हैदराबाद: न तारीख…न गवाह…फैसला ऑन द स्पॉट पुलिस ने तड़के किया एनकाउंटर, दो जवान भी जख्मी

हैदराबाद: न तारीख…न गवाह…फैसला ऑन द स्पॉट
पुलिस ने तड़के किया एनकाउंटर, दो जवान भी जख्मी
अटल हिंद
नई दिल्ली/हैदराबाद । तेलंगाना में महिला पशु-चिकित्सक के साथ दुष्कर्म एवं हत्या मामले के सभी चारों आरोपी शुक्रवार को तड़के यहां शादनगर के चटनपल्ली में पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गये। इस दौरान दो पुलिसकर्मी भी घायल हो गये। साइबराबाद पुलिस आयुक्त वीसीसी सज्जानर ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए कहा कि यह घटना शुक्रवार को तड़के तीन और छह बजे के बीच हुई है। इस दौरान दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। उन्होंने  बताया कि चारों आरोपियों ने उस समय भागने की कोशिश की, जब क्राइम सीन को रिक्रिएट करने के लिए उन्हें उस जगह ले जाया गया, जहां महिला चिकित्सक का शव मिला था। इस दौरान आरोपियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके और उनसे हथियार छीनकर उन पर गोली चलानी शुरू कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षा के लिए चारों आरोपियों-मोहम्मद अरीफ, नवीन, जोल्लु शिव और चिंताकुंता चेन्नाकेशवुलु को गोली मार दी। मुठभेड़ उस स्थान से कुछ ही दूरी पर हुई जहां महिला पशु-चिकित्स को जलाया गया था। थोड़ी देर के बाद पुलिस के सभी वरिष्ठ अधिकारी मुठभेड़ स्थल पर पहुंचे।  गौरतलब है कि राज्य के एक सरकारी अस्पताल में सहायक पशु-चिकित्सक के रूप में कार्यरत 26 वर्षीय महिला का शव 28 नवम्बर की सुबह शादनगर में जली हुई हालत में मिला था। साइबराबाद पुलिस ने 29 नवम्बर को इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया था और उन्हें 30 नवम्बर को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। महिला चिकित्सक के पिता ने चारों आरोपियों को मारने के लिए हैदराबाद पुलिस का आभार व्यक्त किया। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, नौ दिनों बाद आज मेरी बेटी की आत्मा को शांति मिली है।
“तेलंगाना सरकार ने मामले की जल्द से जल्द सुनवाई के लिए बुधवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने के आदेश जारी किये थे। राज्य सरकार ने मामले की जल्द सुनवाई के लिए महबूबनगर जिले में प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत को विशेष अदालत के रूप में नामित किया था। दुष्कर्म एवं हत्या की इस घटना के बाद देश के लोगों ने आक्रोश था और जल्द से जल्द न्याय की मांग कर रहे थे। लोगों ने चारों आरोपियों को मुठभेड़ के दौरान मारने पर साइबराबाद पुलिस आयुक्त वीसी सज्जानर की प्रशंसा करते हुए उन्हें ‘हीरो” करार दिया। गत 28 नवम्बर को हुए इस दर्दनाक घटना के बाद आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने पीड़तिा के लिए जल्द से जल्द न्याय दिलाने की मांग की थी। इस दौरान दिसम्बर 2008 के मामले का उदाहरण भी दिया गया जब वारंगल की इंजीनियरिंग की दो छात्राओं पर एसिड से हमला करने वाले तीन संदिग्धों को आंध्र प्रदेश में पुलिस ने मुठभेड़ में मारा था। संयोगवश उस समय वारंगल जिले के पुलिस अधीक्षक सज्जानर ही थे।
 मुठभेड़ स्थल पर लोगों ने पुलिस के समर्थन में नारे लगाये और उनपर फूल भी बरसाये।
दोषियों को उस जगह लाया गया था जहां डॉक्टर का शव मिला था
क्राइम सीन रिक्रिएट करने के वक्त दरिंदों ने की भागने की कोशिश
पुलिस के हथियार छीनकर गोलियां चलानी शुरू कीं, पत्थर भी फेंके
जवाब में पुलिस ने भी कार्रवाई कर चारों अपराधियों को मार गिराया
