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हारे हुए मंत्रियों की सहमति से कर्मचारियों के तबादले करने को तैयार हरियाणा सरकार

कर्मचारियों के तबादले हारे हुए मंत्रियों की सहमति से करने की तैयारी में सरकार !

लोगों ने लगाए लोकतंत्र को धत्ता बताने के आरोप !

चंडीगढ़, 11 दिसम्बर (Rajkumar Aggarwal): एक तरफ जहां हरियाणा की भाजपा सरकार ने दूसरी बार सत्ता में आने के बाद हारे हुए मंत्रियों को सत्ता में शामिल करना शुरू कर दिया है वहीं अब हारे हुए मंत्रियों को तवज्जो देने के उद्देश्य से सरकार कर्मचारियों को भी मौखिक रूप से यह निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि हारे हुए मंत्रियों की संस्तुति के बगैर आवेदनों पर गौर नहीं किया जाएगा। भाजपा को सरकार चलाने में जजपा और निर्दलीयों द्वारा सहयोग दिया जा रहा है लेकिन हरियाणा में होने वाले विभागीय तबादलों में हारे हुए मंत्रियों की भूमिका भी अहम होगी। हरियाणा में 15 दिसंबर तक सभी विभागों के कर्मचारी तबादलों के लिए आवेदन करेंगे। उसके बाद तबादला सूची जारी होगी। सरकार द्वारा दूसरे श्रेणी तक की नौकरियों में तबादलों के अधिकार मंत्रियों को दिए गए हैं। चंडीगढ़ में तबादलों के लिए आने वाले कर्मचारी अपने-अपने क्षेत्र के विधायकों की सिफारिशों के साथ पहुंच रहे हैं। जिस पर कई मंत्रियों द्वारा आपत्ति जताई जा रही है।

हरियाणा में इस समय भाजपा और जजपा गठबंधन की सरकार है जबकि सात निर्दलीय विधायों ने भाजपा को समर्थन दे रखा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल को अगर छोड़ दिया जाए तो भाजपा कोटे से आठ, जजपा कोटे से दो तथा एक निर्दलीय कोटे से मंत्री हैं। हालही में हुए चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान रहे आठ मंत्री चुनाव हार गए थे।

हारे हुए मंत्रियों में से केवल एक कृष्ण बेदी ही मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार के रूप में दोबारा सरकार में वापसी कर पाए हैं जबकि अन्य सात मंत्री भी लॉबिंग में जुटे हुए हैं। मौजूदा मंत्रियों के पास इन दिनों तबादलों को लेकर पूरी भीड़ जुट रही है। मंत्रियों ने अपने पास आने वाले कर्मचारियों को साफ कर दिया है कि वह संबंधित विधायकों की संस्तुति के अलावा संबंधित क्षेत्रों से हारे हुए मंत्रियों से भी अपने पत्रों पर सहमति लेकर आएं।
इसके पीछे मौजूदा मंत्रियों के दो तर्क है।

पहला यह कि हारे हुए मंत्री पार्टी में वरिष्ठ है और उन्हें सम्मान दिया जा सकता है। दूसरा कई विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां से जजपा, निर्दलीय और कांग्रेस के विधायक हैं। ऐसे में अगर सरकार हारे हुए मंत्रियों की सहमति के बगैर तबादले करती है तो तबादलों पर उनकी आपत्ति का अंदेशा भी समाप्त हो जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल तथा उनके मंत्रियों द्वारा हारे हुए विधायकों को अहमियत दिए जाने पर कांग्रेस पार्टी बकायदा सदन में आपत्ति दर्ज करवा चुकी है। कांग्रेस के विधायक गीता भुक्कल के अनुसार सरकार साजिश के तहत जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की अहमियत को कम कर रही है। सरकार द्वारा अधिकारियों पर भी दबाव बनाया जा रहा है कि वह मौजूदा विधायकों की बजाए हारे हुए विधायकों अथवा मंत्रियों की सिफारिश पर ही काम करें।

हरियाणा सरकार के मौजूदा मंत्रियों ने तय किया है कि वह किसी भी विधानसभा क्षेत्र में संबंधित विधायक की सहमति के बगैर नहीं जाएंगे। मनोहर सरकार को सत्ता में आए अभी दो माह भी पूरे नहीं हुए हैं और प्रदेश के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से लोग मंत्रियों से कार्यक्रम लेने के लिए सीधे आने लगे हैं। कई जगह गुटबाजी के चलते विभिन्न संगठनों के लोग मंत्रियों को बुला लेते हैं लेकिन विधायकों की अनदेखी करते हैं। ऐसे में मंत्रियों ने तय किया है कि विधायकों से बातचीत के बाद ही वह उनके क्षेत्रों में संगठनों को कार्यक्रम देंगे।

हरियाणा सचिवालय में दिखी मिनी हरियाणा की झलक

हरियाणा सिविल सचिवालय में इन दिनों तबादलों की बाढ़ सी आई हुई है। जिसके चलते हरियाणा के दूर-दराज क्षेत्रों से ही लोग अल सुबह सिविल सचिवालय में पहुंच जाते हैं। सचिवालय की चौथी फ्लौर को छोड?र अन्य सभी मंजिलों पर लोगों की भीड़ जुटी रहती है। सबसे अधिक भीड़ सचिवालय की पांचवीं तथा आठवीं मंजिल पर देखने को मिल रही है। पांचवीं मंजिल पर उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का कार्यालय तथा आठवीं फ्लौर पर प्रदेश के ज्यादातर मंत्रियों के कार्यालय हैं। हरियाणा के विभिन्न जिलों से आने वाले लोगों की भीड़ को देखते हुए सचिवालय के प्रवेश द्वार पर भी पास बनाने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ा दी गई है।

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