बीजेपी के खिलाफ प्रशांत कुमार रणनीति बना रहे हैं?

  बीजेपी के खिलाफ प्रशांत कुमार रणनीति बना रहे हैं?

New Delhi (Atal Hind)महाराष्ट्र में हुए सियासी ड्रामे ने JDU के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का मार्केट वैल्यू बढ़ गई है. ताजा खबर सामने आ रही है कि प्रशांत किशोर का (ऑल इंडिया द्रविड मुनेत्र कड़गम)DMK प्रमुख एम के स्टालिन के बीच बातचीत हुई है. और तमिलनाडु में डीएमके की चुनवी प्रबंधन का काम भी मिल गया है. खैर, अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या देशभर में बीजेपी के खिलाफ प्रशांत कुमार रणनीति बना रहे हैं? या जदयू को राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बनाने की जमीन तैयार कर रहें हैं. अब ये आने वाला वक्त ही बतायेगा. लेकिन महाराष्ट्र चुनाव में साम, दाम, दंड, भेद सब नीति अपना चुके भाजपा अध्यक्ष अमित शाह चुप बैठने वाले नहीं है.

बहरहाल, तमिलनाडु में जयललिता और करुणानिधि के निधन के बाद साल 2021 में पहला विधानसभा चुनाव 2021 में होने जा रहा है. चुनाव में AIDMK और डीएमके की प्रतिष्‍ठा दांव पर लगी है. तमिलनाडु की इस राजनीतिक लड़ाई में डीएमके की तरफ से प्रशांत किशोर की एंट्री को बड़ी घटना माना जा रहा है. दरअसल, फिल्‍म स्‍टार कमल हासन और रजनीकांत भी चुनाव मैदान में नजर आएंगे. रजनीकांत ने तो अपनी अलग पार्टी बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. कमल हासन की पार्टी एमएनएम भी पीछे नहीं दिख रही. जरूरत पड़ी तो कमल हासन व रजनीकांत हाथ भी मिला सकते हैं.

वहीं, सियासी चर्चा ये है कि इन सभी के बीच बजेपी अपना कमल खिलाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को चाणाक्य का दर्जा दे चुकी पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं को यकीन है कि अमित शाह महाराष्ट्र जैसी भूल कभी भी नहीं कर सकते हैं और ना पार्टी को करने दे सकते हैं.

हालांकि,सियासी गलियारे में हो रही चर्चाओं के मुताबिक प्रशांत किशोर को महाराष्ट्र में हुए सियासी ड्रामे का फायदा मिला है. दरअसल, प्रशांत किशोर शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के सलाहकार थे और उनकी सलाह पर ही ठाकरे ने बीजेपी से तालमेल खत्म कर कांग्रेस-एनसीपी से हाथ मिलाया. इन खबरों की पुष्टि कभी उद्धव ठाकरे या उनकी पार्टी ने नहीं की लेकिन प्रशांत किशोर का मार्केट वैल्यू जरूर बढ़ गया. ऐसे में भाजपा को सबक लेने वाली बात है कि प्रशांत किशोर क्षेत्रीय पार्टियों में अपनी पकड़ बनाने में सफल है, तो भाजपा को नुकसान पहुंचाने में माहिर भी.

प्रशांत किशोर की कंपनी ने दलों व गठबंधनों की सीमाओं से हटकर काम किया है. उनकी टीम ने आंध्रप्रदेश में वाइएसआर कांग्रेस के लिए काम करते हुए एन.चंद्रबाबू नायडू जैसे सियासी धुरंधर की हार की पटकथा लिखी. वहां वाइएस जगनमोहन रेड्डी मुख्यमंत्री बने. उनकी टीम ने अन्‍य कई राज्‍यों में विभिन्‍न दलों के लिए काम किया है.

वर्तमान में प्रशांत किशोर की टीम पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए काम कर रही है. हाल ही में पश्चिम बंगाल के उपचुनावों में तृणमूल कांग्रेस की जीत में प्रशांत किशोर का बड़ा योगदान माना गया. इधर उद्धव ठाकरे को सीएम पद दिलाने में भी उनकी टीम ने कामयाबी पाई. वहीं, दूसरे तरफ जदयू  उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर पार्टी के लिए किसी भी तरह से मैदान में नजर नहीं आते, लेकिन पार्टी में रणनीति उनकी ही चलती है, लिहाजा, झारखंड चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी बीजेपी से अलग होकर चुनाव लड़ रही है. जबकि, बिहार में जदयू-बीजेपी की सहयोगी भी है. ऐसे में सवाल उठता है कि प्रशांत किशोर पार्टी से दूर रह कर अंदरखाने में जदयू के भविष्य को तराश रहें है? या देशव्यपी बीजेपी के खिलाफ नये मोर्चें की पृष्ठभूमी तैयार कर रहें है.

विदित हो कि प्रशांत किशोर देश में बड़े चुनावी रणनीतिकार के रूप में स्‍थापित हो चुके हैं. साल 2014 के लोकसभा चुनाव 2014 में बीजेपी के लिए चुनावी रणनीति बनाने के बाद वे चर्चा में आए थे. एनडीए की भारी जीत के बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे. लेकिन इसके बाद बीजेपी से उनके संबंध पहले जैसे नहीं रहें. कुछ दिनों बाद वे जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार  के संपर्क में आए और बिहार में महागठबंधन की जीत के साथ बीजेपी की हार की पटकथा लिखने में अहम भूमिका अदा की. आगे वे जेडीयू के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष बनाए गए.

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