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105 बच्चों की चिंताओं पर मंत्री रघु शर्मा के लिए ग्रीन कारपेट,अब जनता को खुद ऐसे नेताओ से निपटना होगा 

105 बच्चों की चिंताओं पर मंत्री रघु शर्मा के लिए ग्रीन कारपेट,अब जनता को खुद ऐसे नेताओ से निपटना होगा

 

-राजकुमार अग्रवाल —

  कोटा के जेके लोन अस्पताल में 105 बच्चों की मौत के हालातों का जायजा लेने के लिए जब चिकित्सा एवं स्वास्थ मंत्री रघु शर्मा पहुंचे तो चिकित्सा अधिकारियों ने मंत्री आओ भगत में अस्पताल परिसर में ग्रीन कारपेट बिछवाया। ऐसा मंत्री के स्वभाव को ध्यान में रखते हुए किया गया। यह बात अलग है कि मंत्री रघु शर्मा और प्रताप सिंह खाचरियावास के दौरे के दौरान भी मृतक बच्चों के माता पिता अस्पताल परिसर में बिखलते देखे गए।यह हमारा भारत देश ही है जहाँ ऐसे जमीर मरे हुए नेता रहते है और हम जनता ही इनकों अपना प्रतिनिधि चुनते है। वैसे देखा जाये तो नेताओ का कोई कसूर नहीं है इन सब के लिए भारत की आम जनता ज्यादा दोषी है क्योंकि हम ही लोग है जो अपनी जूती को सर पर रख कर अपनी शान समझते है इसी प्रकार ये नेता भी जनता की जूती के बराबर है और भारत की जनता को अब समझना पड़ेगा और ऐसे नेताओ से खुद ही निपटना पड़ेगा वरना अपनी जूती पाँव में जख्म देना भी शुरू कर देती है इसलिए जूती पर तेल मालिश करना बहुत जरूरी है। राजस्थान में 105 नैनिहालों की चिताओं पर जो राजनीति हो रही है वह शर्मशार करने वाली है इस मंत्री रघु शर्मा के लिए नहीं इसकी तो औकात ही क्या है इससे ज्यादा शर्म करने वाली बात तो देश की केंद्र सरकार के लिए है क्योंकि  आम जनता जब कुछ बोलती है तो उसे देश द्रोही मान कर गिरफ्तार कर लिया जाता है और जब एक नेता कहता है की बच्चे तो मरते रहते है उसे शाबाशी दी जाती है उसका अभिषेक किया जाता है। भारत सरकार 105 बच्चों की मौत को कोई ख़ास तव्जों नहीं दे रही उसके लिए तो सीएए कानून ज्यादा अहमियत रखता है आम जनता मरे या जिए कोई फर्क इस भारत सरकार को नहीं पड़ता 135 करोड़ जनता में से 105 मर भी गए तो कोण सा पहाड़ टूट पड़ा। यही कारण है की आज भारत की बदनामी पूरी दुनिया में हो रही है विदेशी भारत आने बंद हो गए या फिर भारत आने से कतराने लगे है। भारत की सरकार जितना ढिंढोरा पीटना है पिट ले लेकिन सच्चाई यही है क्र्योंकी देश सिर्फ आंकड़ों से नहीं चलता साहब भारत की जिन्दा आबादी भी कुछ मायने रखती होगी लेकिन वर्तमान हालातों में जिस तरह भारत की संसद में जो गड्ढे  मुर्दे उखाड़े जा रहे है उसे देखते हुए लगता है की भारत के नेताओं के लिए भारत की जिन्दा आबादी नहीं बल्कि जो लोग आज इस दुनिया में है ही  जिन्हे आज के भारत ने कभी देखा नहीं वे ज्यादा मायने रखते है तभी तो आम जन हर रोज मर रहा है और भारत के तथाकथित नेता चिताओं पर रोटियां सेकं रहे है। अब आप ही देख लीजिये  कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष  सोनिया गांधी की नाराजगी के बाद आखिर 3 जनवरी को राजस्थान के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा को कोटा के उस जेके लोन अस्पताल में आना पड़ा, जिसमें एक माह में 105 बच्चों की मौत हो चुकी है। लाख कोशिश के बाद भी इस अस्पताल में रोजाना बच्चों की मौत हो रही है। कहा जा रहा है बच्चों की मौत का एक कारण मौसम भी हो सकता है, लेकिन बच्चों की मौत पर राजस्थान की कांग्रेस सरकार की मुसीबत का एक कारण प्रदेश के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा का घमंडी व्यवहार भी है। बच्चों की मौत पर जब अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार चौतरफा घिरी हुई है, तब रघु शर्मा का व्यवहार घमंड से भरा है। लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि को जनता का सेवक माना जाता है, लेकिन रघु शर्मा को राजा महाराजा की तरह व्यवहार कर रहे हैं।

