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गुहला विधानसभा क्षेत्र में कुल 9 बार हुए चुनावों में 6 चेहरे पहुंचे विधानसभा की दहलीज

कैथल जिले की आरक्षित विधानसभा क्षेत्र गुहला राजनीतिक चर्चाओं का गढ़ बन चुकी है।

गुहला विधानसभा क्षेत्र में कुल 9 बार हुए चुनावों में 6 चेहरे पहुंचे विधानसभा की दहलीज

कांग्रेस पार्टी, जनता पार्टी, लोकदल व इनेलो ने दो-दो बार तो भाजपा ने एक बार हासिल की विजय

कैथल/गुहला, 28 सितंबर (कृष्ण प्रजापति): हरियाणा की राजनीति में कैथल जिले की आरक्षित विधानसभा क्षेत्र गुहला राजनीतिक चर्चाओं का गढ़ बन चुकी है। यहां से 9 बार हुए चुनावो में केवल 6 चेहरे विधानसभा की दहलीज तक पहुंचे हैं। तीन बार दिल्लू राम बाजीगर व दो बार अमर सिंह डांडे ने इस क्षेत्र से जीत दर्ज करके जनप्रतिनिधि बनने का गौरव प्राप्त है। विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी, जनता पार्टी, लोकदल व इनैलो ने दो-दो बार विजय हासिल की है तो वहीं भाजपा ने वर्ष 2014 के चुनावो में पहली बार जीत हासिल की है। वर्ष 1996 में कांग्रेस उम्मीदवार दिल्लू राम बाजीगर सबसे कम विजय अंतराल 2786 वोटो से व साल 1987 के चुनावों में लोकदल के बूटा सिंह सबसे अधिक विजय अंतराल 26627 वोटो से जीत दर्ज की। अगर इस हलके की राजनीतिक गतिविधियों पर चर्चा करें तो वर्ष 1977 में हुए चुनाव में जनता पार्टी से ईश्वर सिंह ने चुनाव लड़ा और आजाद उम्मीदवार संतराम को 15767 वोटों से हराकर विधानसभा में पहुंचे। उस समय ईश्वर सिंह को 20824 वोट मिले थे और संतराम को 5057 वोट मिले थे उस समय चुनावी मैदान में 9 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे। उसके बाद वर्ष 1982 में हुए चुनाव में लोकदल की टिकट पर दिल्लूराम बाजीगर ने चुनाव लड़ा और कांग्रेसी उम्मीदवार रणसिंह को 3904 वोटों से हरा दिया।

 

उस समय भी चुनावी मैदान में 9 उम्मीदवार ही चुनाव लड़ रहे थे। वर्ष 1987 में हुए चुनाव में दोबारा फिर लोकदल का प्रत्याशी विजय हुआ लेकिन इस बार लोकदल का की टिकट पर चुनाव बूटा सिंह ने लड़ा और कांग्रेस के दिल्लू राम को 26627 वोटों से हराकर विधानसभा में हल्के की जनता का प्रतिनिधित्व किया। इस समय चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की संख्या 12 पहुंच गई थी। वर्ष 1991 में जनता पार्टी से अमर सिंह डांडे उम्मीदवार बने और कांग्रेस के दिल्लू राम बाजीगर को 3230 वोटों से हराकर विधायक बने। उस समय 13 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। अमर सिंह डांडे को 34990 वोट मिले थे और दिल्लू राम बाजीगर को 31760 वोट मिले थे। वर्ष 1996 में हुए चुनावों में कांग्रेस की टिकट पर दिल्लू राम बाजीगर ने चुनाव लड़ा और समता पार्टी से चुनाव लड़ रहे अमर सिंह डांडे को 2786 वोटों के अंतर से हराकर दिल्लू राम बाजीगर विधानसभा में पहुंचे। उस समय उम्मीदवारों की संख्या बढ़कर 16 हो गई थी। वर्ष 2000 में इनेलो की टिकट पर अमर सिंह डांडे ने चुनाव लड़ा और कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे दिल्लू राम बाजीगर को 14974 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में प्रत्याशियों की संख्या घटकर 5 रह गई थी। वर्ष 2005 के चुनावो में कांग्रेस के टिकट पर दिल्लू राम बाजीगर ने चुनाव लड़ा और इनेलो के बूटा सिंह को 10127 वोटों से हराया। इस चुनाव में कुल 7 प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई थी और दिल्लू राम बाजीगर को 55487 वोट मिले थे व बूटा सिंह को 45360 वोट मिले थे। इस समय चुनाव लड़ने वालों की संख्या 7 हो गई थी। वर्ष 2009 के चुनावों में इनेलो की टिकट पर फुल सिंह खेड़ी ने चुनाव लड़ा और कांग्रेसी उम्मीदवार दिल्लू राम बाजीगर को 5253 वोटों से हराकर विधानसभा में पहुंचे। उस समय चुनाव प्रत्याशियों की संख्या 10 थी। वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा की टिकट पर कुलवंत बाजीगर ने चुनाव लड़ा और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे दिल्लू राम बाजीगर को 2440 वोटों के अंतर से हराकर विधानसभा में कैथल जिले के एकमात्र भाजपा विधायक होने का गौरव प्राप्त किया। उस समय चुनाव मैदान में 12 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे। भाजपा के कुलवंत बाजीगर को 36598 वोट मिले थे और कांग्रेस के दिल्लू रमा बाजीगर को 34158 वोट मिले थे। माना जा रहा है कि इस चुनाव में डेरा प्रेमियों के वोट प्राप्त करने से कुलवंत बाजीगर को सबसे बड़ी जीत मिली है और पहली बार गुहला विधानसभा से कमल खिलाने में कामयाब हुए थे।

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