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Kalayat-सुरंग के माध्यम से जुड़े है श्री तीर्थ कसाण और ऐतिहासिक श्री कपिल मुनि तीर्थ 

सुरंग के माध्यम से जुड़े है श्री तीर्थ कसाण और ऐतिहासिक श्री कपिल मुनि तीर्थ
महाभारत, वामन पुराण तथा भागवत पुराण में मिलता है तीर्थ का वर्णन
kalayat अटल हिंद/ तरसेम सिंह,
कुरुक्षेत्र के 48 कोस परिधि के अंतर्गत आने वाली कलायत उपमंडल के गांव मटौर स्थित श्री तीर्थ कसाण और कलायत श्री कपिल मुनि धाम को प्राचीन काल से सुरंग के माध्यम से बड़ा ताल्लुक माना जाता है। इस तीर्थ का वर्णन महाभारत, वामन पुराण तथा भागवत पुराण में व संत शिरोमणि नारायण गिरी जी उर्फ पंडित साधु राम जी की किताब में मिलता है। श्रीतीर्थ कसाण और श्री कपिल मुनि धाम को जोडऩे वाली करीब 8 किलोमीटर तक की सुरंग आज भी अस्तित्व में है। श्री तीर्थ कसाण महंत कौल दास और सुमेर दास ने बताया कि श्रीतीर्थ नामक यह तीर्थ कैथल से लगभग 31 किलोमीटर दूर कैथल से भगवान कपिल मुनि की जन्म स्थली कपिल मुनि तीर्थ कलायत से श्रीमार्कंडे ऋषि की जन्म स्थली मुकटेस्वर तीर्थ मटौर से एक कोस पश्चिम में मटौर-सिमला मार्ग पर कसाण नामक स्थान में स्थित है। कसाण नामक स्थान मटौर में स्थित इस तीर्थ के नाम से ही प्रतीत होता है कि यह तीर्थ मनुष्य को श्री लक्ष्मी , वैभव, ऐश्वर्य, धन-सम्पदा प्रदान करने वाला है। नारद पुराण में ऐसा उल्लेख है कि जो मनुष्य श्री तीर्थ में स्नान करके के बाद भगवान शालीग्राम के दर्शन करके भगवान श्री हरि व माता लक्ष्मी का पूजन करता है वह एक रात्रि निवास करता है वह प्रतिदिन भगवान को अपनी समीप विद्यमान पाता है और माता लक्ष्मी की अपार कृपा प्राप्त करता है। तीर्थ के स्नान मात्र से कई बिमारियों से छुटकारा मिलता है। उन्होंने बताया कि मंदिर के अंदर सतयुग से जुड़े शालीग्राम स्थापित है। देश में शायद ही इस प्रकार का दुर्लभ ऐतिहासिक साक्ष्य कहीं देखने को मिले। परिणामस्वरूप शालीग्राम को लेकर श्री तीर्थ कसाण की चर्चा विश्वपटल पर चिन्हित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐतिहासिक धरोहर को संजोकर रखने के लिए पुरातत्व विभाग और केडीबी द्वारा विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
मंदिर परिसर में स्थित है मनमोहक झांकियां:
संस्था सदस्य बी.डी.बंसल, राकेश कांसल, पंडित सतपाल शर्मा, पंडित रमेश, राजा राम मटौर, जगमग मटौर, प्रमोद कांसल ने बताया कि श्री तीर्र्थ कसाण के मन्दिर परिसर बनी मनमोहक झांकियों में कृष्ण जन्म, वासुदेव द्वारा जमुना पार करना, शेषनाग के द्वारा भगवान श्री कृष्ण पर छांव करना, भीष्म पितामह का बाणों सैईया पर लेटना, मीरा बाई का भजन गुनगान करना, भगवान श्री कृष्ण का माखन चुराना, भगवान शिव का प्राचीन मंदिर, सबकी मनोकामना पूरी करने वाले बाबा संत शिरोमणि संदोख दास जी की समाधि व हाथी-घोड़े पर सवार योद्धाओं तथा पशु-पक्षियों का भी चित्रण है।

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