मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने झूठ बोला !447 नहीं  312 पदों पर ही मेडिकल अफसरों की नियुक्ति हुई है 

 

 

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने झूठ बोला !447 नहीं  312 पदों पर ही मेडिकल अफसरों की नियुक्ति हुई है

 

 

Chief Minister Manohar Lal lied! Medical officers have been appointed on 442 no 312 posts only.

हरियाणा सरकार ने झूठ बोला ?या सीएम को भी किया गया है गुमराह ,नहीं हुई  प्रदेश में 447 मेडिकल अफसरों की नियुक्ति

 

हरियाणा में  मेडिकल अफसरों की नियुक्ति में भारी गड़बड़झाला

447 के बजाय 312 पदों पर दी गई नियुक्ति
135 पदों को बिना वजह रखा गया खाली

नियुक्ति में मुख्यमंत्री को भी किया गया गुमराह

जनरल कैटेगरी के लिए आरक्षित 27 पोस्टों पर एससी/बीसी और अन्य की नियुक्ति
20 अंक अंक हासिल करने वाले को सरकारी नौकरी और 65 अंक लेने वाले को रखा वेटिंग लिस्ट में

 

Haryana government lied? Or CM has also been misled, 447 medical officers not appointed in the state

There was a huge mess in the appointment of medical officers in Haryana,
Appointment given to 312 posts instead of 447
135 posts remain vacant without reason

Chief minister was also misled in appointment

Appointment of SC / BC and others on 27 posts reserved for general category
The one who scored 20 marks got the government job and the 65 marker was placed in the waiting list.

 

चंडीगढ़(अटल हिन्द ब्यूरो )

 

स्वास्थ्य विभाग के 447 मेडिकल ऑफ अफसरों की नियुक्ति में बड़ा गड़बड़झाला देखने को आया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 3 दिन पहले ही यह घोषणा की थी कि कोरोना महामारी से बचाव के लिए 447 मेडिकल अफसरों को ज्वाइन करवाया गया है लेकिन हकीकत यह है कि 447 नहीं बल्कि 312 मेडिकल अफसरों को ही नियुक्ति दी गई है।
135 पदों को बिना किसी वजह रिक्त रखा गया है।
खास बात यह है कि 20 अंक हासिल करने वाले को नियुक्ति दे दी गई है जबकि 65 अंक हासिल करने वाले प्रत्याशी को वेटिंग में रखा गया है।
कोरोना महामारी के बीच सभी 447 लोगों को नियुक्ति देने की बजाय 135 लोगों को नियुक्ति नहीं देना कई सवालिया निशान खड़े कर रहा है।
मुख्यमंत्री की नॉलेज में 447 नियुक्तियां बताई गई हैं जबकि जॉइनिंग सिर्फ 312 लोगों को ही करवाई जा रही है।
मेडिकल ऑफिसर की भर्ती में जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों के साथ नाइंसाफी की गई है। जरनल कैटेगरी की 87 पोस्टों में से 27 पोस्टों पर एससी/बीसी और दूसरे आरक्षित वर्गों के प्रत्याशियों को नियुक्ति गई है। इस कारण सिर्फ जरनल कैटेगरी के 60 लोगों को ही नौकरी मिल पाई है।
एक तरफ जहां 135 पदों को खाली रखा गया है वहीं आरक्षित कैटेगरी में सिर्फ 20 नंबर हासिल करने वाले को भी मेडिकल ऑफिसर बना दिया गया है।
सोचने की बात यह है कि 20 नंबर हासिल करने वाले लोगों की स्वास्थ्य की देखभाल करेंगे या उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का काम करेंगे।

 

 

दूसरी तरफ जनरल कैटेगरी में 65 नंबर लेने वाले अभ्यार्थी को भी वेटिंग लिस्ट में रखा गया है।
इस गड़बड़झाले से यह पता चल रहा है कि मनमर्जी के साथ ही नियुक्तियां की गई है और न्यूनतम अंको की कोई सीमा नहीं रखी गई है जिसके चलते 20 अंकों वाले सरकारी डॉक्टर बन गए हैं जबकि 65 अंकों वाले नौकरी पाने से वंचित रह गए हैं।
खासतौर पर 135 सीटों को खाली रखना बड़े सवालों को जन्म दे रहा है। जब मुख्यमंत्री ने 447 डॉक्टरों की जॉइनिंग की बात कही गई है तो स्वास्थ्य विभाग ने 135 पदों को उनकी नॉलेज में लाए बगैर क्यों खाली रखा है?
कोरोना महामारी के बीच में जब डॉक्टरों की भारी कमी प्रदेश में है तो ऐसे में 135 पदों को भी खाली नहीं रखा जाना चाहिए था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *