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13 अप्रैल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि : पंडित विशाल शर्मा

13 अप्रैल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि : पंडित विशाल शर्मा

कैथल, 07 अप्रैल। चैत्र मास का आरंभ हो चुका है। चैत्र मास में ही चैत्र नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का पर्व 13 अप्रैल से आरंभ हो रहा है। यह जानकारी देते हुए करनाल रोड स्थित श्री हनुमान वाटिका के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि इस  बार 13 अप्रैल, मंगलवार से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के पावन दिनों में मां धरती पर ही निवास करती हैं। इन दिनों में मां को प्रसन्न करने के लिए व्रत भी किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इन दिनों में मां की पूजा- अर्चना करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि में नियमों का पालन महत्वपूर्ण माना गया है. नवरात्रि में विधि पूर्वक पूजा करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। चैत्र नवरात्रि में मां की पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति मिलती है वहीं सुख, समृद्धि और जीवन में शांति बनी रहती है। पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि पंचांग के अनुसार 13 अप्रैल मंगलवार को चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा की तिथि से नवरात्रि का पर्व शुभारंभ होगा। नवमी की तिथि 21 अप्रैल को पड़ेगी। वहीं नवरात्रि व्रत पारण 22 अप्रैल दशमी की तिथि को किया जाएगा। पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों में मां के नौ रूपों की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। धार्मिक पुराणों में मां के नौ रूपों का वर्णन है।

मां का प्रथम रूप : शैलपुत्री

13 अप्रैल को मां के प्रथम रूप की पूजा की जाएगी। मां के प्रथम रूप को “माता शैलपुत्री” के नाम से जाना जाता है। मां शैलपुत्री के दाएं हाथ में त्रिशूल रहता है और बाएं हाथ में मां ने कमल धारण किया हुआ है। मां का वाहन बैल है, इसलिए मां शैलपुत्री को वृषभारूढा के नाम से भी जाना जाता है।

मां का दूसरा रूप : देवी ब्रह्मचारिणी

14 अप्रैल को मां के दूसरे रूप की पूजा की जाएगी। मां दुर्गा के दूसरे रूप को “देवी ब्रह्मचारिणी” के नाम से जाना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी दाएं हाथ में माला और बाएं हाथ में कमण्डल लिए हुई हैं।

मां का तीसरा रूप: मां चंद्रघंटा

15 अप्रैल को मां के तीसरे रूप की पूजा की जाएगी। मां दुर्गा के तीसरे रूप को मां चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। मां के दस हाथ हैं और मां अस्त्र शस्त्र से सुसज्जित हैं। मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्ध चंद्रमा विराजमान है, जिस वजह से मां का नाम चंद्रघंटा पड़ा।

देवी का चौथा रूप : माता कूष्मांडा

16 अप्रैल को मा दुर्गा के चौथे स्वरूप की पूजा की जाएगी। मां के चौथे स्वरूप को माता कूष्मांडा के नाम से जाना जाता है। मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं और मां सिंह की सवारी करती हैं। मां के हाथों में चक्र, गदा, धनुष, कमण्डल, कलश, बाण और कमल सुसज्जित हैं।

देवी का 5वां रूप : माता स्कंदमाता

17 अप्रैल को मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप की पूजा की जाएगी। मां के पांचवें स्वरूप को माता स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। मां की चार भुजाएं हैं और मां ने अपनी दाएं तरफ की ऊपर वाली भुजा से भगवान कार्तिकेय को पकड़ा हुआ है। मां स्कंदमाता का वाहन सिंह है।

देवी का 6वां रूप : मां कात्यायनी

18 अप्रैल को मां दुर्गा के छठे स्वरूप की पूजा की जाएगी। माता के छठे स्वरूप को मां कात्यायनी के नाम से जाना जाता है। मां का रंग स्वर्ण की भांति अन्यन्त चमकीला है और इनकी चार भुजाएं हैं। मां कात्यायनी का वाहन भी सिंह हीं है।

देवी का 7वां रूप: मां कालरात्रि

19 अप्रैल को मां के सांतवें स्वरूप की पूजा- अर्चना की जाएगी। मां के सांतवें स्वरूप को माता कालरात्रि के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता कालरात्रि तमाम आसुरिक शक्तियों का विनाश करने वाली हैं। मां के चार हाथ और तीन नेत्र हैं। मां का वाहन गधा है।

देवी का 8वां रूप: मां महागौरी

20 अप्रैल को मां के आठवें स्वरूप की पूजा- अर्चना की जाएगी। मां के आठवें स्वरूप को मां महागौरी के नाम से जाना जाता है। मां का वाहन बैल और इनके चार हाथ हैं। मां का वर्ण सफेद है और इनके आभूषण भी श्वेत रंग के ही हैं।

देवी का 9वां रूप : मां सिद्धिदात्री

21 अप्रैल को मां नौवें स्वरूप की पूजा- अर्चना की जाएगी। मां के नौवें स्वरूप को मां सिद्धिदात्री के नाम से जाना जाता है। मां का वाहन सिंह है और इनके चार हाथ हैं। मां कमल पुष्प पर विराजमान हैं।

पंडित विशाल शर्मा

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