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1144 करोड़ रुपये के कथित सिटी सेंटर घोटाले में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह 31 लोग हुए बरी

1144 करोड़ रुपये के कथित सिटी सेंटर घोटाले में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह 31 लोग हुए बरी
लुधियाना (अटल हिन्द ब्यूरो ) : पंजाब की राजनीति में तूफान लाने वाले 1144 करोड़ रुपये के कथित सिटी सेंटर घोटाले में आज फैसला आ गया है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और अन्यों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने विजिलेंस की तरफ से दायर की गई क्लोजर रिपोर्ट को मंजूर करते हुए मामले को रद्द कर दिया है। जज ने कहा कि किसी भी आरोपी के खिलाफ क्रिमिनल केस के सुबूत नहीं मिले हैं इसलिए केस से सभी को बरी किया जाता है। इस मामले में 36 आरोपी हैं जिनमें से चार की मौत हो चुकी है। अन्य 32 के खिलाफ कैप्टन की सरकार बनने के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने लुधियाना की अदालत में अगस्त 2017 में क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी। इसी रिपोर्ट को आज मंजूर कर लिया गया। फैसले के मद्देनजर अदालत के अंदर और बाहर सुरक्षा कड़ी की गई था। चारों तरफ भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था।मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, उनके बेटे रणइंदर सिंह, दामाद रमिंदर सिंह और अन्य 29 इस मामले में आरोपी थे। सभी को कोर्ट ने राहत दी है। सुनवाई के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि अदालत ने हमारी दलीलों को मान लिया है। हमारे खिलाफ झूठे आरोप लगाकर केस दर्ज किया गया था। वहीं कोर्ट का फैसला आने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लड्डू बांटे। मुख्यमंत्री बुधवार दोपहर अदालत परिसर में पहुंचे। इस दौरान उनके साथ कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु भी थे।
इससे पहले कि अदालत क्लोजर रिपोर्ट पर कोई निर्णय लेती, एफआईआर दर्ज करने वाले तत्कालीन एसएसपी कंवलजीत सिंह ने अदालत में यह कहते हुए अरजी लगाई कि चूंकि वह इस मामले में शिकायतकर्ता हैं और अब उन पर क्लोजर रिपोर्ट पर सहमति देने का दबाव बनाया जा रहा है, इसलिए इस केस में फैसला लेने से पहले उनका पक्ष सुना जाए। अदालत ने यह अरजी स्वीकार करते हुए मामले पर आगे सुनवाई शुरु कर दी, जिस पर फैसले की घड़ी आ गई है।
फ्लैशबैक पर नजर
इस मामले में कथित भ्रष्टाचार की बात 13 साल पहले सितंबर 2006 में तब सामने आई थी, जब कैप्टन की सरकार थी। जांच आगे बढ़ती गई और साल 2007 में सत्ता परिवर्तन के बाद मामला दर्ज किया गया। अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के पिछले कार्यकाल में 23 मार्च 2007 को कैप्टन अमरिंदर सिंह व अन्य के खिलाफ सिटी सेंटर घोटाले में मामला दर्ज हुआ था।

130 पेजों की चार्जशीट
दिसंबर 2007 में 130 पेजों की चार्जशीट दाखिल की गई। इस मामले में 36 आरोपी हैं जिनमें से चार की मौत हो चुकी है। अन्य 32 के खिलाफ कैप्टन की सरकार बनने के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने लुधियाना की अदालत में अगस्त 2017 में क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी।
यह था सिटी सेंटर प्रोजेक्ट
लुधियाना में सिटी सेंटर प्रोजेक्ट बनाने की योजना 1979 में बनाई गई थी। इसके लिए 26.44 एकड़ भूमि आरक्षित की गई थी। लेकिन यह प्रोजैक्ट कई साल लटकने के बाद 2005 में प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत इसे तैयार करने का फैसला लिया गया।

खंडहर बन चुके सिटी सेंटर में ये इमारतें बननी थीं,-26.44 एकड़ जगह सिटी सेंटर के लिए आरक्षित।-2005 में प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत प्रोजेक्ट तैयार। -मल्टी प्लेक्स, शानदार शॉपिंग मॉल, सुपर मार्केट, ट्रेड सेंटर, फूड प्लाजा, ऑफिस, सिटी म्यूजियम, रीक्रिएशन सेंटर, आईटी सेंटर, हेल्थ सेंटर, बैंक आदि बनाए जाने थे। -साइट का कुल एरिया 10 लाख 70 हजार 553 वर्ग फुट है।
-यहां पार्किंग समेत 26 लाख 89 हजार 604 वर्ग फुट एरिया में निर्माण होना था। -2300 कारों के लिए कार पार्किंग का निर्माण किया जाना था।  इसमें 2300 कारों की पार्किंग की व्यवस्था भी की जानी थी। जैसे-तैसे सिटी सेंटर का निर्माण कार्य शुरु हुआ और विवाद के चलते रुक भी गया। तेरह साल में इस प्रोजैक्ट के तहत हुआ निर्माण खंडहर में बदल चुका है।

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