अखिलेश यादव छह सितंबर से सहारनपुर से करेंगे चुनाव अभियान का आगाज, चौ. रूद्रसेन तैयारियों में जुटे

सहारनपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ताबड़तोड़ दौरों के जवाब में समाजवादी पार्टी चुनाव अभियान की शुरुआत करने जा रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव छह सितंबर को सहारनपुर से अपने चुनाव अभियान का आगाज एक विशाल रैली के साथ करेंगे। इस रैली को लेकर राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र सिंघल ने जानकारी दी है कि यह रैली पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक बड़ा संदेश देगी।
रैली की तैयारियां और चौधरी रूद्रसेन की भूमिका
इस रैली के संयोजक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी रूद्रसेन बनाए गए हैं। चौधरी रूद्रसेन का कहना है कि समाजवादी पार्टी सहारनपुर में एक अत्यंत विशाल और ऐतिहासिक जनसभा का आयोजन करने की तैयारियों में जुटी है। समाजवादी पार्टी की योजना सहारनपुर नगर में दिल्ली रोड पर ऐसे मैदान पर सभा आयोजित करने की है, जिसमें एक लाख से अधिक भीड़ आसानी से जुट सके। चौधरी रूद्रसेन के पिता चौधरी यशपाल सिंह सहारनपुर से सांसद और उत्तर प्रदेश सरकार में कई बार काबिना मंत्री रहे हैं। चौधरी यशपाल सिंह बड़ी रैलियों को कराने के लिए अपनी एक अलग पहचान रखते थे। उनके दोनों बेटे चौधरी रूद्रसेन और चौधरी इंद्रसेन पूर्व में अखिलेश यादव की दो यादगार बड़ी सभाओं का सफल आयोजन करा चुके हैं। उन्होंने पहली सभा 10 अक्टूबर 2017 को अपने गृह क्षेत्र तीतरों में कराई थी और फिर छह सितंबर को तीन साल बाद अखिलेश यादव की ऐतिहासिक रैली कराई थी।
सहारनपुर का राजनीतिक समीकरण और जातीय आंकड़े
सहारनपुर जिले में वर्तमान में समाजवादी पार्टी के दो विधायक आशु मलिक और उमर अली खान हैं। इसके अलावा सहारनपुर से एक सांसद इकरा हसन हैं और सपा-कांग्रेस गठबंधन की बात करें तो इमरान मसूद लोकसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करते हैं। सहारनपुर में 42 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, जबकि 22 प्रतिशत आबादी दलितों की है। हिंदुओं में सबसे बड़ा तबका गुर्जर बिरादरी का है और उसके बाद सैनी बिरादरी का अपना दबदबा है। समाजवादी पार्टी में दलितों के रूप में जिला पंचायत सदस्य ममता चौधरी और मायावती सरकार में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री विनोद तेजयान एडवोकेट अपनी मजबूत उपस्थिति रखते हैं। सैनी बिरादरी के तमाम बड़े नेता या राज्यमंत्री जसवंत सैनी, पूर्व काबिना मंत्री डॉ. धर्म सिंह सैनी और अखिलेश यादव सरकार में काबिना मंत्री रहे साहब सिंह सैनी भाजपा में पिछड़े वर्ग की मजबूत नुमाइंदगी करते हैं। हालांकि, हिंदू गुर्जर बिरादरी में चौधरी यशपाल सिंह जितनी लोकप्रियता और जनाधार रखने वाला कोई भी नेता भाजपा में मौजूद नहीं है।
लोकसभा चुनाव के बाद का राजनीतिक परिदृश्य
लोकसभा चुनाव के दौरान राजपूतों से हुई सियासी तनातनी के कारण गुर्जरों का भारी समर्थन भारतीय जनता पार्टी को मिला था। हालांकि, भाजपा नेतृत्व ने बड़े राजपूत नेता सुरेश राणा को प्रदेश उपाध्यक्ष और सहारनपुर के युवा राजपूत नेता अजीत सिंह राणा को जिलाध्यक्ष बनाकर इस नुकसान की भरपाई करने का प्रयास किया है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर सपा-कांग्रेस गठबंधन भाजपा पर बहुत भारी दिखाई देता है। मुसलमानों के दूसरे बड़े नेता और पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान कुरैशी भी समाजवादी पार्टी की एक बहुत बड़ी ताकत हैं। इन सभी महत्वपूर्ण कारणों के चलते अखिलेश यादव की छह सितंबर की होने वाली इस रैली पर सपा-कांग्रेस सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की खास निगाहें टिकी रहेंगी और इसी रैली से जनता के ताजे राजनीतिक रुझान का भी सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा।