अम्बाला के धनौरी में गोगामेड़ी का चमत्कार, घर में हुईं 7 मौतें और 20 साल तक नहीं हुआ बेटा, फिर ऐसे बदली किस्मत

अम्बाला जिले के गांव धनौरी में मुख्य सेवादार कुलदीप सिंह के परिवार में एक समय लगातार मौतें हो रही थीं, कारोबार डूब रहा था और 20 साल तक घर में कोई बेटा नहीं हुआ। तंग आकर उन्होंने गोगाजी महाराज की शरण ली जिसके बाद उनके घर खुशहाली आई और गांव में बागड़ धाम जैसी भव्य गोगामेड़ी बनवाई गई। अम्बाला के धनौरी में 11 लाख का चंदन दरवाजा लगवाया गया है और शादी के 24 साल बाद बेटा हुआ है। दुनियाभर में प्रसिद्ध राजस्थान स्थित श्री गोगाजीधाम जैसी हूबहू गोगामेड़ी को देखने दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
गोगाजी महाराज की शरण में जाने के बाद कैसे बदली कुलदीप सिंह के परिवार की किस्मत
कुलदीप सिंह बताते हैं कि उनके पूर्वज 1630 में आकर धनौरी गांव में बसे थे और उनके पिताजी कई वर्षों तक गांव के सरपंच रहे। दुर्भाग्य से उनके तीन भाइयों की मौत हो गई और परिवार में कुल 7 मौतें हो गईं, व्यापार में भारी नुकसान हुआ और 20 साल तक परिवार में कोई बेटा पैदा नहीं हुआ। परेशान होकर कुलदीप सिंह कई बाबाओं के पास गए और आखिरकार पंजाब के कामी स्थित गोगामेड़ी पहुंचे जहां के सेवादार ने उन्हें सच्चे मन से गोगाजी की पूजा करने को कहा। इसके बाद उन्होंने राजस्थान के बागड़ धाम से प्रेरणा लेकर गांव में हूबहू वैसी ही विशाल एवं भव्य गोगामेड़ी तैयार करवा दी।
भव्य गोगामेड़ी का निर्माण और 11 लाख रुपये का चंदन दरवाजा बना आकर्षण का केंद्र
कुलदीप सिंह ने बागड़ से मिस्त्रियों को बुलाकर हूबहू वैसी ही गोगामेड़ी बनवाई और कामी दरबार के सेवादार की सलाह पर पूर्व दिशा की दीवार हटाकर वहां 11 लाख रुपये का चंदन का दरवाजा लगवाया। गोगामेड़ी बनने के बाद उनके भतीजे के घर करीब 20 साल बाद बेटे का जन्म हुआ और खुद कुलदीप सिंह की पत्नी ने शादी के 24 साल बाद बेटे को जन्म दिया। गोगाजी महाराज की कृपा से उनका करोड़ों का घाटा पूरा हो गया और अब उनका परिवार सुखी है तथा दोसडक़ा-साढौरा रोड स्थित बराड़ा उपमंडल के गांव धनौरी की यह गोगामेड़ी क्षेत्र में आस्था का बड़ा केंद्र बन चुकी है जहां अगले माह 18 सितंबर से 20 सितंबर तक तीन दिवसीय भव्य कार्यक्रम होगा।