पादने पर यात्री को विमान से उतारा? जानिए पूरा सच

हवाई जहाज में पाद विवाद, यात्री हटाया गया
नई दिल्ली/25 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
हवाई यात्रा के दौरान यात्री द्वारा पाद (flatulence) मारे जाने से विवाद होने और यात्री को उड़ान से हटाने या बैन करने की खबरें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ये घटनाएँ पूरी तरह काल्पनिक नहीं हैं। कई देशों में ऐसी असली घटनाएँ दर्ज हुई हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में सिर्फ स्वाभाविक पाद के कारण नहीं, बल्कि उसके साथ हुए विवाद, गाली-गलौज या जानबूझकर किए गए व्यवहार के कारण कार्रवाई हुई।
जनवरी 2024 में अमेरिका में अमेरिकन एयरलाइंस की एक उड़ान फीनिक्स से ऑस्टिन जा रही थी। एक यात्री ने बार-बार पाद मारा और दूसरे यात्रियों से बहस शुरू कर दी। रेडिट पर एक साक्षी ने लिखा कि यात्री ने कहा, “आपको ये अशिष्ट लगा? तो ये गंध कैसी है” और पाद मारा। बहस बढ़ने पर प्लेन रनवे की ओर जा रहा था लेकिन गेट पर वापस लौटा। फ्लाइट अटेंडेंट ने यात्री को बताया कि वह इस उड़ान पर नहीं रहेगा। यात्री शांति से उतर गया। उड़ान 15-30 मिनट देर से निकली। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि मुख्य वजह सिर्फ गंध नहीं बल्कि व्यवधान और अभद्र भाषा थी।
2006 में भी अमेरिकन एयरलाइंस की एक उड़ान में एक महिला यात्री ने पाद की गंध छिपाने के लिए माचिस जलाई। क्रू को जलने की गंध आई तो उन्होंने आपात लैंडिंग नैशविले में करवाई। सामान की जांच और कुत्तों की मदद ली गई। महिला पर कोई आपराधिक आरोप नहीं लगा लेकिन एयरलाइन ने उन्हें स्थायी रूप से बैन कर दिया।
2018 में ट्रांसएविया एयरलाइंस की दुबई से एम्स्टर्डम जा रही उड़ान में एक यात्री लगातार पाद मार रहा था। पास बैठे दो डच यात्रियों ने रोकने को कहा। विवाद बढ़कर हाथापाई में बदल गया। पायलट ने वियना में आपात लैंडिंग की। पुलिस आई और चार यात्रियों (जिनमें दो बहनें भी थीं) को उतारा। विडंबना यह कि पाद मारने वाले यात्री को नहीं हटाया गया। चारों को एयरलाइन ने भविष्य की उड़ानों से बैन कर दिया। बाद में दो बहनों ने मुकदमा भी दायर किया।
मार्च 2026 में कोलंबियाई इंफ्लुएंसर येफरसन कोसियो ने एवियंका एयरलाइंस की बोगोटा से मैड्रिड उड़ान में फर्ट मशीन (नकली पाद की आवाज और गंध पैदा करने वाला उपकरण) चलाया। यह अटलांटिक महासागर के ऊपर हुआ जहां आपात लैंडिंग मुश्किल थी। एयरलाइन ने इसे सुरक्षा, आराम और अनुशासन के खिलाफ बताया। उन्हें बैन किया गया और कानूनी कार्रवाई की बात कही गई।
ये घटनाएँ अलग-अलग देशों में हुईं—अमेरिका, नीदरलैंड/ऑस्ट्रिया मार्ग, कोलंबिया-स्पेन। कोई एक देश या एक कानून नहीं है। ज्यादातर एयरलाइंस अपने “कॉन्ट्रैक्ट ऑफ कैरिज” या यात्री समझौते के तहत कार्रवाई करती हैं। इसमें लिखा होता है कि यात्री का व्यवहार सुरक्षा, आराम, व्यवस्था या अनुशासन को प्रभावित न करे। कई एयरलाइंस “offensive odour” (अप्रिय गंध) को भी हटाने का आधार मानती हैं। कनाडा की वेस्टजेट और एयर कनाडा में यह साफ लिखा है। भारत में DGCA के नियमों के तहत दुर्व्यवहार पर 30 दिन तक बैन जैसी कार्रवाई संभव है, लेकिन पाद के लिए कोई अलग कानून नहीं है।
