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हरियाणा के दो नेताओ की लड़ाई ,कुंडू से टकराना भारी पड़ेगा ग्रोवर को

हरियाणा के दो नेताओ की लड़ाई ,कुंडू से टकराना भारी पड़ेगा ग्रोवर को

=राजकुमार अग्रवाल =
चंडीगढ़ । क्या यह सही है कि महम के विधायक बलराज कुंडू और पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर के बीच सियासी टकराव आर पार के हालात में पहुंच गया है?
प्रदेश के पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर और महम के निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू के बीच टकराव आरपार के मुकाम पर पहुंच गया है। बलराज कुंडू ने सरेआम कई बार मनीष ग्रोवर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।मनीष ग्रोवर ने इन आरोपों का खंडन किया है और उन्होंने आरोपों के खिलाफ मानहानि का नोटिस भेज दिया है। बलराज कुंडू पर मानहानि के नोटिस का कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उनका दावा है कि उन्होंने सुनी सुनाई बातों के आधार पर नहीं बल्कि डॉक्यूमेंट के बलबूते पर ही आरोप लगाए हैं और उनके आरोपों में पूरी सच्चाई है।कुछ महीने पहले भाजपा के बैनर के नीचे एक ही मंच पर बैठने वाले ग्रोवर और कुंडू के बीच टकराव भाजपा के लिए भी सिरदर्द बन रहा है और आरोपों की आंच मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर तक पहुंच रही है।

क्यों हुआ ग्रोवर और कुंडू में टकराव?

मनीष ग्रोवर और कुंडू के बीच टकराव विधानसभा चुनाव के पूर्व ही हो गया था। बलराज कुंडू को लगता है कि उनकी टिकट को कटवाने में मनीष ग्रोवर की भूमिका रही। मनीष ग्रोवर ने उनकी बजाए शमशेर खरकड़ा का पक्ष लेकर उनकी टिकट कटवा दी।इस तरह मंत्री बनने के मामले में भी मनीष ग्रोवर ने बलराज कुंडू की खिलाफत की जिसके चलते बलराज कुंडू मंत्री बनने से वंचित रह गए। ब्यूरोक्रेसी के मामले में भी बलराज कुंडू का यह आरोप है कि मनीष ग्रोवर उनके हलके के उनकी सिफारिशों पर काम नहीं करने के अफसरों को निर्देश देते हैं।ग्रोवर की इस खिलाफत मुहिम से तंग आकर ही बलराज कुंडू ने उनकी पोल खोलने का काम किया है।

मनीष ग्रोवर को भारी नुकसान

बलराज कुंडू के आरोपों ने मनीष ग्रोवर का बड़ा सियासी नुकसान किया है। ग्रोवर भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गए हैं जिसके चलते उनकी मुख्यमंत्री कार्यालय में उनकी नियुक्ति का दरवाजा बंद हो गया है। मनीष ग्रोवर मुख्यमंत्री के साथ नजदीकी संबंधों के आधार पर मंत्री के बराबर ही पावर और सुविधाएं लेने के बेहद करीब खड़े थे लेकिन बलराज कुंड के आरोपों ने उनका खेल बिगाड़ दिया है।इन आरोपों से पाक साफ हुए बगैर उनकी मुख्यमंत्री की टीम में नियुक्ति नहीं हो पाएगी।मनीष ग्रोवर ने अपने रुतबे का फायदा उठाते हुए बलराज कुंडू को सियासी नुकसान पहुंचाने का काम किया।

विधायक बनने के बाद बलराज कुंडू अब मनीष ग्रोवर का मुकाबला करने में सक्षम हो चुके हैं।बलराज कुंडू के पास पर्याप्त संख्या में दस्तावेजों का पिटारा है जिसके बलबूते पर वे मनीष ग्रोवर को भ्रष्टाचार के आरोपों में लपेट रहे हैं।मनीष ग्रोवर बेशक इन आरोपों से साफ-साफ इंकार कर रहे हैं लेकिन सिर्फ मानहानि के नोटिस से वे पाक साफ नहीं हो जाएंगे। अगर बलराज कुंडू के आरोपों पर गंभीरता से जांच की गई तो मनीष ग्रोवर के लिए बड़ी परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।

खासतौर पर शीरा खरीद के मामले में मनीष ग्रोवर की भूमिका संदेह के घेरे में है और वहां से उनका बच निकलना मुश्किल है। मनीष ग्रोवर ने अगर कुंडू के आरोपों को लेकर मानहानि का केस कोर्ट में किया तो उनके लिए आत्मघाती साबित होगा क्योंकि कोर्ट में सरकारी दस्तावेजों के आधार पर घोटाले के सच और झूठ की पड़ताल की जाएगी।

अगर दस्तावेजों में घोटाला साबित हो गया तो मनीष ग्रोवर खुद को नहीं बचा पाएंगे। मनीष ग्रोवर ने मानहानि का केस किया तो वे खुद अपने चक्रव्यूह से बाहर निकलना नामुमकिन हो जाएगा।मनीष ग्रोवर ने अपनी बड़ी सियासी हैसियत और मुख्यमंत्री के साथ संबंधों का फायदा उठाते हुए बलराज कुंडू की राह में कांटे बिछाने का काम किया था। अब बलराज कुंडू उसी का बदला ले रहे हैं और मजबूत दस्तावेजों के आधार पर मनीष ग्रोवर पर निशाना साध रहे हैं। मनीष ग्रोवर के लिए इस जंजाल से पीछा छुड़ाना आसान नहीं होगा ।

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