अम्बाला के बराड़ा में सफाईकर्मी और ठेकेदार के विवाद से शहरवासी परेशान, लगे गंदगी के ढेर

बराड़ा और अम्बाला में ठेकेदार और सफाईकर्मियों के विवाद का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। कई महीने से बराड़ा कूड़े के ढेर पर बैठा है और मुख्य बाजार तथा मोहल्लों में गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। ठेकेदार से खफा होकर डोर टू डोर सफाई कर्मचारी बार-बार हड़ताल पर चले जाते हैं, जिससे पूरे शहर में सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। वेतन में देरी के कारण सफाईकर्मी कई महीने से आंदोलन कर रहे हैं और गंदगी के कारण शहरवासी परेशान हैं, जिसके चलते वार्ड पार्षदों को अपने स्तर पर सफाई कार्य करवाने पड़ते हैं।
बीते दो दिन से सफाईकर्मी नगरपालिका में हड़ताल पर बैठे हैं। बृहस्पतिवार को जब ठेकेदार उनके बीच पहुंचे तो मामला काफी गर्मा गया और इस दौरान चेयरमैन रजत मलिक तथा सचिव मोहित सैनी भी मौके पर पहुंचे। चेयरमैन ने ठेकेदार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि उन्हें कोई विवाद नहीं चाहिए और शहर का सफाई कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए अन्यथा उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। चेयरमैन ने कहा कि कई महीने से बराड़ा को गंदगी के ढेर पर बैठा दिया गया है जो बर्दाश्त नहीं होगा। साथ ही सफाई कर्मचारियों से भी कहा गया कि उनकी हड़ताल के कारण सफाई कार्य प्रभावित हो रहे हैं जो सही नहीं है। चेयरमैन ने ठेकेदार को दो टूक कहा कि चाहे कर्मचारी हड़ताल पर हों या कोई अन्य वजह, शहर में कहीं भी गंदगी नजर नहीं आनी चाहिए और वह चाहे कहीं से भी दिहाड़ी पर कर्मचारी लेकर आएं।
डोर टू डोर सफाई ठेकेदार अभिषेक के अनुसार उनके पास कुल 25 कर्मचारी काम कर रहे हैं जिसमें 20 सफाई कार्य देख रहे हैं। जून माह का वेतन जो जुलाई में आना था उसमें कुछ देरी हो गई जिस पर कर्मचारियों ने वेतन की मांग की। अभिषेक ने सभी कर्मचारियों को 3500-3500 रुपए नकद दिए और कहा कि सैलरी आने पर वापस कर देना। नकद पैसे देने के कुछ दिन बाद पिछले महीने उनका वेतन बैंक खाते में आ गया जिसके बावजूद सफाईकर्मी तीन दिन पहले फिर हड़ताल पर बैठ गए। चेयरमैन के सामने अकाउंट का हिसाब करने पर पांच कर्मचारियों के पैसे ठेकेदार की तरफ निकले जबकि 15 कर्मचारियों पर ज्यादा पैसे निकले। अभिषेक का कहना है कि यदि सफाईकर्मी काम पर नहीं जाते तो वह अन्य कर्मचारियों का इंतजाम कर सफाई कार्य करवाएंगे।
बराड़ा डोर टू डोर सफाईकर्मचारी यूनियन प्रधान संजीव कुमार का कहना है कि हर माह वेतन में कटौती की जाती है और पिछले महीने वेतन न आने के कारण वे हड़ताल पर बैठे। करीब दो महीने हड़ताल पर रहने के बाद उन्हें केवल 3500-3500 रुपए नकद दिए गए। उनकी मांग है कि वेतन समय पर बिना कटौती के दिया जाए और उनके वेतन में वृद्धि करते हुए न्यूनतम वेतन लागू किया जाए क्योंकि पिछले टेंडर में उनका वेतन ज्यादा था जबकि इस बार कम दिया गया है।