शरीर से निकलने वाली गैस (पाद) पूरी तरह रोकी नहीं जा सकती। यह सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। औसत व्यक्ति दिन में 10-20 बार गैस छोड़ता है। उच्च ऊंचाई पर दबाव कम होने से गैस का आयतन बढ़ जाता है, इसलिए विमान में यह समस्या ज्यादा महसूस होती है। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि पुरुषों और महिलाओं में मात्रा में बड़ा अंतर नहीं, लेकिन महिलाओं की गैस की गंध अक्सर तेज होती है।
नियंत्रण के कुछ तरीके संभव हैं। गैस पैदा करने वाले खाद्य पदार्थ जैसे दाल, गोभी, प्याज, सोडा, दूध उत्पाद कम खाएं। धीरे-धीरे खाएं, ज्यादा हवा निगलने से बचें। नियमित व्यायाम और प्रोबायोटिक्स मदद कर सकते हैं। कुछ लोग सक्रिय चारकोल सप्लीमेंट लेते हैं जो गंध सोखता है। लेकिन विमान में पूरी तरह रोकना मुश्किल है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि जरूरत पड़ने पर छोड़ दें, रोकने से पेट में दर्द हो सकता है। पायलटों को भी कभी-कभी यही सलाह दी जाती है ताकि ध्यान न भटके।
हवाई जहाज में जगह बंद होती है और हवा का एक हिस्सा पुनः चक्रित होता है। इसलिए गंध फैलती है। क्रू अक्सर एयर फ्रेशनर या मास्क का इस्तेमाल करते हैं। अगर यात्री जानबूझकर बार-बार करता है, बहस करता है या मशीन इस्तेमाल करता है तो इसे disruptive behaviour माना जाता है। स्वाभाविक और एक-दो बार की घटना पर आमतौर पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी घटनाएँ दुर्लभ हैं लेकिन सोशल मीडिया के कारण तेजी से फैलती हैं। ज्यादातर मामलों में एयरलाइन सुरक्षा और अन्य यात्रियों के आराम को प्राथमिकता देती है। पायलट और क्रू को प्रशिक्षण दिया जाता है कि कब हस्तक्षेप करें। अगर स्थिति बिगड़ती है तो प्लेन गेट पर लौट सकता है या आपात लैंडिंग हो सकती है।
भारत में भी हवाई यात्रा में दुर्व्यवहार के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन पाद से जुड़े प्रमुख मामले कम हैं। ज्यादातर पेशाब, थूकने या मारपीट जैसे मामलों में कार्रवाई होती है। DGCA और एयरलाइंस यात्री आचार संहिता का पालन करवाती हैं।
शरीर विज्ञान की दृष्टि से पाद एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे शर्मनाक समझने के बजाय समझना चाहिए। लेकिन बंद जगह में दूसरों का ध्यान रखना भी जरूरी है। अगर कोई मेडिकल समस्या है तो डॉक्टर से सलाह लें। यात्रा से पहले हल्का भोजन और पानी ज्यादा पीना फायदेमंद हो सकता है।
इन घटनाओं से साफ है कि खबरें आधारहीन नहीं हैं। अलग-अलग समय और जगह पर ऐसी घटनाएँ हुईं। मुख्य मुद्दा गंध से ज्यादा व्यवहार और व्यवधान था। एयरलाइंस यात्री की सुरक्षा और आराम दोनों देखती हैं। कानून कोई खास “पाद कानून” नहीं बल्कि सामान्य दुर्व्यवहार और अनुबंध के नियम लागू होते हैं।
यात्रियों को सलाह है कि विमान में शांत रहें, दूसरों का ख्याल रखें और किसी समस्या पर क्रू से बात करें। वायरल होने की चाह में नकली उपकरण या जानबूझकर उत्तेजना पैदा करना नुकसानदायक साबित हो सकता है।
हवाई यात्रा में छोटी-छोटी बातें भी बड़ी समस्या बन सकती हैं। पाद जैसी स्वाभाविक प्रक्रिया को लेकर विवाद तब बढ़ता है जब उसके साथ बहस या असभ्य व्यवहार जुड़ जाता है। सही जानकारी और समझदारी से ऐसी स्थितियाँ टाली जा सकती हैं। दुनिया भर की ये घटनाएँ याद दिलाती हैं कि बंद जगह में अनुशासन और सहिष्णुता दोनों जरूरी हैं।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कौन सा कानून लागू होता है?