महिला डॉक्टर से दुष्कर्म के बाद जलाकर मार डाला था बदमाशों ने
पॉस्को एक्ट के तहत आरोपियों को दया याचिका से वंचित करना चाहिए : कोविंद
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महिला सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि पॉस्को एक्ट के तहत दुष्कर्म के आरोपियों को दया याचिका से वंचित कर देना चाहिए। कोविंद शुक्रवार को आबू रोड़ में ब्राह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय संस्थान में महिला सशक्तीकरण द्वारा सामाजिक परिवर्तन विषय पर आयोजित सम्मेलन में यह बात कही। उन्होंने कहा कि बेटियों पर होने वाले आसुरी प्रहार पूरे देश की आत्मा को झकझोकर का रख  देती है। इस तरह का संविधान में एक कानून है, जिस पर पुनर्विचार होना चाहिए।  पोस्को एक्ट के तहत आरोपियों को दया याचिका से वंचित कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह काम  संसद का है। गौरतलब है कि कोविंद का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हैदराबाद में एक पशु चिकित्सक की दुष्कर्म के बाद जला कर मार डालने और उन्नाव में बलात्कार पीड़िता को दिनदिहाड़े जलाने की घटना से देश में रोष का माहौल बना हुआ है।
राष्ट्रपति को भेजी गयी निर्भया के दोषी विनय की दया याचिका 
 गृह मंत्रालय ने निर्भया बलात्कार मामले के एक दोषी विनय शर्मा की दया याचिका के संबंध में अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेज दी है।  गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार मंत्रालय को विनय शर्मा की दया याचिका के बारे में दिल्ली के उप राज्यपाल की सिफारिश मिली थी, जिसे उसने अपनी सिफारिश के साथ राष्ट्रपति को भेज दिया है। रिपोर्टों के अनुसार उप राज्यपाल ने विनय शर्मा की दया याचिका को खारिज कर दिया है। अभी यह नहीं पता चला है कि गृह मंत्रालय ने अपनी सिफारिश में क्या कहा है, लेकिन सूत्रों ने पुष्टि की है कि इस बारे में राष्ट्रपति को सिफारिश भेज दी गयी है। विनय शर्मा चार दोषियों में से एक है और उसने फांसी की सजा के खिलाफ दया याचिका दायर की है। यदि गृह मंत्रालय भी विनय शर्मा की दया याचिका को खारिज करने की सिफारिश करता है, तो निर्भया बलात्कार मामले के चारों दोषियों को फांसी की सजा का रास्ता साफ हो जायेगा। निर्भया के साथ राजधानी दिल्ली में 16 दिसम्बर 2012 की रात सामूहिक बलात्कार किया गया था। दोषियों ने उसके साथ मार पीट भी की थी, जिसमें उसे गंभीर चोट आयी थी और बाद में उसकी मौत हो गयी थी। इस मामले में छह लोगों को दोषी पाया गया था जिनमें से चार मुकेश , पवन, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह को मौत की सजा सुनायी गयी है। पांचवें अभियुक्त राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी, जबकि छठा उस समय नाबालिग था और उसे तीन वर्ष की कैद की सजा सुनायी गयी थी।
हमने टीवी पर देखा कि वे मुठभेड़ में मारे गए। हम खुश हैं। लोग भी खुश हैं। मैं मुठभेड़ के लिए तेलंगाना सरकार आैर पुलिस का शुक्रिया अदा करता हूं।
 -डॉक्टर के पिता
हम खुश हैं। हमें इसकी उम्मीद नहीं थी।  इस घटना के बाद लोगों को ऐसी घटनाएं (महिलाओं के खिलाफ) करने से डरना चाहिए।
-डॉक्टर की बहन  
इससे देश के लिए  भयानक परिपाटी शुरू होगी। जो भी हुआ बहुत भयानक हुआ है । आप कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकते, उन्हें (आरोपियों को) अदालत से तो फांसी मिलनी ही थी।
-मेनका गांधी 
नरपिशाचों को उनके पाप की सजा मिली : शिवराज
