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कैथल एसडीएम और रिटायर्ड एसएचओ पर लगाए जान से खतरा होने के आरोप !

पीड़ित किसान ने कैथल एसडीएम और रिटायर्ड एसएचओ पर लगाए जान से खतरा होने के आरोप !

न्याय की मांग को लेकर मैं प्रशासन से मिला लेकिन प्रशासन दूसरी पार्टी से मिला : बलबीर

न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हुआ कैथल का एक किसान !

रिटायर्ड एसएचओ ने एसडीएम कैथल को 6 लाख रुपये की रिश्वत देकर बदलवा लिया फैसला : बलबीर

पीएम, सीएम, होम मिनिस्टर, डीजीपी तक को न्याय की गुहार लगाने के बाद भी नहीं मिला न्याय : पीड़ित व्यक्ति

कैथल, 19 जनवरी (कृष्ण प्रजापति): जब व्यक्ति के साथ अन्याय हो रहा हो तो वह न्याय की मांग के लिए सरकार और प्रशासन के पास जाता है लेकिन प्रशासन की तरफ से उसको न्याय की बजाय अन्याय ही मिले, धोखा ही मिले तो वह व्यक्ति पूरे आत्मविश्वास से यह कहता है कि रक्षक भक्षक हो चुके हैं और बैड़ खेत को खा रही है। सरकार और प्रशासन लोगों की रक्षा सुरक्षा नहीं बल्कि जिन से खतरा हो उन्हीं के साथ मिलकर लोगों को अन्याय दे रहे हैं, ऐसी ही कुछ दर्द भरी घटना के साथ कहानी बयां कर रहा है कैथल जिले के खेड़ी राववाली निवासी बलबीर पुत्र विजय सिंह जोकि जमीनी विवाद को लेकर कैथल प्रशासन से परेशान है। अपनी परेशानी का जिक्र करते हुए खेड़ी रायवाली निवासी बलबीर ने बताया कि वह रोहेड़ा और खेड़ी रायवाली में खेती करके अपने परिवार का गुजारा कर रहा था लेकिन उनका जमीनी विवाद रिटायर्ड एसएचओ धर्मपाल रोहेड़ा के साथ चल रहा था जिसको लेकर उनका एसडीएम कोर्ट में केस चला हुआ है लेकिन जब इस मामले में उन्होंने न्याय की मांग की तो उन्हें न्याय नहीं मिला।

 

 

उन्होंने बताया कि खेड़ी रायवाली में 8 एकड़ और रोहेड़ा में 32 एकड़ जमीन के विवाद को लेकर वर्ष 2013-14 में उप तहसील राजौंद में एक केस फाइल किया जिसमें उनके इस मामले को लेकर 7 केस दर्ज धारा 107, 151 के हुए और चार बार एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं लेकिन इनके बावजूद भी उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। गत 25 जून 2018 को धारा 145 लगाने की मांग को लेकर उन्होंने कैथल की एसडीएम कमलप्रीत कौर के पास अपील की थी लेकिन जब इस मामले को लेकर गांव में पंचायत हुई तो पंचायत में विपक्षी पार्टी के धर्मपाल ने 6 लाख रुपये की रिश्वत देकर कथित तौर से फैसला बदलवाने की बात कही।

 

 

बातचीत में बलबीर सिंह ने जिला प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने न्याय की गुहार न केवल एसडीएम के पास बल्कि कैथल डीसी, एसपी के पास, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, गृह सचिव, डीजीपी तक को लगाई लेकिन उनकी कहीं भी कोई सुनवाई नहीं हुई। जब उन्होंने कैथल की तत्कालीन जिला उपायुक्त डॉ प्रियंका सोनी के पास एसडीएम की शिकायत दी तो उन्होंने जांच करने के लिए एसडीएम के पास ही भेज दिया, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिसके खिलाफ शिकायत दी उसी को जांच अधिकारी बनाया जाए तो हमारे साथ अन्याय ही होगा और न्याय की उम्मीद कैसी।

 

बलबीर ने बताया कि वह न्याय की मांग के लिए सरकार और प्रशासन के पास बार बार जाता रहा लेकिन प्रशासन की तरफ से उसको न्याय की बजाय अन्याय मिला। पीड़ित व्यक्ति ने कहा कि 11 जुलाई 2018 को प्लानिंग के तहत उनके पूरे परिवार पर हमला हुआ लेकिन पुलिस और डॉक्टर के मिलीभगत होने के चलते विपक्षी पार्टी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि एसडीएम के खिलाफ कोर्ट द्वारा फैसला भी सुनाया गया था लेकिन इसके बावजूद भी उनकी सुनवाई नहीं हुई। एसडीएम कमलप्रीत कौर का कैथल से ट्रांसफर हो गया था लेकिन दोबारा जब वे कैथल में एसडीएम आई तो दोबारा फिर उनको परेशान करना शुरू कर दिया। पुलिस से मिलीभगत करके एसडीएम व रिटायर्ड एसएचओ ने चार एफआईआर को तीन दिखाया गया और 107, 151 के जो 7 मुकदमे दर्ज थे जिनको सिर्फ तीन दिखाया गया।

 

 

पीड़ित किसान ने कहा कि उन्होंने प्रशासन से न्याय की मांग की थी लेकिन न्याय के बदले उन्हें धोखा मिला। पीड़ित ने बताया कि 3 जनवरी को ओपन कोर्ट में फैसला सुनाया गया कि धारा 145 दोनों केसों में लगाई जा चुकी है लेकिन जब उसने 3 जनवरी को ही केस की नकल अप्लाई की तो उसको 14 जनवरी को नकल मिली। पीड़ित किसान ने आरोप लगाया कि इन 10 दिनों के अंदर विपक्षी पार्टी से प्रशासन सांठगांठ में लगा रहा।

 

जब उन्होंने नकल में देखा तो केस नंबर 163 में धारा 145 नहीं लगी हुई थी और केस नंबर 164 में लगी हुई थी क्योंकि 164 में दूसरी पार्टी की जमीन कम आती है इसलिए वहां 145 लगा दी गई और केस नम्बर 163 में हमारी जमीन ज्यादा है इसलिए उसमें एसडीएम द्वारा धारा 145 नहीं लगाई गई। पीड़ित किसान बलबीर ने कहा कि मैंने एसडीएम को बोला कि रिटायर्ड एसएचओ धर्मपाल ने पंचायत में आप पर 6 लाख रुपए रिश्वत देने की बात कही है, अगर वह व्यक्ति झूठ बोल रहा है तो आप उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाओ अगर मैं झूठ बोल रहा हूं तो मेरे खिलाफ कार्रवाई करो लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। अब पीड़ित किसान जान का खतरा बताते हुए रिटायर्ड एसएचओ और कैथल एसडीएम के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। पीड़ित किसान बलबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी साहब तो कहते हैं कि ना खाऊंगा ना खाने दूंगा लेकिन कैथल जिला प्रशासन तो खा भी रहा है और डकार भी ले रहा है।

 

बॉक्स– उधर जब इस बारे में कैथल एसडीएम कमलप्रीत कौर का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क किया गया तो उनके परिवार में किसी कार्य में व्यस्त होने के कारण बात नहीं हो पाई।

 

बाइट– बलबीर सिंह पीड़ित।

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