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हरियाणा में अफसरशाही पर लगाम कसना जरूरी मनोहर-दुष्यंत सरकार  की लगाम” ही तय करेगी सरकार का “अंजाम”

हरियाणा में अफसरशाही पर लगाम कसना जरूरी मनोहर-दुष्यंत सरकार  की लगाम” ही तय करेगी सरकार का “अंजाम”(It will be necessary to rein in the bureaucracy in Haryana, it will decide the reins of the Manohar-Dushyant government.)
=राजकुमार अग्रवाल  =
चंडीगढ़
बीजेपी-जेजेपी गठबंधन की सरकार को सफल होने के लिए चुनौतियों के कई पड़ाव से गुजरना होगा। भाजपा की पिछली सरकार में अफसरशाही को लेकर कई तरह के सवाल खड़े होते रहे हैं।
भाजपा नेताओं और वर्करों का यह आरोप रहा है कि अफसरशाही की मनमानी के कारण पार्टी को जनता की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ा है और इसी के चलते भाजपा को चुनाव में शिकस्त का सामना करना पड़ा है ।(Due to the arbitrariness of the bureaucracy, the party has had to bear the brunt of public displeasure and due to this the BJP has lost the election.)
भाजपा नेताओं का यह भी आरोप रहा है कि अफसरशाही ने भाजपा नेताओं को अनदेखा करने का कार्य किया। छोटे नेताओं के अलावा भाजपा सांसदों और विधायकों की भी ढेरों शिकायतें रही कि बेलगाम अफसरशाही के कारण उनके इलाकों में न तो विकास के कार्य सही समय पर पूरे हो पाए और ना ही जनता की तकलीफों की गंभीरता से सुनवाई हुई।
अफसरशाही से नाराजगी भाजपा को महंगी पड़ी और इसलिए विधानसभा चुनाव में जनता ने भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ जनादेश देने का काम किया। भाजपा के स्थानीय नेताओं और वर्करों में भी चुनाव में जनता की नाराजगी को दूर नहीं कर पाए जिसके चलते भाजपा मिशन 75 को हासिल करने में नाकाम रही।
बीजेपी और जेजेपी(BJP and JJP) गठबंधन की सरकार के सामने भी अफसरशाही को लेकर चुनौतियां सामने खड़ी हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को मिलकर अफसरशाही को इफेक्टिव वर्किंग के लिए तैयार करना होगा।
सरकार के दोनों मुखियाओं को जहां एक तरफ एग्रेसिव अफसरों को सही पदों पर तैनाती देनी होगी, वही लापरवाह अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी करनी होगी।साथ ही हरियाणा में बढ़ रही अफसरशाही की गलत आदत पर अफसरों पर लगाम कसना जरुरी हो गया है
अफसरशाही को बेलगाम छोड़ने की बजाय उसपर लगाम कसनी होगी और अफसरशाही की जवाबदेही भी तय करनी होगी(Accountability of bureaucracy will also have to be decided)। बीजेपी के साथ इस बार जेजेपी का गठबंधन होने के चलते भाजपा नेता और वर्करों के अलावा जेजेपी के नेताओं और वर्करों की भारी संख्या भी सरकार बनने पर बड़ी-बड़ी ख्वाहिशें पूरी होने की उम्मीद कर रही है। इन उम्मीदों के पूरा होने की राह में अफसरशाही की भूमिका ही सबसे महत्वपूर्ण रहेगी।
अफसरों का रवैया और कार्यप्रणाली ही सरकार को पास या फेल करने का काम करेगी। बीजेपी और जेजेपी की सरकार की छवि तय करने का काम भी अफसरशाही ही करेगी।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के ऊपर सरकार का मुखिया होने के कारण अफसरशाही को लेकर ज्यादा जवाबदेही है। उन्हें पिछले सरकार के अनुभव को ध्यान में रखते हुए अफसरशाही को संतुलित तरीके से कार्य करने का सिस्टम तैयार करना होगा।
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को बेहतर तालमेल रखने वाले और कार्य करने की सोच रखने वाले अफसरों की टीम बनाकर सरकार की गतिशीलता के पथ पर दौड़ाना होगा।
बात यह है कि अफसरशाही की चाल और ढाल ही किसी सरकार के पास या फेल होने का शबब बनते हैं।
भाजपा की पिछली सरकार में अफसरशाही पर ज्यादा कंट्रोल नहीं रहा। बड़े-बड़े भाजपा नेताओं की अफसरशाही को लेकर सामने आई शिकायतें इस बात की गवाह है कि अफसरों ने भाजपा नेताओं की सुनवाई करने के बजाय मनमानी का रवैया अपनाया जिसके चलते सरकार के प्रति जनता में नाराजगी बढ़ती चली गई और चुनाव में इसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ा।
अफसरशाही के हावी होने के कारण भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता जनता के कार्यों को तत्परता से नहीं करवा पाए जिसके चलते सरकार की छवि जनता में खराब हुई और इसलिए चुनाव में भाजपा को जनता के गुस्से का शिकार होना पड़ा।
बीजेपी और जेजेपी की नई सरकार को पिछले 5 साल के कड़वे अनुभव को ध्यान में रखकर अफसरशाही को साधना होगा(The new government of BJP and JJP will have to work with bureaucracy keeping in mind the bitter experience of the last 5 years)।मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला (Chief Minister Manohar Lal Khattar and Deputy Chief Minister Dushyant Chautala)को बड़े पदों पर उन्हीं अफसरों को तैनात करना होगा जो जनता के साथ तालमेल रखने में विश्वास रखते हैं और सरकार के फैसले को निर्धारित समय में पूरा रखने की सोच रखते हैं।
ढीले और लापरवाह अफसरों की खिंचाई करते हुए नई सरकार को एग्रेसिव अफसरों की तैनाती करनी होगी। सरकार के फैसलों को लागू करने में अफसरशाही की जवाबदेही तय करने पर भी सरकार सही परिणाम हासिल कर पाएगी।
अगर मनोहर और दुष्यंत की जोड़ी ने अफसरशाही पर लगाम कसते हुए सरकार को चलाया तो दोनों ही पार्टियों के नेताओं के अलावा जनता में भी सकारात्मक संदेश जाएगा।
जन शिकायतों की सुनवाई और निपटारा ही दो ऐसी महत्वपूर्ण चीजें हैं जो किसी भी सरकार पर पास या फेल होने का ठप्पा लगाते हैं। सरकार के फैसलों को लागू करने की जिम्मेदारी जहां पूरी तरह से अफसरशाही पर होती है वहीं दूसरी तरफ जनता के मूड को तय करने का काम भी अफसरशाही ही करती है क्योंकि अफसरशाही का रवैया ही सरकार की छवि बनाता है और यही रवैया ही चुनावी सियासत में जनादेश का आधार बनता है। अब देखना यह है कि मनोहर लाल और दुष्यंत की जुगलबंदी अफसरशाही को किस तरह से बेहतरीन तरीके से हैंडल करते हुए अपनी सरकार के सरकार में आने वाली तमाम रुकावटों को दूर करते हैं।

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