हरियाणा सरकार के लिए 2020 चुनौतियां भरा होगा ,भूपेंद्र हुड्डा को बार-बार कानूनी परिक्रियों से गुजरना पड़ेगा 

हरियाणा सरकार के लिए 2020 चुनौतियां भरा होगा ,भूपेंद्र हुड्डा को बार-बार कानूनी परिक्रियों से गुजरना पड़ेगा

-Ra –
फरीदाबाद । प्रदेश की सत्ता की 2024 की चैंपियनशिप की तैयारियों के लिए “20-20” का साल सभी सियासी खिलाड़ियों की कड़ी परीक्षा देने जा रहा है।2020 में सोनीपत, अंबाला और पंचकूला नगर निगमों की छोटे प्रतियोगिता में सभी सियासी टीमों को अपनी साख बचाने की लड़ाई से गुजरना होगा।लेकिन इससे अलग सभी पार्टियों के बड़े “खिलाड़ियों” को अपना बड़ा रसूख बचाने के लिए बड़ी-बड़ी चुनौतियों से गुजरना होगा।

खट्टर के लिए कप्तानी की कसौटी पर खरा उतरना बड़ा चैलेंज

भाजपा की टीम की कप्तानी कर रहे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के लिए कप्तानी की कसौटी पर खरा उतरना सबसे बड़ा चैलेंज रहेगा। उन्हें “घर” के “गब्बर” खिलाड़ी की नाराजगी का ख्याल रखने के अलावा दूसरी टीमों की चुनौतियों से जूझते हुए भाजपा की टीम को सबसे मजबूत बनाना होगा।मनोहर लाल खट्टर को जनता की इच्छाओं, जरूरतों और उम्मीदों पर खुद को खरा उतारना होगा। टीम का कप्तान होने के नाते मनोहर लाल खट्टर पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वह न केवल सबसे बेहतर खेल खेलें बल्कि टीम के दूसरे खिलाड़ियों को भी बेहतर खेलने के लिए प्रेरित करें।मनोहर लाल खट्टर की कप्तानी पारी ही भाजपा की टीम की आगामी प्रतियोगिताओं के लिए मनोबल और तकदीर तय करने का काम करेगी।मनोहर लाल खट्टर इस बार पिछली बार की तरह खुलकर बैटिंग नहीं कर पाएंगे। उनको टीम में शामिल “मेहमान” खिलाड़ियों को भी संतुष्ट और खुश रखना होगा। साथ ही अपनी टीम के खिलाड़ियों को खुलकर खेलने की छूट देनी होगी।मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को अपनी टीम के खिलाड़ियों को हिट विकेट होने, क्लीन बोल्ड होने या कैच आउट होने से बचने की हिदायतें भी बार-बार देनी होंगी।

हुड्डा को कैच आउट होने से बचना होगा

पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के सामने इस बार सबसे अधिक चुनौतियां खड़ी हुई नजर आ रही हैं। भूपेंद्र हुड्डा को बार-बार कानूनी बाउंसरो का सामना करना पड़ेगा। 2020 में उनके कानूनी अपीलों पर एलबीडब्ल्यू होने की आशंका भी नजर आ रही है।भूपेंद्र हुड्डा पर कानूनी तेज गेंदबाजी के आगे डिफेंसिव खेलते हुए कांग्रेस की टीम को मजबूत आधार देने की जिम्मेदारी है। भूपेंद्र हुड्डा को भी पिछली गलतियों से सबक लेते हुए अकेले बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग करने की बजाय जिम्मेदारियों को दूसरे बड़े खिलाड़ियों के साथ बांटना होगा।भूपेंद्र हुड्डा को यह समझना होगा कि 2024 की चैंपियनशिप जीतने के लिए उन्हें साथी खिलाड़ियों के जोरदार प्रदर्शन की भी जरूरत पड़ेगी। भूपेंद्र हुड्डा को कानूनी यार्करों से घायल हो जाने पर बेटे दीपेंद्र हुड्डा को रिप्लेसमेंट खिलाड़ी के तौर पर भी 2020 में तैयार करना होगा।

dushyant chautala

दुष्यंत को संभलकर खेलने होगी पारी

उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को अपनी पारी बेहद संभलकर खेलनी होगी। “दूसरों” की टीम में शामिल होने के चलते वह अपने मर्जी के हिसाब से न तो फील्डिंग लगा पाएंगे, न ही अपनी बल्लेबाजी तय कर पाएंगे और ना ही जरूरत पर अपने गेंदबाजों को बागडोर सौंप पाएंगे।उन्हें कप्तान मनोहर लाल खट्टर के साथ तालमेल बनाते हुए बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग लगाने की जिम्मेदारी हासिल करने होगी। दुष्यंत चौटाला को सरकार की टीम में साथियों को हिस्सेदारी दिलाने के लिए कप्तान को मनाना होगा।दुष्यंत चौटाला को उप कप्तान के रूप में न केवल अपनी टीम के रिजर्व खिलाड़ियों को मोटिवेट करना है बल्कि उसके साथ-साथ मैच देख रही जनता का दिल भी जीतना है।