रघु शर्मा के बयानों से गहलोत सरकार ज्यादा मुसीबत में है। राष्ट्रीय न्यूज चैनलों के एंकर और संवाददाताओं से रघु शर्मा जो व्यवहार कर रहे हैं उससे बच्चों की मौत पर उनकी संवेदनशील प्रकट नहीं होती। यही वजह है कि राष्ट्रीय मीडिया में बच्चों की मौत पर गहलोत सरकार की आलोचना हो रही है। रघु शर्मा को 105 बच्चों की मौत पर सरकार का बचाव विनम्रता के साथ करना चाहिए, लेकिन रघु शर्मा तो अपने स्वभाव के अनुरूप हमलावर नजर आते हैं। एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल के सीधे प्रसारण में तो रघु शर्मा ने गुस्से में ईयर फोन हटा कर बात करने से ही इंकार कर दिया। जानकारों की माने तो चिकित्सा विभाग के बड़े अधिकारी भी रघु शर्मा के व्यवहार से खुश नहीं है। जिस गुस्से में रघु शर्मा अपने विभाग के अधिकारियों से बात करते हैं, उससे अधिकारी पर मंत्री से बात करने से कतराते हैं। यानि रघु शर्मा को विभाग में जो सहयोग मिलना चाहिए वो भी नहीं मिल रहा है। कांग्रेस की राजनीति में कोटा के वरिष्ठ मंत्री शांति धारीवाल की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। 105 बच्चों की मौत की वजह से कोटा इन दिनों राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है। धारीवाल को भी पता है कि चिकित्सा विभाग की वजह से कांग्रेस सरकार की बदनामी हो रही है, लेकिन धारीवाल  अपने ही गृह शहर की घटनाओं पर चुप है। धारीवाल की चुप्पी के पीछे भी रघु शर्मा का घमंडपूर्ण व्यवहार बताया जा रहा है। सवाल उठता है कि रघु शर्मा अपने व्यवहार से सरकार के लिए कितना बखेड़ा करेंगे? जहां तक रघु शर्मा की लाइफ स्टाइल का सवाल है तो उनका अपना अंदाज है। बच्चों की मौत को लेकर जब हंगामा हो रहा था, तब 22 से 26 दिसम्बर तक रघु शर्मा दुबई दौरे पर थे। यदि बच्चों की मौत पर गंभीरता होती तो दुबई का दौरान बीच में छोड़ा जा सकता था। कोटा के अस्पताल में जब बच्चों की मौत हो रही थी, तब चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सफारी वल्र्ड का आनंद ले रहे थे। वहीं मृतक बच्चों के माता-पिताओं का कहना है कि कोटा के संभाग स्तरीय सरकारी अस्पताल के शिशु वार्ड के दरवाजे और खिड़की भी टूटी है। दरवाजे के अभाव में खिड़की पर पर्दा लगाकर ठंडी हवाओं की रोका जा रहा है। अनेक माता पिता का कहना रहा कि अस्पताल में दवाएं तक नहीं है।

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