राष्ट्रीय ग्रंथालयाध्यक्ष दिवस विशेष: एआई के दौर में पुस्तकालयों का विकास और वास्तविकता की दुरी

Team Atal Hind10 August 20262 min read41 viewsशिक्षा
राष्ट्रीय ग्रंथालयाध्यक्ष दिवस विशेष: एआई के दौर में पुस्तकालयों का विकास और वास्तविकता की दुरी

देशभर में 12 अगस्त को पद्मश्री डॉ. एस. आर. रंगनाथनजी का जन्मदिन राष्ट्रीय ग्रंथालयाध्यक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है। एआई अर्थात कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग विश्वभर में हर क्षेत्र में किया जा रहा है और पुस्तकालय विभाग भी इससे अलग नहीं है। पुस्तकालय क्षेत्र में एआई को लेकर अपार संभावनाएं हैं जो पुस्तकालय सेवा-सुविधाओं को उन्नत स्तर पर ले जा सकती हैं। परंतु एआई के दौर में पुस्तकालयों का विकास और हकीकत के बीच बढ़ती दूरी शिक्षा की गुणवत्ता के लिए खतरा हो सकती है। पुस्तकालय के प्रत्येक पाठक तक गुणवत्तापूर्ण सेवा सुविधाओं का लाभ पहुंचना चाहिए।

पुस्तकालयों का ऐतिहासिक महत्व और डिजिटल होता स्वरूप

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शिक्षा को उन्नत बनाने में पुस्तकालयों का मुख्य योगदान होता है क्योंकि पुस्तकालय ज्ञान रूपी केंद्र के रूप में सतत प्रज्वलित रहते हैं। देश में नालंदा, तक्षशिला जैसे समृद्ध विश्वविद्यालय हुआ करते थे जहां के पुस्तकालय अपनी विशाल समृद्धता और भव्यता के लिए विश्वविख्यात थे। आज के आधुनिक युग में तकनीक का उपयोग किए बिना कोई भी क्षेत्र विकास नहीं कर सकता है। विश्वस्तर पर हर ओर तेजी से सूचनाओं का विस्फोट हो रहा है और मुद्रित भौतिक पुस्तकों तथा साहित्यों की जगह अभी तेजी से डिजिटल और ऑनलाइन संग्रहण ले रहे हैं।

देश के अधिकांश पुस्तकालयों की बदहाल स्थिति

परंतु आज भी देश के ज्यादातर पुस्तकालय अपनी बदहाली की कहानी बयान करते नजर आते हैं। अधिकतम पुस्तकालयों में कौशलपूर्ण कर्मचारियों की भारी कमी है, उचित पाठन साहित्य नहीं है और योग्य रखरखाव का अभाव है। कई पुस्तकालयों के भवन खंडहर बन चुके हैं और निधि का अभाव हमेशा की समस्या है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा अनुदानित अधिकतम स्कूलों और कनिष्ठ महाविद्यालयों के पुस्तकालयों में कुशल कर्मचारी नहीं हैं और दशकों से पदभर्ती नहीं हुई है।

नीति आयोग की रिपोर्ट और बुनियादी सुविधाओं का संकट

केंद्र सरकार द्वारा संचालित शिक्षा संस्थान और विश्वविद्यालय पुस्तकालयों को विकसित करने पर जोर दे रहे हैं लेकिन ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की स्थिति बहुत खराब है। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017-18 से 2022-23 के बीच देश के 92 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। नई शिक्षा प्रणाली 2020 के अनुसार स्कूलों में पुस्तकालय, संगणक कक्षा और कौशलपूर्ण कर्मचारी आवश्यक माने गए हैं लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।

एआई तकनीक और पुस्तकालयों का भविष्य

दुनियाभर में छोटे-छोटे देश अपनी उन्नत तकनीक के भरोसे विकसित हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमें अपने कार्यक्षेत्र को बेहतर बनाने का मौका दे रही है। एआई ग्रंथालयाध्यक्ष का प्रतिस्थापन नहीं बल्कि उसकी कार्यकौशलता और दक्षता बढ़ाने वाला एक शक्तिशाली सहायक उपकरण है। पुस्तकालय में एआई पाठकों के विषयनुसार योग्य पाठन साहित्य की खोज, शोध विषय का विश्लेषण और दुर्लभ पुस्तकों के दीर्घकालीन संरक्षण में मददगार साबित हो रहा है।

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