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तो क्या नरेन्द्र मोदी अब डोनाल्ड ट्रप और अयातुल्ला खुमनेई के बीच मध्यस्थता करेंगे?

तो क्या नरेन्द्र मोदी अब डोनाल्ड ट्रप और अयातुल्ला खुमनेई के बीच मध्यस्थता करेंगे?
-राजकुमार अग्रवाल —
भारत में जब शाम को चार बजते हैं, तब ईरान में दोपहर के दो तथा अमरीका में सुबह के साढ़े पांच बजे रहे होते हैं। यानि सात जनवरी की देर रात को अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सबक सिखाने की जो बात कही है उसके परिणाम 8 जनवरी की रात तक आ सकते हैं। अमरीका के हमले को लेकर दुनिया भर में चिंता जताई जा रही है। अमरीका ने साफ किया है कि ईरान ने ईराक स्थित अमरीकी एयर बेस पर जो 22 मिसाइलें दागी है उनका बदला लिया जाएगा। ईरान मीडिया में कहा जा रहा है कि इन मिसाइलों के हमले में 80 अमरीकी सैनिक मारे गए हैं। एक भी सैनिक की मौत पर अमरीका बहुत बड़ी प्रतिक्रिया देता है। अस्सी अमरीकी सैनिकों की मौत का किस तरह अमरीका जवाब देगा, यह कुछ ही घंटों में पता चल जाएगा। हालांकि अस्सी सैनिकों की मौत की पुष्टि अमरीका ने नहीं की है। ईरान की ओर से कहा गया है कि हमारे कमांडर सुलेमानी की मौत का बदला अमरीका से ले लिया गया है। ईरान को भी पता है कि मिसाइलों के हमले के बाद अमरीका तीखी प्रतिक्रिया देगा, इसलिए 8 जनवरी को दिन में ही भारत स्थित ईरान के राजदूत अली चैगनी ने भारत से मध्यस्थता करने की गुहार की है। अली चैगनी ने कहा कि भारत ईरान का अच्छा मित्र है दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंध है, ऐसे में भारत को अमरीका और ईरान के मध्य मध्यस्थता करनी चाहिए। ईरान के इस प्रस्ताव पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी क्या प्रतिक्रिया देते हैं, यह जल्द ही पता चलेगा, लेकिन सवाल उठता है कि क्या इस नाजुक अवसर पर नरेन्द्र मोदी डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खुमनेई के बीच माध्यस्थता करेंगे? सब जानते हैं कि कश्मीर के मुद्दे पर जब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच माध्यस्थता करने की बात कही थी, तब नरेन्द्र मोदी ने ट्रंप के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। ऐसे में अब नरेन्द्र मोदी किस नजरिए से मध्यस्थता को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर विमर्श हो रहा है। यह माना कि अंतर्राष्ट्रीय जगत में आज भारत की मजबूत स्थिति है। जहां डोनाल्ड ट्रंप भारत की ताकत को पहचानते हैं वहीं ईरान भी कई मौकों पर भारत के साथ खड़ा रहा है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने पर जब पाकिस्तान मुस्लिम देशों का समर्थन मांग रहा था, तब ईरान मजबूती के साथ भारत के साथ खड़ा हुआ था। चूंकि भारत और ईरान के बीच अच्छे संबंध रहे है, इसलिए ईरान चाहता है कि अब भारत भी ईरान की मदद करे। अमरीकी एयरबेस पर मिसाइलों से जो हमला किया उसे ईरान एक विकल्प के तौर पर गिना रहा है। ईरान की ओर से यह कहा गया है कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहता है। यानि अब यदि अमरीका की ओर से कोई जवाबी कार्यवाही नहीं की गई तो मध्यपूर्व में शांति कायम हो सकती है। हालांकि कुछ लोग अमरीका और ईरान के बीच जंग चाहते हैं, ताकि उनके स्वार्थ पूरे हो सके। लेकिन भारत जैसे देशों का प्रयास होगा कि अमरीका और ईरान के बीच विवाद ज्यादा नहीं बढ़े। देखना होगा कि आने वाले दिनों में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अंतर्राष्ट्रीय मंच पर क्या भूमिका होती है। जानकार सूत्रों के अनुसार खाड़ी देशों में भारत के 80 लाख लोग रहते हैं। अधिकांश भारतीय रोजगार के लिए खाड़ी देशों में रह रहे हैं।

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