इस वजह से दोनों के बीच खटास पैदा हुई। बलराज कुंडू विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में ही थे। भाजपा ने उनकी टिकट काटी तो पार्टी छोड़कर निर्दलीय चुनाव में खड़े हुए और जीत दर्ज की।

 

अब सरकार के पास 56 का आकड़ा
हरियाणा में विधानसभा चुनाव में भाजपा को 40 सीटें,जजपा को 10,आजाद 7, इनेलो को 1, हलोपा को 1 और कांग्रेस को 31 सीटें मिली थी। भाजपा ने निर्दलीय 7 और जजपा के 10 विधायकों के साथ मिलकर 57 के आंकड़े के साथ सरकार बनाई थी। कुंडू के समर्थन वापसी के बाद सरकार के पास 56 विधायक रह जाएंगे।

 

शून्यकाल न कराए जाने पर कांग्रेस विधायकों का हंगामा
हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में वीरवार को शून्यकाल न कराए जाने पर कांग्रेस विधायकों ने हंगामा किया। विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि वह शून्यकाल के बजाय दो ध्यानाकर्षण प्रस्ताव की अनुमति दे रहे है। इस पर सदन में शोर शराबा होने लगा। विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा और किरण चौधरी सहित कांग्रेस के सभी विधायक अपने आसन से खड़े हो गए। सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री कंवरपाल गुर्जर और अनिल विज ने मोर्चा संभाला। विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि आज दो ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा कराई जाएगी। सदन में ऐसा पहले भी होता रहा है जब शून्यकाल नहीं हुआ।

 

 

कांग्रेस विधायक शून्यकाल कराने पर अड़े रहेे,लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इससे इन्कार कर दिया। स्पीकर ने विपक्ष पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया। स्पीकर ने कहा कि पहले दो ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इसके बाद अगर समय बचा तो शून्य काल करा लेंगे। शून्य काल नहीं कराने पर कांग्रेस ने सदन सेे वाकआउट कर दिया। इस दौरान कांग्रेस विधायकों ने भारत माता की जय के जयकारे लगाए। सदन में गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने संबंधी ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा हुई। स्पीकर ने ध्यानाकर्षण प्रस्तावों को मंजूर करते हुए उन पर चर्चा शुरू कराई। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता से इनेलो विधायक अभय चौटाला भिड़ गए।

 

 

उन्होंने स्पीकर पर बोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं देने का लगाया आरोप। स्पीकर के जवाब से असंतुष्ट होकर अभय ने सदन से वाकआउट कर दिया। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान गन्ना किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस विधायक वेल में पहुंच गए। कांग्रेस विधायक शकुंतला खटक ने भाजपा मुर्दाबाद के नारे लगाए। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के हस्तक्षेप के बाद ही कांग्रेस विधायक अपनी सीटों पर लौटे। गन्ने का समर्थन मूल्य नहीं बढ़ाने पर आरोप-प्रत्यारोप को लेकर विवाद शुरू हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी हरियाणा में देश में सबसे अधिक गन्ने का भाव दिया जा रहा है। जब देश के बाकी राज्य ही गन्ने का रेट नहीं बढ़ा पा रहे हैं तो हम सीमा को कैसे पार कर सकते हैं।

 

 

इस पर नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि गन्ने का रेट उसकी लागत पर निर्धारित करता है,लेकिन पिछले 5 साल के दौरान लागत में काफी बढ़ोतरी हो गई है और गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं बढ़ाया गया है। हुड्डा ने कहा कि सरकार को लागत मूल्य के हिसाब से गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करना चाहिए। इस पर गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि नियमों के अनुसार कॉल टेंशन मोशन पर वही सवाल पूछ सकता है जिसका नाम ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में हो। नारायणगढ़ से कांग्रेस विधायक शैली चौधरी ने कहा कि सरकार बताए कि वह सिर्फ गन्ना किसानों की आय बढ़ाने के लिए क्या कर रही है। वर्तमान में जिस तरीके से गन्ना उत्पादन लागत बढ़ रही है। उसके हिसाब से इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 400 रुपये होना चाहिए।

 

हमारी सरकार में न कोई घोटाला हुआ न होगा-मुख्यमंत्री
हरियाणा विधानसभा बजट सत्र में वीरवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राज्यपाल अभिभाषण पर रिप्लाई किया। सीएम खट्टर ने कहा कि भ्रष्टाचार बिल्कुल सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुरानी सरकार मेंं जो कर्मचारी भर्ती हुए हैं,उनमें से कोई अपनी मां की बालियां तो कुछ और बेच कर नौकरी लगा,लेकिन हमने बिना पर्ची व बिना खर्ची के नौकरी दी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार में न कोई घोटाला हुआ न होगा। खट्टर ने कहा कि हमें को कोई तथ्यात्मक घोटाले के कागज मिलेंगे तो हम जांच करवाएंगे। हमने अपनी व पिछली सभी सरकारों के घोटालों की जांच करवाई।

 

 

 

खट्टर ने कहा कि पोस्ट मेट्रिक घोटाला हुया,इसमें एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इसके राजस्थान और हिमाचल से भी लिंक जुड़े हैं,दोषियों की पहचान हो चुकी है, जिन्हें सजा करवाएंगे। खट्टर ने कहा कि खनन शुद्ध रूप से पवित्र काम नहीं है,मगर कांग्रेस सरकार में 2004 से मार्च 2015 तक औसतन140 करोड़ रुपये आते थे। अब हमारी सरकार में 520 करोड़ रुपये सरकार को मिलते हैं। भविष्य में हम अवैध खनन भी बंद करेंगें। माइनिंग विभाग भी भविष्य में ओवरलोडिंग की जांच करें उन्हें अधिकार देंगे। उन्होंने कहा कि पहले सभी सीएम खनन माफिया से पैसे लेते थे,जिस पर भूपिंद्र सिंह हुड्डा ने कड़ी आपत्ति जताई व जांच की बात की। उन्होंने कहा कि हमारे पास इसका कोई तथ्य नही है,ये सुनी सुनाई बातें हैं।

 

बिना किसी खर्च के खतरनाक बिजली की तारों को करेंगे शिफ्ट
हरियाणा सरकार ने कालोनियों के निवासियों से बिना किसी खर्च के कालोनियों या घरों से ऊपर से गुजरने वाली खतरनाक 33 के.वी. तथा 11 के.वी. लाइनों को शिफ्ट करने का निर्णय लिया है। यह जानकारी हरियाणा के विद्युत तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री रणजीत सिंह ने आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन प्रश्नकाल के दौरान पूछे गये एक प्रश्न के उत्तर में सदन को दी। रणजीत सिंह ने सदन को अवगत करवाया कि उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम द्वारा 23.92 करोड़ रुपये की लागत से 11 के.वी. की 293 और 33 के.वी. की 33 लाइनों का कार्य पूरा हो चुका है जबकि 11 के.वी. की 243 और 33 के.वी. की 28 लाइनों का कार्य प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम द्वारा 46.84 करोड़ रुपये की लागत से अब तक 11 के.वी. की 779 खतरनाक लाइनों तथा 33 के.वी. की 25 लाइनों की शिफ्टिंग का कार्य पूरा हो चुका है जबकि 11 के.वी. की 600 खतरनाक लाइनों तथा 33 के.वी. की 12 लाइनों की शिफ्टिंग का कार्य प्रगति पर है।

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