देश के अंदर राज्यों की सीमाएं  कैसे सील हो सकती है(borders of states be sealed within the country) राज्यों को ऐसा करने का अधिकार है?

16 मौतों की जिम्मेवार किस राज्य की सरकार  ,

देश के अंदर राज्यों की सीमाएं  कैसे सील हो सकती है। राज्यों को ऐसा करने का अधिकार है?

======राजकुमार अग्रवाल ======

The government of which state is responsible for 16 deaths, how can the borders of states be sealed within the country. Do states have the right to do so?

8 मई को सुबह पांच बजे महाराष्ट्र के औरंगाबाद के निकट रेल पटरी पर 16 श्रमिक कटकर मर गए। ये श्रमिक जलगांव की फैक्ट्री में काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन की वजह से फैक्ट्री बंद हो गई और अब ये श्रमिक रेल पटरी पर पैदल चल कर ही औरंगाबाद रेलवे स्टेशन पर जा रहे थे। श्रमिकों की योजना थी कि औरंगाबाद से ट्रेन के जरिए अपने मध्यप्रदेश के शेडोल जिले में पहुंच जाएंगे। चूंकि महाराष्ट्र सरकार की ओर से कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई, इसलिए ये श्रमिक जलगांव से पैदल ही औरंगाबाद पहुंच रहे थे। चूंकि पैदल चल रहे थे, इसलिए रात को थकान होने पर रेल पटरी पर ही सो गए।

 

 

श्रमिक  निश्चित थे कि यात्री ट्रेनों का आवागमन बंद है, इसलिए उन्हें कोई खतरा नहीं है। लेकिन अंधेरे में आई माल गाड़ी ने 16 श्रमिकों को एक साथ काट डाला। अब इस घटना को लेकर आरोप प्रत्यारोप हो रहे हैं।लेकिन किसी भी सरकार ने 16 निर्दोष मौतों की जिम्मेवारी नहीं ली और ना ही किसी सरकार ने अपनी गलती मानी क्यों ? जबकि सच्चाई ये है कि श्रमिकों के कटने की घटना राज्य सरकारों के आपसी तालमेल के अभाव का नतीजा है। पहले तो राज्यों ने वाहवाही लूटने के लिए अपने श्रमिकों को वापस लाने का ऐलान कर दिया। इसके लिए केन्द्र पर दबाव डालकर श्रमिक स्पेशल ट्रेने भी चलवा ली।

 

 

लेकिन इसके बावजूद भी राज्यों के बीच तालमेल नहीं हो सका। राज्यों ने अपने श्रमिकों को लाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी करवा लिए। तब किसी ने भी यह नहीं सोचा कि आखिर 32 करोड़ श्रमिकों को इधर से उधर कैसे पहुंचाया जाएगा? एक अनुमान के मुताबिक निर्माण, कपड़ा ऑटोमोबाइल, कृषि, खनिज ईंट भटटा आदि से जुड़े उद्योगों में 32 करोड़ श्रमिक कार्यरत हैं जो एक दूसरे प्रांतों के हैं। चूंकि कोरोना वायरस के मद्देनजर लॉकडाउन अचानक हुआ है, इसलिए ऐसे श्रमिक फंस गए। प्रवासी श्रमिकों को लाने की पहल सबसे पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने की। इसके लिए केन्द्र से स्पेशल ट्रेन  भी चलवाई।

 

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लेकिन अब यही राजस्थान अपनी सीमाओं को सील कर रहा है। सीएम अशोक गहलोत को डर है कि दूसरे राज्यो के श्रमिक राजस्थान में आकर कोरोना फैलाएंगे। गहलोत को यह बाद तब सोचनी चाहिए थी जब प्रवासी राजस्थानियों को लाने की घोषणा की गई। कोरोना वायरस तो प्रवासी राजस्थानी श्रमिक भी ला सकते हैं। अच्छा होता हर राज्य अपने यहां फंसे या रह रहे श्रमिकों के लिए उपयुक्त व्यवस्था करता। जब हम कह रहे हैं कि कोरोना संक्रमित महामारी है तो श्रमिकों को लाने का निर्णय क्यों लिया गया? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लॉडाउन के पहले से कह रहे है जो जहां है वहीं रहे। लेकिन पीएम की मंशा के विपरीत राज्यों ने अपने श्रमिकों को लाने की योजना बना ली।

 

 

 

इससे जाहिर है कि केन्द्र और राज्यों के बीच कोरोना से लडऩे की समान नीति नहीं है। केन्द्र कुछ सोचता है तो राज्य अलग सोच रखते हैं। अब जिस तरह राज्य अपनी अपनी सीमाएं सील कर रहे हैं उससे राज्यों के बीच तालमेल बिलकुल खत्म हो गया है। इस सच्चाई को कोई नहीं झूठला सकता कि राजनीतिक कारणों से राज्यों ने पहले से ही मतभेद थे, लेकिन अब कोरोना वायरस के मद्देनजर श्रमिक समस्या को लेकर मतभेद चरम पर पहुंच गए हैं।

 

 

सवाल उठता है कि देश के अंदर राज्यों की सीमाएं  कैसे सील हो सकती है। क्या राज्यों को ऐसा करने का अधिकार है? हमारे देश की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि कोई राज्य अपनी सीमा को सील नहीं कर सकता है।

 

 

 

राजस्थान चाहता है कि गुजरात और मध्यप्रदेश के श्रमिक उसकी सीमा में न आए। इसी प्रकार हरियाणा चाहता है कि दिल्ली के लोग हरियाणा में आवागमन नहीं करे। इतना ही नहीं चारा राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया है कि वे अपने प्रदेश के श्रमिको को न बुलाए। यानि श्रमिकों को लेकर देशभर के हालात बिगड़े हुए हैं।

 

 

 

स्पेशल ट्रेन चलाने के बाद भी करोड़ों मजदूर पैदल चल रहे हैं। इस समय श्रमिको को लेकर पूरे देश में अफरा-तफरी मची हुई है। एक ओर कोरोना वायरस अपना भयानक रूप दिखा रहा है ते दूसरी ओर राज्य श्रमिक समस्या से जूझ रहे हैं। जिस मौके पर एकजुट होकर कोरोना से लडऩे की जरुरत है उस समय राज्य एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। यदि कोरोना से लडऩे की समान नीति नहीं बनी तो आने वाले दिनों में औरंगाबाद जैसी दु:खद घटनाएं और होंगी।

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