फरीदाबाद में अधिवक्ता को थाने में रोके जाने का मामला, डॉ. मोहन तिवारी ने उठाई आवाज और की निष्पक्ष जांच की मांग

फरीदाबाद में एक अधिवक्ता को पुलिस द्वारा कथित तौर पर थाने में रोके जाने का मामला सामने आया है। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए अधिवक्ता एवं समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी ने मानवाधिकार आयोग और पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी है। डॉ. मोहन तिवारी ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग उठाई है।
घटना की पूरी जानकारी और शिकायत
फरीदाबाद के सेक्टर-12 निवासी अधिवक्ता एवं समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी ने अपनी शिकायत में बताया कि जिला न्यायालय फरीदाबाद के अधिवक्ता कुणालकांत शर्मा 5 अगस्त 2026 को लगभग 12:30 बजे अपनी शिकायत के संबंध में डीसीपी सेंट्रल, फरीदाबाद कार्यालय पहुंचे थे। पीड़ित अधिवक्ता को लगभग 1 बजे के बाद डीसीपी सेंट्रल कार्यालय में रोका गया और फिर थाना सेंट्रल ले जाया गया, जहां उन्हें करीब डेढ़ घंटे तक बैठाकर रखा गया।
वैधानिक आधार का अभाव और साथियों का पहुंचना
शिकायत में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि अधिवक्ता को कथित रूप से यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि उन्हें किस एफआईआर, डीडी/जीडी एंट्री या अन्य वैधानिक आधार पर रोका गया था। घटना की जानकारी मिलने के बाद कुछ साथी अधिवक्ता थाना सेंट्रल पहुंचे और उन्होंने पुलिस अधिकारियों से इस संबंध में पूछताछ की।
सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
अधिवक्ता मोहन तिवारी ने कहा कि घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए डीसीपी सेंट्रल कार्यालय और थाना सेंट्रल की सीसीटीवी फुटेज, संबंधित डीडी/जीडी रोजनामचा, विजिटर रजिस्टर और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। इसके अलावा घटना से संबंधित उपलब्ध फोटो एवं वीडियो को भी जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विधि के शासन का मुद्दा
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका प्रतिवेदन किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत शिकायत की पैरवी नहीं है, बल्कि यह एक अधिवक्ता और नागरिक के रूप में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, नागरिक गरिमा, अधिवक्ताओं के अधिकारों और विधि के शासन से जुड़ा व्यापक जनहित का मामला है। डॉ. तिवारी ने संबंधित अधिकारियों से 5 अगस्त की घटना से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज और सरकारी रिकॉर्ड तत्काल सुरक्षित कराने की मांग की है।
दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग
डॉ. तिवारी ने यह निष्पक्ष रूप से निर्धारित करने की मांग की है कि अधिवक्ता को किस अधिकारी के निर्देश पर, किस समय और किस वैधानिक आधार पर थाना सेंट्रल ले जाया गया तथा वहां रोके जाने का वास्तविक कारण क्या था। उन्होंने घटना के समय मौजूद पुलिस अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शी अधिवक्ताओं के बयान दर्ज करने की भी मांग की है ताकि दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कानूनी व विभागीय कार्रवाई की जा सके।