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देश में कोई कानून बचा है?या हम कोर्ट बंद कर दें, -सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया

हम कोर्ट बंद कर दें, देश में कोई कानून बचा है?
नयी दिल्ली 14 फरवरी 2020।(अटल हिन्द ब्यूरो ) सुप्रीम कोर्ट ने बकाया भुगतान की देरी पर टेलिकॉम कंपनियों को फटकार लगाई है। एजीआर मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्या सरकारी अफसर सुप्रीम कोर्ट से ऊपर हैं। टेलिकॉम कंपनियों के MDs को नोटिस जारी कर कोर्ट में तलब किया है। MDs को कोर्ट में पेश होकर यह बताने को कहा गया है कि उनकी कंपनियों ने अब तक एजीआर बकाया की रकम क्यों नहीं जमा कराई है। एयरटेल, वोडा आइडिया और टाटा टेलिसर्विसेज आदि पर 1.47 लाख रुपये का बकाया है।
– ऑयल इंडिया की ओर से पेश हुए वकील मुकुल रोहतगी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया. बेंच ने कहा कि आखिर ये हो क्यों रहा है? हम सख्त लहजे में कहना चाहते हैं, ये सब बकवास है. हमें जो कहना था कह दिया गया है, आपने सिस्टम का क्या कर दिया है? पैसे वापस करने ही होंगे.

– जस्टिस मिश्रा ने अदालत में सुनवाई के दौरान कहा कि क्या देश में कानून बचा है? एक डेस्क ऑफिसर ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश ही रोक दिया, ये क्या हो रहा है? उस अफसर को तुरंत यहां पर बुलाया जाए.

– AGR को चुकाने के लिए टेलिकॉम कंपनियों ने अधिक वक्त मांगा था, जिसे सरकार ने उन्हें दे दिया था. इसी मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने तुषार मेहता से पूछा कि आप बताएं कि सरकार ने ऐसा कैसे किया, क्योंकि ये अदालत की अवमानना है.

– जस्टिस अरुण मिश्रा ने अदालत में पूछा कि आखिर डेस्क ऑफिसर के खिलाफ क्या एक्शन लिए गए हैं? अगर देश में कानून ही नहीं है तो क्या हम कोर्ट बंद कर दें? क्या ये सबकुछ पैसों के लिए नहीं है? हम हर किसी के खिलाफ अवमानना का केस दायर करेंगे.
– जस्टिस अरुण मिश्रा ने पूछा कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकॉम ने किस अधिकार से आदेश दिया कि भुगतान ना करने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी. अब अदालत ने सभी कंपनियों से पूछा है कि आप कारण बताएं कि आपपर अवमानना का केस क्यों ना चलाया जाए.

दरअसल, 6 जनवरी को टेलीकॉम कंपनियों को बड़ा झटका लगा था. सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों की पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया था. कोर्ट के फैसले के मुताबिक 23 जनवरी तक टेलीकॉम कंपनियों को बकाया चुकाना है. दरअसल 22 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों भारती एयरटेल, वोडा- आइडिया और टाटा टेलीसर्विसेज ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी. याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया कि पीठ 24 अक्तूबर 2019 के उस फैसले पर फिर से विचार करे जिसमें गैर दूरसंचार आय को भी AGR में शामिल किया गया है. इस फैसले से टेलीकॉम कंपनियों को केंद्र को करीब 1.33 लाख करोड रुपये चुकाने हैं.

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