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कैथल-टिकट न मिलने मायूस नेताओं ने बुलाई अपने अपने समर्थकों की बैठक बैठक के बाद ले सकते हैं बड़ा निर्णय

टिकट न मिलने से मायूस भाजपा नेताओं और उनके समर्थकों में सन्नाटा पसर गया

कैथल-टिकट न मिलने मायूस नेताओं ने बुलाई अपने अपने समर्थकों की बैठक

बैठक के बाद ले सकते हैं बड़ा निर्णय, होंगे अलग समीकरण

कैथल/पुंडरी, 30 सितंबर (कृष्ण प्रजापति): भाजपा द्वारा पहली सूची में जिले की चारों उम्मीदवारों की घोषणा होते ही जहां टिकट पाने वाले नेताओं को बधाइयां देने का तांता लग गया तो वहीं टिकट न मिलने से मायूस भाजपा नेताओं और उनके समर्थकों में सन्नाटा पसर गया है। कैथल जिले की चारों विधानसभा में टिकट से वंचित रहने वाले नेताओं ने अपने-अपने समर्थकों की बैठक बुलाना शुरू कर दिया है और उस बैठक में समर्थकों से रायशुमारी करके कोई बड़ा निर्णय लिया जा सकता है, जिससे हालात बीजेपी के विपरीत भी हो सकते हैं। पूंडरी से भाजपा की टिकट पर दो बार चुनाव लड़ चुके रणधीर गोलन ने आज सुबह 10 बजे पुंडरी के एक निजी पैलेस में कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई है। बैठक में वे आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर सकते हैं, उधर कैथल से भाजपा नेता पाला राम सैनी ने भी आज दोपहर 12 बजे मून लाईट पब्लिक स्कूल में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का फैसला लिया है और उसके बाद कार्यकर्ताओं से रायशुमारी के बाद वे भी चुनाव लड़ने को लेकर बड़ा फैसला ले सकते हैं। जिले की चारों विधानसभा में टिकट के दर्जनों उम्मीदवार होने के चलते और टिकट एक को मिलने के चलते भाजपा में बगावती तेवर दिखने की संभावना जोर पकड़ चुकी है। कैथल विधानसभा में रणदीप सिंह सुरजेवाला जहां पिछले एक महीने से लगातार सम्मेलन व जनसंपर्क में लगे हुए हैं तो वहीं भाजपा के लोकल नेता टिकट पाने की कोशिश में शीर्ष नेताओं के पास पहुंचे हुए थे, इसका नुकसान भी बीजेपी को हो सकता है। पुंडरी विधानसभा की बात करें तो यहां से पिछले 25 वर्षों से आजाद उम्मीदवार जीतता आया है, क्योंकि टिकट आबंटन के समीकरण कुछ इस प्रकार बनते गए कि लोगों को अपना आजाद नुमाइंदा ही विधानसभा में भेजना पड़ा। वर्ष 1996 से लेकर 2014 तक किसी भी राजनीतिक दल ने जिताऊ प्रत्याशी को टिकट न देकर टिकट वितरण में गड़बड़ी की, जिसका नतीजा यह हुआ कि यहां से पिछले 25 वर्षों से किसी भी राजनीतिक दल का प्रत्याशी जीत नहीं पाया और वर्तमान में भाजपा की टिकट भी बाहरी प्रत्याशी को (करनाल निवासी को) मिलने से इसका विरोध होने की संभावना बनी हुई है और अब की बार भी हालात कुछ ऐसे पैदा होने की संभावना है कि यहां से अबकी बार फिर उम्मीदवार जीत सकता है।

बॉक्स– वर्ष 2009 के चुनावों में कांग्रेस की टिकट पर प्रो० दिनेश कौशिक ने चुनाव लड़ा था और आज़ाद उम्मीदवार सुल्तान सिंह जड़ौला ने चुनाव जीता था।चुनाव जीतकर व कांग्रेस उम्मीदवार को ही हराकर उन्होंने कांग्रेस को ही समर्थन दिया था। उसके बाद 2014 के विधानसभा चुनावो में प्रो० दिनेश कौशिक ने भाजपा उम्मीदवार रणधीर गोलन को हराकर भाजपा को ही समर्थन दिया था। अब प्रदेश में यदि सत्ता सरकार और लहर की बात करें तो बीजेपी की सरकार बनना लगभग तय है लेकिन पुंडरी सीट पर भाजपा की टिकट बाहरी उम्मीदवार को दिए जाने के चलते हालात यह बन चुके हैं कि भाजपा उम्मीदवार को हराकर आजाद उम्मीदवार जीतकर भाजपा को समर्थन न दे दें।

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