लखनऊ अग्निकांड: गेमिंग ज़ोन और लाइब्रेरी वाली इमारत में भीषण आग, 15 युवाओं की मौत; खिड़की से कूदे छात्र, SIT जांच शुरू
लखनऊ | 22 जून 2026 | अटल हिन्द ब्यूरो
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज (पुरनिया इलाका) में सोमवार दोपहर एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लगने से 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 5 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों में अधिकांश 20 से 30 वर्ष के युवा छात्र हैं, जो इमारत की ऊपरी मंजिलों पर स्थित एनीमेशन कोचिंग, लाइब्रेरी और गेमिंग ज़ोन में मौजूद थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग इतनी भयानक थी कि जान बचाने के लिए कई छात्रों को तीसरी मंजिल की खिड़कियों और संकरे छज्जों से नीचे कूदना पड़ा, जबकि कुछ छात्रों ने बिजली के तारों के सहारे लटककर नीचे उतरने की कोशिश की।
बाथरूम में छिपकर मांगी मदद, धुएं ने ली जान
हादसे के बाद केजीएमयू (KGMU) मेडिकल कॉलेज और ट्रॉमा सेंटर के बाहर का मंजर बेहद हृदयविदारक था। बदहवास माता-पिता हाथों में बच्चों की तस्वीरें लिए उन्हें तलाश रहे थे।
मृतकों में शामिल सीतापुर के आदित्य श्रीवास्तव और लखनऊ के शहजाद (23 वर्ष) ने मौत से चंद मिनट पहले अपने परिजनों को फोन किया था। शहजाद ने रोते हुए अपने चाचा को फोन पर कहा था, “मैं बाथरूम में फंस गया हूं, चारों तरफ धुआं है, मुझे बचा लो।” अधिकारियों के मुताबिक, इमारत में केवल एक ही प्रवेश और निकास द्वार (Single Entry-Exit) होने के कारण धुआं तेजी से ऊपर की मंजिलों में भर गया, जिससे अधिकांश मौतें दम घुटने के कारण हुईं।

इमारत का लेआउट और हादसे की वजह
शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस तीन मंजिला इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर एक ‘पेट शॉप’ (पालतू जानवरों का क्लिनिक) संचालित थी।
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दूसरे फ्लोर पर: ‘लर्निंग स्पेस’ नाम की लाइब्रेरी/कोचिंग और ‘हेड हॉपर स्टूडियो’ (3D आर्ट और गेमिंग प्रोडक्शन ऑफिस) था।
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तीसरे फ्लोर पर: सॉफ्टवेयर ऑफिस और गेमिंग ज़ोन था, जहां दोपहर के वक्त 30 से अधिक छात्र और कर्मचारी मौजूद थे।
फायर ब्रिगेड को दोपहर 2:27 बजे सूचना मिली, जिसके बाद 17 मिनट के भीतर इंदिरा नगर और आसपास के स्टेशनों से 19 दमकल गाड़ियां और हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म मौके पर पहुंचे। भारी धुएं के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में एक फायरकर्मी की तबीयत भी बिगड़ गई। नीचे स्थित पेट शॉप से कुछ मूक पशुओं को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन कई के अंदर ही फंसे होने की आशंका है।
राजनीतिक हलचल और उच्च स्तरीय SIT जांच
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने अलीगढ़ दौरे को बीच में ही छोड़कर सीधे लखनऊ घटनास्थल और केजीएमयू अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और घायलों के मुफ्त इलाज के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के आदेश पर इस पूरे मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसमें:
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अमृत अभिजात (अपर मुख्य सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति)
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प्रवीण कुमार (अपर पुलिस महानिदेशक, लखनऊ ज़ोन)
SIT को 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। मौके पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रतिनिधि और जिले के आला अधिकारी मुस्तैद रहे।
गंभीर सवाल: बिना NOC के चल रहा था कमर्शियल कॉम्प्लेक्स?
इस हादसे ने एक बार फिर शहरी इलाकों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध कमर्शियल सेंटरों और फायर सेफ्टी की पोल खोल दी है। शुरुआती प्रशासनिक बैठकों में यह बात सामने आई है कि इस इमारत के पास वैध फायर एनओसी (No Objection Certificate) नहीं थी। स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवारों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि फायर सेफ्टी नियमों का पालन कराया गया होता और रेस्क्यू के दौरान पीछे की दीवार तोड़ने के आधुनिक उपकरण समय पर उपलब्ध होते, तो इन मासूम युवाओं की जान बचाई जा सकती थी।


