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2016  जाट आरक्षण आंदोलन मामला -हरियाणा सरकार ने पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की रिपोर्ट को किया खारिज,

2016  जाट आरक्षण आंदोलन मामला -हरियाणा सरकार ने पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की रिपोर्ट को किया खारिज,
चंडीगढ़ (अटल हिन्द ब्यूरो )हरियाणा में फरवरी 2016 में हुए जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा के बाद पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह को मामले की जांच रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी लगाई गई थी, लेकिन अब पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह कमेटी की जांच रिपोर्ट को सरकार ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। गृहमंत्री अनिल विज ने बताया कि प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट का चैप्टर बंद हो चुका है।हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जमकर हिंसा हुई थी। इस दौरान आगजनी और हिंसा को लेकर सरकार की तरफ से उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था, इस कमेटी का काम जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा और आगजनी की सही रिपोर्ट पेश करना था। इस मामले मेें प्रकाश सिंह कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। इस जांच रिपोर्ट में सरकार और अफसरों में तालमेल की कमी को जिम्मेदार ठहराया था। वहीं पुलिस तंत्र में बढ़ते राजनीतिकरण को लेकर भी चिंता जाहिर की थी।अब हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने साफ कर दिया है कि प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट का चैप्टर बंद हो चुका है। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह की रिपोर्ट आधी अधूरी थी और उसमें कई ऐसी खामिया थी, जिनका अब जिक्र करना भी जरुरी नहीं है। अनिल विज ने खुलासा करते हुए बताया कि प्रकाश सिंह कमेटी में तीन सदस्य थे, लेकिन जांच रिपोर्ट में तीनों के हस्ताक्षर ना होकर सिर्फ एक ही सदस्य के हस्ताक्षर हैं।


यह था प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट में

हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में 41 लोग मारे गए थे।
प्रकाश सिंह ने 450 पन्नों की रिपोर्ट बनाई, जिसमें 90 अफसरों की नाकामी का जिक्र था।
रोहतक से सर्वाधिक तत्कालीन 30 अफसरों के नाम सूची में हैं, जो दंगे में तमाशबीन बने रहे।
प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार अफसरों ने जानबूझकर हिंसा को रोकने में कोताही बरती।
कई पुलिस अधिकारियों ने खुद अपने बयान में माना कि उन्होंने सख्त कार्रवाई से परहेज किया।
जिन 90 अधिकारियों की भूमिका ठीक नहीं रही, उनकी गलतियों को रिपोर्ट में उजागर किया गया है।
कुछ अफसरों ने अपने बयान में कहा कि वे कार्रवाई के लिए ऊपर से आदेश का इंतजार करते रहे।
प्रकाश सिंह के अनुसार कानून व्यवस्था बिगड़ने पर आदेश का इंतजार करने की जरूरत नहीं थी।

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