 तेलंगाना में एक युवती के साथ दुष्कर्म और जलाकर मारने के मामले के सभी चारों आरोपियों को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराने की घटना पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंाी शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जो जस कीन तो तस फल चाखौं। चौहान ने अपने ट््वीट में कहा कि हैदराबाद में नरपिशाचों को उनके पाप की सजा मिली। पूरे देश को बड़ा सुकून मिला। दुष्टों के साथ यही व्यवहार होना चाहिए। चौहान ने अपना एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि इस मुठभेड़ के बाद पूरे देश ने चैन की सांस ली है।
आरोपियों ने निर्दयता से बेटी को जिंदा जलाकर मार डाला था। उन्होंने कहा कि मुठभेड़ पर सवाल उठाने वालों को बेटी के साथ हुयी घटना को लेकर पहले सोचना चाहिए।
निर्भया की मां ने कहा-सात साल के बाद जख्मों पर मरहम लगा 
 निर्भया की मां ने कहा कि हैदराबाद पुलिस ने दुष्कर्म के आरोपियों के साथ जैसा सलूक किया वह प्रशंसनीय है।
निर्भया की मां ने कहा कि वह हैदराबाद पुलिस की दरियादिली की दाद देती हैं और उनका बहुत धन्यवाद करती हैं। मुठभेड़ में मारे गये आरोपी इसी लायक थे, क्योंकि उन्होंने अपना गुनाह कबूल कर लिया था। उन्होंने कहा कि अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ा हुआ था कि पुलिस हिरासत से भी भागने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सात साल के बाद उनके जख्मों पर मरहम लगा है। सात साल से उनके जख्मों पर नमक छिड़का जा रहा था।
निर्भया के दोषियों को जल्द से जल्द फांसी दी जाये, ताकि उन्हें इंसाफ मिल सके। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने ट््वीट कर कहा एक आम नागरिक के रूप में मुझे खुशी हो रही है कि यह अंत था जो हम सभी उनके लिए चाहते थे, लेकिन यह अंत कानूनी प्रणाली के माध्यम से होना चाहिए था। यह उचित प्रक्रियाओं के माध्यम से होना चाहिए था। उन्होंने कहा, ‘हमने हमेशा उनके लिए मृत्युदंड की मांग की है, और यहां पुलिस सबसे अच्छी जज है, मुझे नहीं पता कि यह किन परिस्थितियों में यह हुआ है।” बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने हैदराबाद की घटना पर कहा कि हैदराबाद पुलिस से उत्तर प्रदेश पुलिस और  दिल्ली पुलिस को सीख लेने की जरूरत है तभी बढ़ती दुष्कर्म की घटनाएं रुकेंगी। उन्होंने कहा कि पुलिस ऐसे आरोपियों को सरकारी मेहमान बनाकर रखती है, जो बड़े शर्म की बात है। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा कि हैदराबाद की घटना के आरोपियों के साथ जो हुआ है, अच्छा हुआ है लेकिन वह अपना आमरण अनशन अब भी जारी रखेंगी। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया लड़कियों की कमर तोड़ देती हैं। इसके लिए सख्त से सख्त कानून होना चाहिए और आरोपियों को जल्द से जल्द फांसी मिलनी चाहिए ताकि अपराधियों के मन डर पैदा हो।
गौरतलब है श्रीमती मालीवाल हैदराबाद की घटना के बाद देश भर में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने और दुष्कर्म के आरोपियों पर मुकदमा चलाकर उन्हें छह महीने में फांसी की सजा देने की मांग को लेकर पिछले तीन दिन से धरने पर बैठी है। आज उनके अनशन का चौथा दिन है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए पर गैर न्यायिक तरीके से नहीं। इस तरह हत्या कर न्याय देना ठीक नहीं। उन्होंने कहा कि निर्भयाकांड के बाद 2012 में जो सख्त कानून बने उसका पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा मुठभेड़ में आरोपियों को मार गिरना न्याय नहीं है।

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