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में मामला और जटिल हो सकता है। यहां Tokyo Convention 1963 और उसके बाद आया Montréal Protocol 2014 महत्वपूर्ण हैं।
ICAO के अनुसार Montréal Protocol 2014 का उद्देश्य विमान में होने वाले unruly और disruptive passenger incidents से निपटने के लिए कानूनी व्यवस्था मजबूत करना था। यह Protocol 1 जनवरी 2020 को लागू हुआ।
पुरानी व्यवस्था में अक्सर विमान के registration वाले देश का jurisdiction महत्वपूर्ण होता था। इससे ऐसी स्थिति पैदा हो सकती थी कि विमान किसी दूसरे देश में उतर गया लेकिन स्थानीय अधिकारियों के पास कार्रवाई के अधिकार को लेकर समस्या हो।
Montréal Protocol ने कुछ परिस्थितियों में landing state और state of operator को भी jurisdiction देने की व्यवस्था मजबूत की।
इसलिए अंतरराष्ट्रीय उड़ान में किसी यात्री की कार्रवाई पर कौन सा कानून लागू होगा, इसका जवाब केवल “जिस देश से विमान उड़ा” या “जहां विमान उतरा” से नहीं दिया जा सकता।
यह aircraft registration, operator, route, landing location और संबंधित देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू किए जाने जैसे कई पहलुओं पर निर्भर करता है।
लेकिन इंसान पाद को रोक कैसे सकता है?
यह सवाल शायद इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है। क्या कोई व्यक्ति अपने शरीर से निकलने वाली गैस को हमेशा रोक सकता है?
नहीं।
पाद यानी flatulence शरीर की सामान्य प्रक्रिया है। हमारे पाचन तंत्र में गैस बनती है और वह शरीर से बाहर निकलती है। अमेरिकी National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases यानी NIDDK के अनुसार गैस निगली गई हवा तथा बड़ी आंत में बैक्टीरिया द्वारा अपचित carbohydrates को तोड़ने से बन सकती है।
NIDDK के अनुसार लोग औसतन दिन में करीब 8 से 14 बार गैस पास कर सकते हैं और दिन में 25 बार तक भी गैस निकलना सामान्य सीमा में माना जा सकता है।
इसलिए विमान में बैठे किसी यात्री को अचानक गैस निकल जाना अपने आप में असामान्य घटना नहीं है।
ब्रिटेन की NHS भी flatulence को सामान्य शारीरिक प्रक्रिया मानती है और कहती है कि हर व्यक्ति गैस पास करता है।
कुछ लोग गैस को थोड़ी देर रोक सकते हैं क्योंकि मलद्वार के आसपास की मांसपेशियां गैस को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। Cambridge University Hospitals की जानकारी के अनुसार bowel-control exercises से इन मांसपेशियों को मजबूत किया जा सकता है और गैस को रोकने की क्षमता कुछ लोगों में बेहतर हो सकती है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति हर समय गैस रोक सकता है।
कुछ लोगों में गैस अचानक और अनैच्छिक रूप से निकल सकती है। पाचन संबंधी बीमारी, IBS, कब्ज, lactose intolerance या अन्य स्थितियां गैस की समस्या बढ़ा सकती हैं।
इसीलिए किसी यात्री को सिर्फ इसलिए दोषी मानना कि उसके शरीर से अनैच्छिक रूप से गैस निकल गई, चिकित्सा विज्ञान और सामान्य मानवीय व्यवहार दोनों के लिहाज से उचित नहीं होगा।
विमान में गैस ज्यादा महसूस क्यों हो सकती है?
हवाई जहाज में लंबे समय तक बैठे रहने, सीमित जगह और भोजन के कारण कुछ लोगों को पेट फूलने या गैस की समस्या ज्यादा महसूस हो सकती है।
गैस बनने के प्रमुख कारणों में जल्दी-जल्दी खाना, fizzy drinks, chewing gum, कुछ carbohydrates और कुछ ऐसे भोजन शामिल हैं जिन्हें छोटी आंत पूरी तरह पचा नहीं पाती। बड़ी आंत के bacteria इन्हें तोड़ते समय गैस बनाते हैं।
इसलिए उड़ान से पहले बहुत अधिक carbonated drinks, beans, कुछ vegetables या ऐसे खाद्य पदार्थ खाने से जिनसे व्यक्ति को सामान्य तौर पर गैस बनती है, समस्या बढ़ सकती है।
NHS भी गैस की समस्या कम करने के लिए छोटे meals, धीरे-धीरे खाना और कुछ gas-producing foods को सीमित करने की सलाह देता है।
क्या गैस रोकना हमेशा सुरक्षित है?
