कैथल: बिजली निजीकरण की तैयारी कर रही भाजपा सरकार, कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने उठाए गंभीर सवाल

कैथल: बिजली निजीकरण की तैयारी कर रही भाजपा सरकार, कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने उठाए गंभीर सवाल

कैथल में 02 सितंबर को कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने हरियाणा विधानसभा के अंतिम दिन बिजली के प्रस्तावित निजीकरण को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा निशाना साधा है। शून्य काल के दौरान उन्होंने गुड़गांव और नूंह में समानांतर बिजली लाइसेंस देने की प्रक्रिया का कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर बिजली विभाग के निजीकरण की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम बताया है।

गुड़गांव और नूंह में समानांतर बिजली लाइसेंस पर सवाल

विधायक आदित्य सुरजेवाला ने सदन में जानकारी देते हुए कहा कि जिस कंपनी को बिजली वितरण का काम देने की पूरी तैयारी की जा रही है, वह कंपनी महज लगभग एक साल पुरानी है। इस नई कंपनी के पास बिजली वितरण के क्षेत्र में काम करने का कोई भी पुराना अनुभव नहीं है। इसके बावजूद इस कंपनी को 4717 करोड़ रुपये का बहुत बड़ा प्रोजेक्ट सौंपने की पूरी तैयारी चल रही है, जो अपने आप में कई बड़े सवाल खड़े करती है। उन्होंने कंपनी की केवल एक करोड़ रुपये की पूंजी का हवाला देते हुए सरकार से इस मामले में स्पष्ट जवाब की मांग की है।

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बड़े मॉल और उद्योगों को फायदा मिलने की आशंका

कांग्रेस विधायक ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रस्तावित व्यवस्था का मुख्य फायदा केवल बड़े मॉल, बड़े उद्योगों और सोसाइटियों को ही मिलेगा। इसके विपरीत गांवों के लोगों, ट्यूबवेलों और छोटी दुकानों को इस व्यवस्था का कोई भी लाभ नहीं मिल सकेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गुड़गांव अकेला दक्षिणी हरियाणा बिजली वितरण निगम के कुल राजस्व में करीब 40 प्रतिशत तक का योगदान देता है। ऐसे में राजस्व का यह बहुत बड़ा हिस्सा निजी हाथों में चले जाने से किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों और आम बिजली उपभोक्ताओं पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।

नौकरियों और बिजली सुविधाओं पर संकट

आदित्य सुरजेवाला ने गहरी आशंका जताई है कि बिजली के इस निजीकरण से सरकारी विभागों के कर्मचारियों की नौकरियों पर बड़ा संकट आ सकता है। इसके साथ ही किसानों को मिलने वाली बिजली सुविधाओं पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने हरियाणा सरकार से मांग की है कि गुड़गांव और नूंह में चल रही समानांतर बिजली लाइसेंस की इस पूरी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए।

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