जींद में अधिवक्ता की मौत के छह माह बाद अस्पताल संचालक और दो चिकित्सकों पर मामला दर्ज

जींद में अधिवक्ता की मौत के छह माह बाद अस्पताल संचालक और दो चिकित्सकों पर मामला दर्ज

जींद में लगभग छह माह पहले उपचार के दौरान एक अधिवक्ता की मौत हो गई थी। इस मामले में गुरुवार को सिविल लाइन थाना पुलिस ने अदालत के आदेश पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने अस्पताल संचालक तथा दो चिकित्सकों के खिलाफ लापरवाही से मौत होने के मामले में यह केस दर्ज किया है।

क्या है पूरा मामला और कैसे पहुंचे निजी अस्पताल

गांव अनूपगढ़ निवासी देवेंद्र ने अदालत में एक याचिका दायर की थी। याचिका में देवेंद्र ने बताया कि उसके भाई अधिवक्ता पुष्पेंद्र की गत 17 फरवरी को बीपी हाई होने के चलते तबीयत खराब हो गई थी। परिजनों द्वारा पुष्पेंद्र को नागरिक अस्पताल लाया गया था। नागरिक अस्पताल से उसे चिकित्सा देकर रोहतक रेफर कर दिया गया था। जब वे एंबुलेंस में पुष्पेंद्र को लेकर रोहतक जा रहे थे, तब एंबुलेंस चालक ने कहा कि मरीज की तबीयत ज्यादा खराब है। चालक ने कहा कि अब मरीज के पास कुछ ही समय ही बचा है। इस बात को सुनकर पुष्पेंद्र के परिजन बहुत डर गए और उन्होंने चालक से सुझाव मांगा। चालक के कहने पर वे लोग पुष्पेंद्र को रोहतक रोड बाईपास पर स्थित एक निजी अस्पताल ले गए।

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अस्पताल में पैसों की मांग और ऑपरेशन

जब वे निजी अस्पताल पहुंचे, तो वहां मौजूद चिकित्सक नमन ने उन्हें और ज्यादा डरा दिया। चिकित्सक नमन ने परिजनों से अढाई लाख रुपये जमा करवाने के लिए कहा। जब परिजनों ने इतने रुपये न होने की बात कही, तो महिला चिकित्सक कनिका ने दो लाख दस हजार रुपये जमा करवाने को कहा। परिजनों ने किसी तरह दो लाख रुपये जमा करवा दिए। इसके बाद अस्पताल में उनके आनन-फानन में हस्ताक्षर करवाए गए। उसी दौरान पुष्पेंद्र को लिफ्ट से ऊपर ले जाया गया। बाद में परिजनों को पता चला कि पुष्पेंद्र का ऑपरेशन कर दिया गया है। जबकि न तो पुष्पेंद्र के सेंपल लिए गए थे और न ही सीटी स्कैन तथा एमआरआई करवाई गई थी। अस्पताल में एनेथिसिया तथा अन्य विशेषज्ञों को भी नहीं बुलाया गया था। इसके बावजूद पुष्पेंद्र की सर्जरी कर दी गई थी और वहां का स्टाफ भी ट्रेंड नहीं था।

बेहतर इलाज के अभाव में मौत और पुलिस कार्रवाई

सर्जरी के बाद भी पुष्पेंद्र की हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। जब परिजनों ने अस्पताल संचालक दीपाशंकर, सर्जन नमन तथा कनिका से पुष्पेंद्र को किसी और अच्छे अस्पताल में रेफर करने के लिए कहा, तो आरोपितों ने उन्हें साफ मना कर दिया। बेहतर चिकित्सा सुविधा के अभाव में पुष्पेंद्र ने 22 फरवरी को दम तोड़ दिया था। इस घटना की शिकायत पहले पुलिस से की गई थी, लेकिन पुलिस ने तब कोई भी कार्रवाई नहीं की थी। इसके बाद अदालत में याचिका दायर की गई। याचिका के आधार पर अदालत ने अस्पताल संचालक तथा चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए। गुरुवार को पूरी जानकारी देते हुए सिविल लाइन थाना के जांच अधिकारी टिंकू ने बताया कि पुलिस ने अदालत के आदेश पर अस्पताल संचालक दीपा शंकर, सर्जन नमन तथा कनिका के खिलाफ इलाज में लापरवाही बरतने और मरीज की मौत समेत विभिन्न भारतीय न्याय संहिता धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

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