कभी-कभी थोड़ी देर गैस रोक लेना सामान्य रूप से संभव है, लेकिन इसे लंबे समय तक जबरदस्ती रोकना किसी व्यक्ति के लिए आरामदायक नहीं हो सकता।
अगर किसी व्यक्ति को लगातार बहुत अधिक गैस, पेट दर्द, पेट फूलना, कब्ज, दस्त या वजन कम होने जैसी समस्या हो रही है, तो उसे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। NIDDK और NHS दोनों ऐसे लक्षणों के साथ चिकित्सकीय सलाह लेने की बात कहते हैं।
इसलिए विमान यात्रा के दौरान अगर किसी व्यक्ति को गैस की समस्या रहती है, तो उड़ान से पहले हल्का भोजन करना, धीरे खाना, fizzy drinks कम करना और अपने शरीर की सामान्य जरूरतों का ध्यान रखना ज्यादा व्यावहारिक तरीका है।
तो आखिर वायरल खबर का सच क्या है?
पूरी जांच के बाद निष्कर्ष यह है कि “सिर्फ पादने पर यात्री को हवाई यात्रा से हमेशा के लिए रोक दिया जाता है” कहना गलत है।
2018 की Transavia घटना में गैस छोड़ने की शिकायत के बाद विवाद और लड़ाई हुई थी। विमान वियना में उतरा और चार यात्रियों को उतारा गया, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार गैस छोड़ने वाला व्यक्ति उनमें शामिल नहीं था।
2024 की American Airlines घटना में Phoenix से Austin जा रही उड़ान वापस गेट पर आई और संबंधित यात्री को विमान से उतारा गया। लेकिन बाद में एयरलाइन प्रतिनिधि ने बताया कि उसे केवल farting के कारण नहीं हटाया गया था; कथित disruptive behavior और profanity भी मामले का हिस्सा थे।
इसलिए headline को “पादने पर यात्री को विमान से उतारा” कहना आकर्षक जरूर है, लेकिन पूरी तरह सटीक नहीं।
सही पत्रकारिता यह होगी कि कहा जाए—विमान में गैस छोड़ने को लेकर दो चर्चित घटनाएं सामने आईं, लेकिन दोनों मामलों में कार्रवाई का वास्तविक आधार केवल गैस छोड़ना नहीं था।
एक मामले में गैस को लेकर विवाद लड़ाई में बदल गया था और दूसरे मामले में गैस छोड़ने के साथ कथित अशोभनीय और disruptive व्यवहार भी सामने आया था।
अंतरराष्ट्रीय विमानन कानून एयरलाइनों और पायलटों को सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त अधिकार देता है। लेकिन सामान्य शारीरिक क्रिया को अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता।
इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण सबक यही है कि विमान में शिष्ट व्यवहार जरूरी है, लेकिन इंसानी शरीर की सामान्य जैविक प्रक्रियाओं को अपराध बताना भी सही नहीं है।
यात्री को जानबूझकर दूसरों को परेशान नहीं करना चाहिए, चालक दल के निर्देशों का पालन करना चाहिए और विवाद से बचना चाहिए। दूसरी तरफ, एयरलाइन की कार्रवाई भी वास्तविक व्यवहार, सुरक्षा, स्वास्थ्य और लागू नियमों के आधार पर होनी चाहिए।
इसलिए अगर कहीं यह दावा वायरल हो कि “पाद मारने के कारण दुनिया में किसी यात्री पर हवाई यात्रा का प्रतिबंध लग गया”, तो उसे बिना संदर्भ के प्रकाशित करना सही नहीं होगा। उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों से इतना जरूर साबित होता है कि flatulence से जुड़े विवादों के कारण उड़ानें प्रभावित हुई हैं और यात्रियों को हटाया गया है, लेकिन कार्रवाई का कानूनी आधार आम तौर पर disruptive behavior, safety, order या अन्य लागू शर्तें होती हैं—सिर्फ शरीर से गैस निकलना नहीं।