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दिल्ली हिंसा में सच और झूठ को उजागर करते एक महिला के दो वीडियो,दंगों में सभी को नुकसान होता है।

दिल्ली हिंसा में सच और झूठ को उजागर करते एक महिला के दो वीडियो,दंगों में सभी को नुकसान होता है।
राजकुमार अग्रवाल
देश की राजधानी दिल्ली में शांति रही। हिंसाग्रस्त किसी भी इलाके से अप्रिय वारदात की जानकारी नहीं मिली। अलबत्ता न्यूज चैनलों पर आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन के धर की छत पर मिले पेट्रोल बम, पत्थरों से भरे कट्टे, तेजाब की थैलियां आदि मिलने का मुद्दा छाया रहा। हालांकि ऐसी जानलेवा सामग्री मिलने पर पार्षद ने अनभिज्ञता प्रकट की है। इसी बीच सोशल मीडिया पर दिल्ली के मौजपुर की एक महिला का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उसका आरोप है कि पुलिस वाले के डंडा मारने से उसके सिर में चोट लग गई है।

 

 

इस वीडियो के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया है कि पुलिस ने महिलाओं पर ज्यादती की है। वीडियो को देखने से साफ जाहिर है कि कोई व्यक्ति माहौल को बिगाडऩे के लिए महिला से बात कर रहा है। इस व्यक्ति का कहना है कि महिला जब मौजपुर में शांतिपूर्वक धरना दे रही थी, तब एक पुरुष पुलिस वाले ने सिर पर डंडा मार दिया, जिससे खूब खून बहा।

 

सिर में टांके भी लगाए गए। वीडियो को देखने से एक बार तो यही अहसास होता है कि दिल्ली में पुलिस ने महिलाओं पर भी डंडे बरसाए हैं। लेकिन इसी महिला का दूसरा वीडियो भी है जो दिल्ली हिंसा के सच को उजागर करता है। सच उजागर करने वाला वीडियो तब का है, जब इसी महिला के सिर से खून बह रहा है और उसे घर में ही दो तीन अन्य महिलाओं ने संभाल रखा है।

 

यह महिला बड़ेे गर्व के साथ कह रही है कि उसने पुलिस वाले पर पत्थर फेंके हैं। जब वह पत्थर फेंक रही थी, तभी पैर फिसलने से नाले में गिर गई, जिससे उसके सिर में चोट आई है। यह महिला आगे भी पुलिस पर पत्थर फेंकने को तैयार है। सवाल महिला के सच और झूठ बोलने का नहीं है। अहम सवाल माहौल बिगाडऩे का है। दिल्ली में ऐसे लोग सक्रिय हैं जो माहौल बिगाडऩा चाहते हैं। इसलिए महिला का जबरन इंटरव्यू लेकर झूठ परोसा गया। चूंकि वीडियो बनाने वाले की आवाज साफ सुनाई दे रही है, इसलिए पुलिस को ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए।महिला के दोनों वीडियो यूट्यूब अकाउंट और फेसबुक पेज www.facebook.com/dainikatalhind पर देखे जा सकते हैं।

राष्ट्रपति करेंगे सरकार से बात-सोनिया गांधी:
दिल्ली हिंसा को लेकर 27 फरवरी को कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक ज्ञापन दिया। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद सोनिया ने कहा कि राष्ट्रपति ने भरोसा दिलाया है कि वे केन्द्र सरकार से बात करेंगे। सोनिया ने आरोप लगाया कि दिल्ली की हिंसा में केन्द्र और दिल्ली सरकार मूक दर्शक बनी हुई है। सोनिया के साथ पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, प्रियंका गांधी, एके एंथोनी आदि भी साथ थे।

सभी को नुकसान होता है:
साम्प्रदायिक हिंसा में सभी को नुकसान होता है। दिल्ली में 24 फरवरी से लेकर 26 फरवरी तक जो हिंसा हुई उसमें हिन्दू और मुसलमान दोनों वर्गों के लोगों की दुकानों और सम्पत्तियों को भारी नुकसान हुआ है। चांदबाग में तो एक पार्किंग स्थल पर हुई आगजनी में सैकड़ों कारें जल कर राख हो गई। हिंसा के दौरान दोनों पक्षों के असामाजिक तत्व फायदा उठाते हैं। जो लोग हिंसा भड़काते हैं उनसे सभी को सावधान रहने की जरुरत है। 27 फरवरी को मीडिया रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को सुरक्षित रखने में बहुसंख्यक समुदाय ने भूमिका निभाई। यानि दोनों समुदाय के लोग अपने अपने इलाकों में सद्भावना के साथ रहते हैं, लेकिन दंगा होने की स्थिति में असामाजिक तत्व इस सद्भावना को तोड़ देते हैं। पुलिस को ऐसे असामाजिक तत्वों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करनी चाहिए।

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