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हुड्डा परिवार किसानों के साथ कर रहा चालबाजी

हुड्डा परिवार किसानों के साथ कर रहा चालबाजी
काला दिवस पर भूपेंद्र हुड्डा ने किसान आंदोलन के समर्थन में नहीं कहा एक भी शब्द
बीजेपी के डर से दिल्ली के घर पर नहीं लगाया काला झंडा
दीपेंद्र हुड्डा ने भी शाम को 3 बजे अपने फेसबुक पेज पर 4 लाइनें डालकर औपचारिकता पूरी की
-अटल हिन्द/योगेश गर्ग
फरीदाबाद । कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के समर्थन के बड़े-बड़े दावे करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की पोल खुल गई है। आज किसान आंदोलन के छह महीने पूरे होने पर मोदी सरकार के खिलाफ मनाए जा रहे काला दिवस पर भूपेंद्र हुड्डा परिवार bjp के डर से पूरी तरह चुप्पी मारकर बैठ गया और  काला दिवस के बारे में एक भी शब्द बोलने की जरुरत नहीं समझी।
भूपेंद्र हुड्डा ने अपने घर पर किसानों के समर्थन में काला झंडा भी नहीं लगाया और ना ही किसानों के समर्थन में कोई बयान जारी किया। उनके दिल्ली के घर और कार्यालय पर कोई काला झंडा नजर नहीं आया।
उनके सांसद बेटे और उत्तराधिकारी दीपेंद्र हुड्डा ने भी आज काला दिवस के अवसर पर किसानों के समर्थन में कोई बयान जारी नहीं किया। उन्होंने श्याम को 3 बजे अपने फेसबुक पर 4 लाइनें लिख कर किसानों के समर्थन की औपचारिकता पूरी कर ली।
आज यह साबित हो गया है कि भूपेंद्र हुड्डा बीजेपी के प्रैशर में ही काम कर रहे हैं। वह वही काम करते हैं जो बीजेपी उन्हें करने के लिए कहती है।
देश की 11 अन्य पार्टियों के साथ कांग्रेस ने भी कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन को समर्थन देते हुए आज काला दिवस मनाने का ऐलान किया था।
कांग्रेस हाईकमान के ऐलान के बाद प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं कुलदीप बिश्नोई और रणदीप सुरजेवाला ने अपने घरों पर काले झंडे लगाकर कांग्रेस किसान आंदोलन का समर्थन किया ।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी शैलजा ने भी वीडियो बयान जारी करके किसानों को समर्थन देने की बात कही,
लेकिन प्रदेश कांग्रेस में सबसे बड़ा रसूख रखने वाले भूपेंद्र हुड्डा परिवार ने किसानों के समर्थन में कोई कार्य नहीं किया।
खास बात यह भी है कि उनके खेमे से जुड़े हुए दूसरे किसी भी नेता ने भी किसान आंदोलन के समर्थन में अपने घरों पर काला झंडा नहीं लगाया।
जाहिर सी बात है कि भूपेंद्र हुड्डा ने अपने समर्थकों को कोई संदेश नहीं दिया जिसके चलते उनके खेमे के नेता अपने घरों में दुबके रहे और किसान आंदोलन का समर्थन करने से परहेज कर गए।
बार-बार यह आरोप लगते रहते हैं कि भूपेंद्र हुड्डा बीजेपी की कठपुतली बन गए हैं और उसी के इशारे पर सारे काम करते हैं । पहली बार सुभाष चंद्रा के राज्यसभा चुनाव में वह स्याही कांड के जरिए बीजेपी के साथ भूपेंद्र हुड्डा की मिलीभगत सामने आई थी।
आज बेहद अहम मौके पर पूरा हुड्डा परिवार का चुप्पी साधना इस चर्चा को बड़ा वजन देने का काम कर गया परिवार कानूनी कार्रवाई के डर से बीजेपी के नीचे दब गया है।
बार-बार किसानों के समर्थन में खड़े होने के दावे करने वाले भूपेंद्र हुड्डा परिवार का अपने घर पर काला झंडा नहीं लगाना और कोई बयान जारी नहीं करना, उनके समर्थकों का घर में दुबकना यह साबित कर दिया है कि भूपेंद्र हुड्डा दिखावे की राजनीति कर रहे हैं और असल में वही करते हैं जो बीजेपी उन्हें करने के लिए कहती है।
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