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अनिल विज बेकाबू हो गए तो हरियाणा की राजनीति में आ जाएगा तूफ़ान ,मनोहर लाल को सत्ता लालच ले डूबेगा 

बेकाबू हो गए अनिल विज तो हरियाणा की राजनीति में आ जाएगा तूफ़ान ,मनोहर लाल को सत्ता लालच ले डूबेगा

-राजकुमार अग्रवाल –
चंडीगढ़‌ क्या यह सही है कि सीआईडी विभाग भाजपा के लिए जी का जंजाल बन गया है? अनिल विज और मनोहर लाल खट्टर के बीच कई नए विवाद पैदा होंगे?और  सीआईडी का फेरबदल भाजपा में सरकार में नए विवादों के जन्म का कारण बनेगा?हरियाणा में भाजपा की नई सरकार के गठन के साथ ही पैदा हुआ सीआईडी का विवाद उसके लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है।लगभग 3 महीने के कार्यकाल में नई सरकार की किसी उपलब्धि की बजाय सीआईडी का विवाद ज्यादा चर्चा में रहा है।मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और गृह मंत्री अनिल विज के बीच सीआईडी की कमान को लेकर मचा घमासान खत्म होने की बजाय विवादों के नए पहाड़ खड़ा करता हुआ नजर आ रहा है।मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर इसी विवाद के खात्मे के लिए आगामी विधानसभा सत्र में सीआईडी को अपने पास रखने का प्रस्ताव पास करा सकते हैं लेकिन यह प्रस्ताव मंजूर होने के बाद सरकार में खट्टर और विज के बीच नए टकराव के प्रबल आसार नजर आ रहे हैं।हरियाणा की जनता पिछले 6 सालों से मनोहर लाल की चाल -ढाल देखती आ रही है अनिल विज भी मनोहर लाल के सत्ता लालच को अच्छी तरह पहचान गए है जिसके चलते यह विवाद खड़ा हुआ मगर यहाँ यह लिखना भी असंगत नहीं होगा की इस विवाद की झड़ स्वयं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल है जो सत्ता और कुर्सी के लालच में नहीं बल्कि हरियाणा की जनता को भी कानून का  डर दिखा दबा कर रखना चाहते है। जिसके चलते मनोहर लाल को उनका अहंकार ,घमंड और सत्ता लालच एक दिन ले डूबेगा।

सीआईडी बनी मूंछ का सवाल

सीआईडी का प्रभार मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और गृह मंत्री अनिल विज के बीच मूंछ का सवाल बन गया है। दोनों ही नेता हर हाल में सीआईडी अपने पास रखना चाहते हैं‌ इसका कारण यह है कि सीआईडी का प्रभार नहीं होने के कारण मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की छवि कमजोर मुख्यमंत्री के रूप में प्रचारित हो रही है, वहीं दूसरी तरफ सीआईडी का जिम्मा होने के कारण गृह मंत्री अनिल विज हैवीवेट मंत्री साबित हो रहे हैं। सीआईडी को “पावर सेंटर” माने जाने के चलते दोनों ही नेता इससे अपने पास रखने की वकालत कर रहे हैं और इसीलिए यह विवाद लगातार बढ़ रहा है।

खराब हो गया शक्ति संतुलन

सीआईडी गृह मंत्री के पास जाने के कारण सरकार का शक्ति संतुलन बिगड़ा हुआ नजर आ रहा है। गृह मंत्री अनिल विज के आदेश सीआईडी मुखिया अनिल राव को परेशान करने के अलावा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के माथे पर भी परेशानी की लकीरें खींच रहे हैं।गृहमंत्री ने वे रिपोर्ट मांगी शुरू कर दी हैं जिन्हें मुख्यमंत्री उनके साथ किसी भी कीमत पर शेयर नहीं करना चाहते हैं। सीआईडी को सरकार का सेंटर पॉइंट बना दिए जाने के कारण मुख्यमंत्री इसे अपने पास रखना चाहते हैं।दूसरी तरफ गृह मंत्री अनिल विज भी सीआईडी के बिना खुद को “पावरलेस” मानते हैं। इसीलिए वे सीआईडी अपने पास बरकरार रखना चाहते हैं। सीआईडी के पास सरकार की हर सूचना होने के कारण दोनों नेता इसकी कमान अपने हाथ में चाहते हैं। इसीलिए दोनों नेताओं में टकराव हो गया है और सरकार में शक्ति संतुलन बिगड़ गया है।

विज हो जाएंगे बेकाबू

अगर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने नए कानून के जरिए सीआईडी को अपने पास ले लिया तो गृह मंत्री अनिल विज के बेकाबू होने के पूरे आसार रहेंगे।गृहमंत्री अनिल विज खुद को “पेपर टाइगर” की बजाए “पावरफुल” गृहमंत्री साबित करना चाहते हैं। इसलिए वे सीआईडी को गृह मंत्रालय का अभिन्न अंग बताते हैं।मुख्यमंत्री अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके अनिल विजय् से सीआईडी अपने पास वापस ले सकते हैं लेकिन ऐसा होने के बाद अनिल विज बेकाबू हो जाएंगे और वह बार-बार मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ टकराते हुए दिखाई देंगे।बात यह है कि उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के साथ शक्ति संतुलन बराबर रखने की कवायद में गृह मंत्री बनाए गए अनिल विज खुद भाजपा का शक्ति संतुलन बिगड़ने का कारण बन रहे हैं।सरकार का मुखिया होने के नाते गृह मंत्रालय मुख्यमंत्री के पास रहना सबसे बेहतर है‌। गृहमंत्री के रूप में अनिल विज के पास विभाग से जुड़ी सूचनाएं पहुंचने का रास्ता भी खुला रहना चाहिए।पूरी सरकार का जिम्मा और जिम्मेदारी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कंधों पर है इसलिए सीआईडी वे अपने पास रखना चाहते हैं। सरकार की कई संवेदनशील जानकारियां सीआईडी के पास होने के कारण मुख्यमंत्री इसे विज के साथ सांझा करने को तैयार नहीं है।और इस सीआईडी विवाद के चलते अगर बेकाबू हो गए अनिल विज तो हरियाणा की राजनीति में आ जाएगा तूफ़ान
विज भी सीआईडी की खास इंपोर्टेंस समझते हैं। इसलिए वे उसे अपने पास ही बरकरार रखना चाहते हैं। विधानसभा के आगामी सत्र में सीआईडी अनिल विज से लेकर मुख्यमंत्री के पास चली जाएगी। यह बिल पास होने के बाद सीआईडी का मसला तो शांत हो जाएगा लेकिन खट्टर और विज के बीच विवादों का नया पिटारा खुल जाएगा।अनिल विज को शांत रखना मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के लिए आसान नहीं होगा। सीआईडी भाजपा के लिए “एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई” की कहावत को साबित हो रही है। अगर सीआईडी मुख्यमंत्री के पास जाती है तो विज उखड़ जाएंगे और सीआईडी विज के पास रहती है तो मुख्यमंत्री अनकंफरटेबल होते हैं।मुख्यमंत्री कानून के जरिए विज से सीआईडी तो ले लेंगे लेकिन विज को शांत रखना उनके लिए भी आसान नहीं होगा। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री इस “दोधारी” तलवार के वार से सरकार को कैसे बचाते हैं?

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