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मनोहर लाल खट्टर सफल या फ्लॉप सीएम और  दुष्यंत चौटाला का सियासी भविष्य मनोहर ,दुष्यंत सरकार का काम ही  करेगा तय

मनोहर लाल के सामने चुनौतियां , और दुष्यंत के सामने क्या है दुश्वारियां ?(Challenges before Manohar Lal, and what are the enemies in front of Dushyant?)

-राजकुमार अग्रवाल –
कैथल । विधानसभा चुनाव के दौरान एक दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंदी रहे बीजेपी(BJP) और जेजेपी (JJP)को सांझी जरूरतों को पूरा करने के लिए सांझेदारी की सरकार बनाने पर मजबूर होना पड़ा है।मिशन 75 का सपना चकनाचूर होने के बाद भाजपा को टिकाऊ सरकार बनाने के लिए मजबूरी में जेजेपी के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार बनानी पड़ी है।सरकार के कमांडर मनोहर लाल खट्टर और डिप्टी कमांडर दुष्यंत चौटाला दोनों का सियासी भविष्य इस गठबंधन सरकार की सफलता और असफलता पर टिका हुआ है।दोनों ही नेताओं के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है और दोनों की कदमताल ही यह तय करेगी कि वे इस विराट चुनौती को सफलतापूर्वक पार करते हैं या पहले ही लुढ़क जाते हैं।

क्या है मनोहर लाल (MANOHAR LAL)के सामने चुनौतियां?
मनोहर लाल खट्टर ने 5 साल के दौरान प्रदेश में पारदर्शी सरकार देने का भरसक प्रयास किया। प्रशासनिक मोर्चे पर असफल रहने के अलावा उन्होंने अपनी सरकार को पिछली सरकारों से अलग दिखाने सफल कोशिश की। पारदर्शी प्रशासन और पारदर्शी भर्तियों को लेकर उन्हें जनता से शाबाशी भी मिली। मनोहर लाल खट्टर के दामन पर 5 साल के दौरान भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद का कोई भी दाग नहीं लगा जो उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही।
मनोहर लाल ने भाजपा को पहली बार लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 10 सीटों पर विजयी बना कर इतिहास रचने का काम किया।
इसी प्रचंड जनसमर्थन के बलबूते पर पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए मिशन 75 का टारगेट रख दिया। काफी सीटों पर गलत प्रत्याशियों का चयन और भितरघात की भरमार के चलते भाजपा (BJP)मिशन 75 पार करना दूर सामान्य बहुमत भी हासिल नहीं कर पाई।
मनोहर लाल खट्टर की पारदर्शी वर्किंग के चलते ही भाजपा हाईकमान ने उनको दूसरी बार सरकार की कमान सौंपी है। उन्हें नई पारी में उन सभी गलतियों से बचना होगा जिसके चलते हुए खुद को कद्दावर नेता नहीं बना पाए।
मुख्यमंत्री को दूसरी पारी में प्रदेश की सभी बिरादरियों का समर्थन हासिल करने का प्रयास करना होगा। उन्हें अपनी पार्टी के नेताओं और वर्करों के साथ बेहतर तालमेल बनाते हुए बदले हुए मुख्यमंत्री के तौर पर खुद को दिखाना होगा।
मुख्यमंत्री के सामने जहां प्रदेश के लाखों बेरोजगारों को रोजगार दिलाने की बड़ी चुनौती मुंह बाए खड़ी हुई है वहीं दूसरी तरफ किसानों, कर्मचारियों और व्यापारियों की लंबित समस्याओं को हल करना भी बेहद जरूरी है।

दुष्यंत(DHUSYANT) के सामने क्या है दुश्वारियां?

