फरीदाबाद में अधिवक्ता को थाने में डेढ़ घंटे रोके जाने का मामला, समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी ने मानवाधिकार आयोग व पुलिस अधिकारियों को भेजी शिकायत

Team Atal Hind8 August 20262 min read19 viewsफरीदाबाद
फरीदाबाद में अधिवक्ता को थाने में डेढ़ घंटे रोके जाने का मामला, समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी ने मानवाधिकार आयोग व पुलिस अधिकारियों को भेजी शिकायत

फरीदाबाद में एक अधिवक्ता को कथित रूप से डीसीपी सेंट्रल कार्यालय से थाना सेंट्रल ले जाकर लगभग डेढ़ घंटे तक रोके जाने की गंभीर घटना सामने आई है। इस मामले में अधिवक्ता एवं समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी ने निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में पुलिस आयुक्त फरीदाबाद, थाना सेंट्रल के एसएचओ, हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लिखित शिकायत एवं स्वतंत्र प्रतिवेदन भेजा है।

डीसीपी कार्यालय से थाने ले जाने का मामला

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सेक्टर-12 फरीदाबाद निवासी अधिवक्ता एवं समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी ने अपनी शिकायत में बताया कि जिला न्यायालय फरीदाबाद के अधिवक्ता कुणालकांत शर्मा अपनी शिकायत के संबंध में 5 अगस्त 2026 को लगभग 12:30 बजे डीसीपी सेंट्रल कार्यालय पहुंचे थे। पीड़ित अधिवक्ता द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, उन्हें लगभग 1 बजे के बाद डीसीपी सेंट्रल कार्यालय में रोका गया तथा बाद में थाना सेंट्रल ले जाया गया, जहां उन्हें करीब डेढ़ घंटे तक बैठाकर रखा गया।

वैधानिक आधार स्पष्ट न करने का आरोप

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिवक्ता को कथित रूप से यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि उन्हें किस एफआईआर, डीडी/जीडी एंट्री अथवा अन्य वैधानिक आधार पर रोका गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद कुछ साथी अधिवक्ताओं के थाना सेंट्रल पहुंचने तथा पुलिस अधिकारियों से इस संबंध में पूछताछ किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।

सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

अधिवक्ता मोहन तिवारी ने कहा कि घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए डीसीपी सेंट्रल कार्यालय एवं थाना सेंट्रल की सीसीटीवी फुटेज, संबंधित डीडी/जीडी/रोजनामचा, विजिटर रजिस्टर तथा अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। इसके अलावा घटना से संबंधित उपलब्ध फोटो एवं वीडियो को भी जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका प्रतिवेदन किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत शिकायत की पैरवी के रूप में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता, नागरिक गरिमा, अधिवक्ताओं के अधिकारों तथा विधि के शासन से जुड़े व्यापक जनहित में है।

दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

डॉ. तिवारी ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि 5 अगस्त की घटना से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज एवं सरकारी रिकॉर्ड तत्काल सुरक्षित कराए जाएं। साथ ही यह निष्पक्ष रूप से निर्धारित किया जाए कि अधिवक्ता को किस अधिकारी के निर्देश पर, किस समय और किस वैधानिक आधार पर थाना सेंट्रल ले जाया गया तथा उन्हें वहां रोके जाने का वास्तविक कारण क्या था। उन्होंने घटना के समय मौजूद पुलिस अधिकारियों एवं प्रत्यक्षदर्शी अधिवक्ताओं के बयान दर्ज करने तथा उपलब्ध फोटो-वीडियो को जांच में शामिल करने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी पुलिस अधिकारी द्वारा कानून, निर्धारित प्रक्रिया अथवा मानवाधिकारों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।

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