कैथल: सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पर विधानसभा में गरजे आदित्य सुरजेवाला

कैथल में सफाई और सीवर कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर हरियाणा विधानसभा सत्र के अंतिम दिन गुरुवार को सदन में बड़ा मुद्दा उठाया गया। कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने शून्य काल के दौरान कर्मचारियों की मांगों को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने सदन को बताया कि प्रदेश के कई शहरों में सफाई व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित चल रही है, जबकि कर्मचारी पिछले 26 दिनों से लगातार हड़ताल पर बैठे हुए हैं।
लिखित समझौते को लागू न करने का आरोप
सुरजेवाला ने सदन में जानकारी दी कि 13 मई को सरकार की तरफ से सफाई और सीवर कर्मचारियों की 17 प्रमुख मांगों को लेकर लिखित सहमति बनी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लिखित समझौतों के मुताबिक किसी भी मांग को अभी तक जमीन पर लागू नहीं किया गया है। इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से कर्मचारियों के वेतन में 2100 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा का भी विशेष रूप से जिक्र किया और दावा किया कि यह फैसला भी अभी तक लागू नहीं हुआ है।
कार्य परिस्थितियों और सुरक्षा उपकरणों का मुद्दा
विधायक ने सफाई और सीवर कर्मचारियों की खराब कार्य परिस्थितियों का गंभीर मुद्दा भी सदन के सामने उठाया। उन्होंने सदन में कहा कि कर्मचारी सुरक्षा उपकरणों के अभाव में सीवर की सफाई और कूड़ा उठाने जैसे बेहद जोखिम भरे काम करने को मजबूर हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा, जोखिम भत्ता और बीमा जैसी जरूरी व्यवस्थाएं शुरू करने की मांग उठाई।
रणबीर और भवी चंद के परिवारों का मामला
सुरजेवाला ने अपने संबोधन के दौरान रणबीर और भवी चंद के परिवारों का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दोनों परिवारों के सदस्य अब भी पक्की नौकरी और उचित मुआवजे की प्रतीक्षा में बैठे हैं। इसके साथ ही उन्होंने साल 2018 और 2022 में कर्मचारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने पर बनी सहमति का मुद्दा भी जोर-शोर से सदन में उठाया।
छंटनी और ठेका प्रथा खत्म करने की मांग
विधायक ने गुरुग्राम, कैथल, जींद और सिरसा में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी होने का दावा किया और सरकार से इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी हमारे शहरों की सफाई व्यवस्था की बेहद महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनके साथ हमेशा सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए। अंत में विधायक ने सरकार से साफ शब्दों में मांग की कि सफाई कर्मचारियों के साथ हुए समझौते को तुरंत लागू किया जाए, कर्मचारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं और ठेका प्रथा को पूरी तरह से खत्म किया जाए।