परिवार की पार्टी इनैलो(INLD) से बेदखल किए जाने के बाद नई पार्टी बनाने वाले दुष्यंत चौटाला ने 11 महीनों के अंदर ही जबरदस्त मेहनत के बलबूते पर जेजेपी को सत्ता की हिस्सेदार बनाने का इतिहास रच दिया। जेजेपी देश की ऐसी पहली पार्टी है जिसने सबसे कम समय में सत्ता में हिस्सेदारी हासिल की है। प्रदेश की जनता ने जजेपी को निर्णायक जन समर्थन देते हुए सत्ता का सांझीदार बनाने का अवसर दिया है।
भाजपा के साथ गठबंधन की सरकार बनाने के बाद उपमुख्यमंत्री पद हासिल करने वाले दुष्यंत चौटाला के सामने खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती है। दुष्यंत चौटाला को अपने बेहद सफल सांसद काल की तरह उप मुख्यमंत्री (CM)के तौर पर भी खुद को बेहद काबिल और दमदार नेता के रूप में साबित करना होगा।
उन्हें गठबंधन सरकार की बड़ी पार्टनर भाजपा के साथ बेहतर तालमेल बनाते हुए गठबंधन(alliance) की सरकार को सफल बनाना होगा। दुष्यंत चौटाला के सामने यह चुनौती है कि सीमित शक्तियों, सीमित विभागों और सीमित नेताओं के बलबूते पर पार्टी के लाखों वर्करों और पूरे प्रदेश की जनता के विश्वास पर खरा उतरना होगा।
दुष्यंत चौटाला और उनकी टीम का प्रदर्शन ही यह तय करेगा कि आगामी विधानसभा चुनाव में जेजेपी सत्ता की अकेली सरताज बनेगी, दोबारा से गठबंधन सरकार के हिस्सेदार बनेगी या सत्ता से बेदखल करेगी।
बात यह है कि बीजेपी और जेजेपी की गठबंधन सरकार प्रदेश की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की क्षमता रखती है। मनोहर लाल खट्टर और दुष्यंत चौटाला को जहां प्रदेश को विकास के पथ पर सरपट दौड़ाना होगा वहीं समाज के सभी वर्गों की भलाई के लिए फैसले लेने होंगे।
दोनों नेताओं ने अगर एक समान कदमताल से चलते हुए सरकार को चलाया तो दोनों ही नेता प्रदेश की जनता का दिल और समर्थन जीतने में सफल रहेंगे।
गठबंधन की सरकार सफल बनाने के लिए दोनों ही नेताओं को एक दूसरे को समझते हुए काम करना होगा। मनोहर लाल खट्टर को अपने अनुभव और दुष्यंत चौटाला के अपने जोश और जज्बे को मिलाकर गठबंधन की सरकार सफल बनाना होगा।
दोनों ही दलों के संकल्प पत्र कुछ समानताएं और कुछ असमानताएं लिए हुए हैं।(The resolution papers of both parties have some similarities and some inequalities.) दोनों नेताओं की रजामंदी से न्यूनतम साझा कार्यक्रम के जरिए सरकार को अच्छे फैसलों के जरिए चलाने का काम दोनों नेताओं को करना होगा। दोनों ही नेताओं को बेरोजगार युवाओं, किसानों व्यापारियों और महिलाओं की जरूरतों को समझते हुए जन हितेषी फैसले लेने होंगे।
मनोहर लाल खट्टर भी समझ गए होंगे कि पिछली सरकार के समय हुई गलतियों के कारण ही उनकी पार्टी को बहुमत हासिल नहीं हो पाया है,(Manohar Lal Khattar must have also understood that his party has not been able to get majority due to mistakes made during the previous government,) वहीं दूसरी तरफ दुष्यंत चौटाला को भी 10 सीटों से बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए दमदार प्रदर्शन करके दिखाना होगा।
दोनों ही पार्टियां स्वाभाविक साझेदार रही हैं। ऐसे में दोनों के हितों में बड़ा टकराव नहीं आएगा। मनोहर लाल खट्टर और दुष्यंत चौटाला की जुगलबंदी अगर साफ नियत और सही सोच के साथ आगे बढ़ी तो गठबंधन की सरकार को सफल होने से कोई नहीं रोक पाएगा। एक दूसरे पर पूरा भरोसा रखते हुए प्रदेश के हितों को ध्यान में रखकर ही दोनों नेताओं को सरकार चलानी होगी ।
दोनों नेताओं की परफॉर्मेंस ही जहां एक तरफ मनोहर लाल खट्टर पर सफल सीएम या फ्लॉप सीएम(Flop CM) का ठप्पा लगाने का काम करेगी वहीं दूसरी तरफ दुष्यंत चौटाला का सियासी भविष्य भी गठबंधन सरकार के दौरान किया गया कामकाज ही निर्धारित करेगा। अब देखना यही है कि दोनों नेता कितनी सूझबूझ और समझदारी के साथ सांझे की सरकार को जनता की सरकार के रूप में तब्दील करते हैं।

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