कविता: आपका वाहन न ले किसी के प्राण, सड़क सुरक्षा और सावधानी का संदेश

यह रचना डॉ. अशोक कुमार वर्मा द्वारा लिखी गई है। इस कविता का शीर्षक आपका वाहन न ले किसी के प्राण है। कवि ने सड़क सुरक्षा को लेकर बहुत महत्वपूर्ण बातें बताई हैं।
हे मानव! सदा यह ध्यान रखो कि आपका वाहन किसी के प्राण न ले। वाहन की पतवार हमेशा तेरे हाथ में होती है। कभी भी व्यर्थ की बात में अपना ध्यान मत भटकाओ।
क्लच और ब्रेक का सही उपयोग करना चाहिए। हर संयोग को हमेशा सावधानी से रखना चाहिए। तेरे हाथ में किसी का रक्त नहीं लगना चाहिए। तेरी किसी भी भूल से कोई दीप नहीं बुझना चाहिए।
तेरे पहियों के तले कोई भी जीव नहीं कुचलना चाहिए। अपनी गति को हमेशा नियंत्रित रखना चाहिए जिससे हर संकट टल जाए। जब भी आवश्यकता हो, तुरंत ब्रेक पर पाँव धरना चाहिए। उतावलेपन में कभी भी किसी के प्राण नहीं हरने चाहिए।
तेरी एक छोटी-सी भूल किसी के भी जीवन को धूल कर सकती है। नशे की हालत में कभी भी वाहन नहीं चलाना चाहिए। सड़क के नियमों को हमेशा अपनाना चाहिए।
आगे निकलने की होड़ में हमेशा संयम रखना चाहिए। जब बहुत आवश्यक हो तभी आगे बढ़ना चाहिए। पैदल चलने वाले लोगों का भी पूरा अधिकार होता है। उनके प्रति हमेशा सदव्यवहार रखना चाहिए।
सीट-बेल्ट बाँधना अपना नियम बनाना चाहिए। द्विचक्र वाहन यानी मोटरसाइकिल या स्कूटर पर शिरस्त्राण यानी हेलमेट जरूर लगाना चाहिए। यह हमेशा स्मरण रखना चाहिए कि सड़क किसी एक की नहीं है। हर राहगीर की जिम्मेदारी इसमें कम नहीं होती है।
चलचित्र यानी फिल्मों में तो पुनः प्रयास मिल जाता है। लेकिन असल जीवन में ऐसा दुष्साहस कभी नहीं करना चाहिए। घर पर हर कोई आपकी प्रतीक्षा कर रहा होता है। सुरक्षित घर लौटना ही सबकी एकमात्र इच्छा होती है।
आपका वाहन कभी किसी के प्राण न ले। हे मानव! सदा इस बात का ध्यान रखो। इस कविता के रचयिता कवि डॉ. अशोक कुमार वर्मा हैं।