अंबाला के धनौरी में गोगामेड़ी का चमत्कार: घर में हुईं 7 मौतें और 20 साल तक नहीं हुआ बेटा, फिर शादी के 24 साल बाद मिला सुख और बना भव्य मंदिर

Team Atal Hind7 August 20263 min read27 viewsअम्बाला
अंबाला के धनौरी में गोगामेड़ी का चमत्कार: घर में हुईं 7 मौतें और 20 साल तक नहीं हुआ बेटा, फिर शादी के 24 साल बाद मिला सुख और बना भव्य मंदिर

घर में हुईं 7 मौतें, 20 साल तक नहीं हुआ बेटा... फिर बना दी बागड़ जैसी गोगामेड़ी
अम्बाला के धनौरी में 11 लाख का चंदन दरवाजा, शादी के 24 साल बाद हुआ बेटा

अंबाला जिले के गांव धनौरी में मुख्य सेवादार कुलदीप सिंह की कहानी आस्था का बड़ा प्रमाण है। एक समय था जब उनके परिवार में लगातार मौतें हो रही थीं, कारोबार डूब रहा था और 20 साल तक घर में कोई बेटा नहीं हुआ। तंग आकर उन्होंने गोगाजी महाराज की शरण ली। आज उसी आस्था ने उनके घर को खुशहाली दी और गांव में बागड़ धाम जैसी भव्य गोगामेड़ी बनवा दी। दुनियाभर में प्रसिद्ध राजस्थान स्थित श्री गोगाजी धाम जैसी हूबहू गोगामेड़ी को देखने दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां लगाया गया चंदन का दरवाजा भी लोगों के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। गोगामेड़ी में नवग्रह, अस्तबली पीर के अलावा सभी देवी देवताओं और संतों की मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर में नशा करके आना वर्जित है।

पूर्वजों का इतिहास और परिवार पर आया संकट

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कुलदीप सिंह बताते हैं कि उनके पूर्वज 1630 में आकर धनौरी गांव में बसे थे। घर में शुरू से ही गोगाजी महाराज का निशान लगता था। उनके पिताजी कई वर्षों तक गांव के सरपंच भी रहे। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अचानक किस्मत ने पलटा खाया। कुलदीप सिंह चार भाई थे। दुर्भाग्य से तीन भाइयों की मौत हो गई और वह अकेले रह गए। इसके बाद परिवार में कुल 7 मौतें हो गईं। व्यापार में भारी नुकसान हुआ। सबसे बड़ी पीड़ा यह थी कि 20 साल तक परिवार में कोई बेटा पैदा नहीं हुआ। हर तरफ निराशा का माहौल था। परेशान होकर कुलदीप सिंह कई बाबाओं के पास गए। एक बाबा ने कहा कि पीर बाबा की मजार बनवाओ। मजार बनाई गई, लेकिन हालात नहीं सुधरे। फिर किसी ने सलाह दी कि यहां गोगामेड़ी का निर्माण करवाओ। इसके बाद कुलदीप सिंह राजस्थान के बागड़ धाम से 4 ईंटें लेकर आए और उन्हें अपने खेतों में रख दिया। लेकिन तब भी राहत नहीं मिली। आखिरकार वह पंजाब के कामी स्थित गोगामेड़ी पहुंचे। वहां के सेवादार ने उन्हें कहा कि सच्चे मन से गोगाजी की पूजा करो और गांव में गोगामेड़ी बनवाओ।

भव्य गोगामेड़ी का निर्माण और 11 लाख का चंदन दरवाजा

कुलदीप सिंह ने परिवार सहित गोगाजी महाराज की पूजा शुरू की और उनके मन में आया कि वह बागड़ जैसी ही यहां गोगामेड़ी बनवाएंगे। इसके लिए वह अपने साथ दो मिस्त्रियों को लेकर बागड़ गए और वहां का डिजाइन दिखाया। इसके बाद मिस्त्रियों ने हूबहू बागड़ जैसी विशाल एवं भव्य गोगामेड़ी तैयार कर दी। कुलदीप सिंह ने बताया कि कामी दरबार के सेवादार ने उन्हें कहा कि गोगामेड़ी में पूर्व दिशा में दीवार हटाकर वहां चंदन का दरवाजा लगाओ, जहां गोगाजी स्वयं चमत्कार दिखाएंगे। इसके बाद पिछले वर्ष दीवार को तुड़वाकर यहां 11 लाख रुपये का चंदन का दरवाजा लगवाया गया है। आज यह मंदिर बागड़ धाम की तरह भव्य दिखता है।

शादी के 24 साल बाद हुआ बेटा और बदली तकदीर

गोगामेड़ी बनने के बाद कुलदीप सिंह के परिवार की तकदीर बदल गई। पूजा शुरू करने के बाद उनके भतीजे के घर करीब 20 साल बाद बेटे का जन्म हुआ। वहीं खुद कुलदीप सिंह के घर भी संतान नहीं थी। शादी के 24 साल बाद उनकी पत्नी ने बेटे को जन्म दिया। कुलदीप सिंह भावुक होकर कहते हैं, गोगाजी महाराज की कृपा से जो करोड़ों का घाटा हुआ था वह भी पूरा हो गया। अब हमारा परिवार सुखी है और दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। दोसडक़ा-साढौरा रोड स्थित बराड़ा उपमंडल के गांव धनौरी की यह गोगामेड़ी क्षेत्र में आस्था का बड़ा केंद्र बन चुकी है। हर महीने और पर्वों पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। लोगों का मानना है कि यहां माथा टेकने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कुलदीप सिंह के अनुसार अगले माह 18 सितंबर से 20 सितंबर तक तीन दिवसीय भव्य कार्यक्रम होगा।

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