om parkash chautala

चौटाला लगाएंगे पूरा दमखम

पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला लड़खड़ा रही इनेलो की टीम का मनोबल बढ़ाने के लिए अंतिम प्रयास करेंगे। 2020 में ही उन्हें जेल से छुटकारा मिल जाएंगे। बेहद खराब हालात में उन्हें अपनी टीम को 2024 के चैंपियनशिप के लिए तैयार करना होगा। ओम प्रकाश चौटाला की “बैटिंग” उनके करियर में कई बार लड़खड़ाती रही है लेकिन हर बार क्लीन बोल्ड होने के बाद वे दोबारा दोगुने उत्साह के साथ वापसी करने में सफल हुए हैं।परिवार की टीम के सबसे मजबूत खिलाड़ियों खुद टीम से बाहर करने का खामियाजा उनको भुगतना पड़ रहा है।खराब फैसलों के कारण इनेलो की टीम बेहद कमजोर हो गई है और उसके फाइनल में पहुंचने के आसार भी बेहद कम नजर आ रहे हैं।कानूनी “बैन” के कारण ओम प्रकाश चौटाला 2024 की चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

सियासी हकीकत को ध्यान में रखकर ही वे अपनी टीम की मजबूती को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्हें पता है कि टीम के कप्तान अभय चौटाला पास टीम को लीड करने के लिए जरूरी योग्यता और दमखम नहीं है। ऐसे में नोनप्लेइंग कैप्टन के रूप में उन्हें उमको ही टीम को प्रतियोगिता में बचाए रखने के लिए पूरा दमखम लगाना होगा ,2020 का सियासी खेल सभी पार्टियों के लिए बड़े मायने नहीं रखता है लेकिन 2024 की सत्ता चैंपियनशिप के लिए चारों बड़ी पार्टियां अभी से तैयारी करती हुई नजर आ रही है।सभी पार्टियां यह जानती हैं कि 2020 में बनाया गया माहौल और तैयारियां ही उन्हें अगले साल में दूसरी पार्टियों से इक्कीस साबित करते हुए 2024 की चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचाने का निर्णायक फैक्टर साबित होंगी।

भाजपा की टीम को फाइनल में पहुंचाने का सबसे बड़ा दारोमदारर कैप्टन मनोहर लाल खट्टर के कंधों पर होगा। मनोहर लाल खट्टर की कप्तानी का पास या फेल होना ही भाजपा के फाइल में पहुंचने के अवसरों को निर्धारित करेगा।कप्तान के रूप में इस बार मनोहर लाल खट्टर को पिछली बार के मुकाबले बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि दूसरी टीमों की मजबूत पोजीशन के चलते उनके लिए आगामी फाइनल का अवसर हासिल करना आसान नहीं होगा।

कानूनी बाउंसरों को झेल रहे पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा की बल्लेबाजी कांग्रेस का भविष्य तय करने का काम करेगी।
इस समय कांग्रेस में दूसरा ऐसा कोई भी खिलाड़ी नहीं है जो उसे 2024 के फाइनल में पहुंचाने का दमखम रखता हो।ओम प्रकाश चौटाला की तरह भूपेंद्र हुड्डा के लिए भी कानूनी‌ अंपायर का फैसला खेल से आउट सकता हैं। इसलिए उन्हें समय रहते अपनी जगह बेटे दीपेंद्र हुड्डा को खेलने के लिए भी तैयार करना होगा।उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के लिए 2020 का साल सबसे महत्वपूर्ण साबित होगा।

पार्टी के नेता और वर्करों के अलावा जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए उन्हें इस साल बेहतरीन पारियां खेलनी होंगी।वह जितना बढ़िया खेलेंगे उतना ही उन्हें तालियां मिलेंगी और वे जितना खराब खेलेंगे उतना ही उनका सियासी करियर प्रभावित होगा‌ 2024 के फाइनल में पहुंचने के लिए 2020 दुष्यंत चौटाला को बेहतरीन खिलाड़ी के तौर पर पार करना होगा।

ओम प्रकाश चौटाला की उम्र और सेहत इनेलो की टीम के भविष्य को तय करेगी। अभय चौटाला की बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग प्लेसमेंट बेहद खराब रही है। ऐसे में उनके बलबूते पर तो इनेलो सेकंड राउंड में भी नहीं पहुंच पाएगी।2020 का “20-20” ईयर प्रदेश सियासी टीमों और खिलाड़ियों को 2024 की चैंपियनशिप के लिए तैयारियां करने का बेहतरीन अवसर दे रहा है।

अब देखना यही है कि कौन-कौन सी टीम और कौन-कौन से खिलाड़ी इस सुनहरे अवसर को अपने पक्ष में भुनाते हैं और बढ़िया तैयारियां करते हुए अपनी कमियों को दूर करते हैं।जो टीम और खिलाड़ी इस साल अपनी कमियों को दूर करने में सफल रहेंगे वहीं अगले चैंपियनशिप में मजबूत बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग करने में सफल रहेंगे। इस साल बिना किसी बड़ी चैंपियनशिप के भी सभी खिलाड़ियों पर जनता की निगाहें जमी रहेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *