रोहतक महापंचायत की तैयारियों को लेकर तोशाम में हुई एआईकेकेएमएस की बैठक

26 अक्टूबर को रोहतक के बोहर में होने वाली प्रदेश स्तरीय महापंचायत की तैयारियों को लेकर एआईकेकेएमएस ने तोशाम में आयोजित की बैठक
विष्णु शास्त्री /तोशाम /22 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
ऑल इंडिया किसान खेत जनजीवन के ज्वलंत मुद्दों को लेकर आगामी 26 अक्टूबर को रोहतक के नांदल भवन, बोहर में जो प्रदेश स्तरीय किसान, मजदूर, छात्र, युवा, महिला महापंचायत होने जा रही है, उसकी तैयारी में शनिवार को ऑल इंडिया किसान खेत-मजदूर मजदूर संगठन (एआईकेकेएमएस) की तोशाम के पचांयत घर में बैठक आयोजित हुई। जिसकी अध्यक्षता संगठन के जिला कमेटी सदस्य सुखबीर सिंह ने की। बैठक में एआईयूटीयूसी के राज्य प्रदेश उपाध्यक्ष रामफल सुहाग भी मौजूद थे।
इस दौरान मौजूद वक्ताओं ने कहा कि किसानों के लिए मौत का वारंट भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौता रद्द करने, एमएसपी पर सरकारी खरीद गारंटी का कानून बनाने, किसानों के तमाम कर्ज माफ करने, बिजली व बीज बिल वापिस लेने, ग्रामीण गरीबों को पूरे साल काम देने, मंडियों में पोर्टल का खेल बंद करने, सिंचाई आपूर्ति की गारंटी करने, चीनी व अन्य सामानों की बेहताशा बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने, खाली पड़े लाखों पदों पर पक्की भर्ती करने, जनविरोधी व शिक्षा-विरोधी नीतियां वापस लेने, अश्लीलता और शराबखोरी रोकने, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों की रोकथाम कानून, जनतांत्रिक अधिकारों का हनन करना बंद करने, आंदोलनकारी किसान-मजदूरों और युवाओं पर ज़ुल्म-अत्याचार बन्द करने आदि मुद्दों को जोरदार ढंग से बुलंद किया जाएगा।
संगठन के जिला सचिव मास्टर बस्ती राम, जिला प्रधान रोहतास सिंह सैनी, महेंद्र सिंह कटारिया, धर्मबीर गिरदावर व फूलचंद ने संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार की किसान मजदूर व जन विरोधी नीतियों के कारण मेहनतकश जनता के जीवन की समस्याएं दिनों-दिन बढ़ रही हैं। खेती घाटे का सौदा हो गई है। मजदूरों को रोजगार नहीं मिल रहा है। महंगाई ने लोगों का जीवन नरक बना डाला है। वायदा करके भी सरकार ने किसानों व मजदूरों के कर्ज माफ नहीं किए। जिला प्रधान रोहतास सिंह सैनी ने कहा कि सरकार अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के तहत देश के बड़े-बड़े पूंजीपति कॉरपोरेट घरानों के स्वार्थ में किसानों व खेत मजदूरों के हितों की बलि देने जा रही है। ऑल इण्डिया किसान खेत मजदूर संगठन इसका कड़ा विरोध करता है।
उन्होंने बताया कि एमएसपी की मांग लंबित है। किसान-मजदूर कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। बिजली बिल 2025 के माध्यम से बिजली क्षेत्र का पूर्ण रूप से निजीकरण किया जा रहा है। मनरेगा कानून को खत्म कर भूमिहीन, खेत-मजदूरों व अन्य ग्रामीण गरीबों के लिए रोजगार के बचे-खुचे अवसर समाप्त कर दिये गये हैं। प्राकृतिक आपदाओं से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा गत कई सालों से बकाया है।
बेरोजगार युवा नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। आंगनवाड़ी, मिड-डे-मील व आशा कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जा रहा। माताएं, बहन-बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। अपराध दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। किसान-मजदूरों की रोजी-रोटी और शिक्षा व संस्कृति पर सरकारों के ताबड़तोड़ हमलों के खिलाफ जोरदार आंदोलन खड़ा करना ही एकमात्र विकल्प है। आंदोलन से ही तीन काले कृषि कानून रद्द करवाए थे और इसी रास्ते सरकार की खेती-किसानी विरोधी-नीतियों को वापिस करवाया जायेगा।
संगठन ने फैसला लिया कि महापंचायत की तैयारी में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ पूरे जिला में जोरदार जन जागृति अभियान चलाया जाएगा। भिवानी से सैकड़ों की संख्या में लोग इस महापंचायत में शामिल होंगे। इस दौरान बैठक में उजाला सूरा, औमबीर सरल, मनफूल फौजी, महेंद्र सिंह, नरसिंह, कृष्ण ढिलो, ओमप्रकाश, सुशील, रणधीर जाखड़, राजेराम दिनोद, बिन्द्र, दीप कुमार ढाणी माहू, सुन्दर सिंह नया गांव आदि सहित संगठन के अनेक नेता तथा कार्यकर्ता मौजूद थे।