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कंजकों को अपने अपने घर बुलाने की मची होड़—- अष्टमी पर्व के दिन कंजकों की खली कमी-

लड़कियों की कमी के कारण अष्टमी पर्व के दिन भर लोगो को भटकना पड़ा।

कंजकों को अपने अपने घर बुलाने की मची होड़—-
अष्टमी पर्व के दिन कंजकों की खली कमी——
कैथल
दुर्गा अष्टमी के दिन छोटी छोटी कंजकों को अपने घर पर पूरी श्रद्धा के साथ भोजन कराने की परंपरा है कंजकों से आश्रीवाद प्राप्त करना माता रानी का अश्रीवाद माना जाता है लेकिन गांव से लेकर शहर में लड़कियों की कमी के कारण अष्टमी पर्व के दिन भर लोगो को भटकना पड़ा। रविवार का दिन होने के बाबजूद लोगो को कंजकों के इन्जार कई घरों के बाहर भी करते देखा गया माना जाता है कि कंजकों को भोजन करा कर ही श्रदालु व्रत खोलते हैं। अष्टमी के दिन हलवा, पूरी ओर काले चने का पकवान तकरीबन हर घर मे बनता है। लेकिन इनको अपने घर पर बुला कर भोजन करना लोगो को सुबह से ही कंजकों को बुलाने की तैयारी में जुट गए। कंजक न मिलने पर कई लोगों ने मंदिरों के बाहर बैठी कन्याओं को घर बुलाकर भोजन कराया, तो कुछ ने झुग्गी बस्ती में जाकर कन्याओं को भोजन कराया और रुपये, कपड़े, टॉफी, चाकलेट, फल आदि भेंट किए।

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