अंबाला में पंजोखरा साहिब विवाद को लेकर प्रदर्शनकारी सिख समुदाय पर पर पुलिस का लाठीचार्ज,जगदीश सिंह झींडा घायल

Atal Hind Team Online13 August 202614 min read48 viewsअम्बाला
अंबाला में पंजोखरा साहिब विवाद को लेकर प्रदर्शनकारी सिख समुदाय पर  पर पुलिस का लाठीचार्ज,जगदीश सिंह झींडा घायल

अंबाला-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर खूनी संघर्ष की पूरी कहानी

अम्बाला /13 अगस्त 2026 /पूर्ण सिंह /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

अंबाला में गुरुवार को स्थिति उस समय अत्यधिक तनावपूर्ण और भयावह हो गई, जब अंबाला-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (जीटी रोड) पर घंटों से चल रहा विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक झड़प में बदल गया। लगभग सात घंटे लंबे चक्का जाम को खुलवाने पहुंची हरियाणा पुलिस की टीम पर प्रदर्शनकारियों के बीच मौजूद उपद्रवियों ने धारदार और जानलेवा हथियारों से अचानक हमला बोल दिया। इस अचानक हुए बर्बर हमले में अंबाला के डीएसपी क्राइम वीरेंदर गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका एक हाथ बुरी तरह कट गया। इस भयावह हमले में डीएसपी के अलावा पांच से छह अन्य पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं, जिन्हें आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया है। दूसरी ओर, पुलिस की जवाबी कार्रवाई के दौरान कई प्रदर्शनकारी और किसान भी चोटिल हुए हैं।

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अंबाला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अजीत सिंह शेखावत ने पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर लगे इस भीषण जाम के कारण उत्तर भारत का सड़क संपर्क पूरी तरह ठप हो गया था। पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जाने वाले हजारों वाहन और लाखों यात्री चिलचिलाती धूप व सड़क पर असहाय फंसे हुए थे। स्थिति को सामान्य बनाने और आवागमन बहाल करने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन की भारी नफरी मौके पर पहुंची थी। पुलिस अधिकारियों ने शुरुआत में काफी संयम दिखाया और प्रदर्शनकारियों के नेतृत्वकर्ताओं के साथ कई दौर की बातचीत की, ताकि समस्या का कोई शांतिपूर्ण और सर्वमान्य हल निकल सके। हालांकि, भीड़ में मौजूद कुछ शरारती और असामाजिक तत्वों का मकसद बातचीत से रास्ता खोलना बिल्कुल नहीं था।

जैसे ही सूरज ढलने लगा और हाईवे पर अंधेरा छाने लगा, प्रदर्शनकारियों के बीच छिपे उपद्रवियों ने अपने खतरनाक इरादे जाहिर कर दिए। उन्होंने पहले से छिपाकर रखे गए धारदार हथियारों, जैसे भालों, फरसों, तलवारों, लोहे की रॉड और कुल्हाड़ियों से डयूटी पर तैनात पुलिस बल पर जानलेवा हमला कर दिया। हमला इतनी तेजी और अप्रत्याशित तरीके से किया गया कि पुलिस कर्मियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। डीएसपी वीरेंदर, जो अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे, सीधे इस हमले की जद में आ गए और उनका हाथ बुरी तरह कट गया।

  • पंजोखरा साहिब घटना: विवाद की शुरुआत और पूरा घटनाक्रम

इस पूरे देशव्यापी विवाद की शुरुआत बीते सात अगस्त 2026 को ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब में घटी एक घटना से हुई थी। इंटरनेशनल एंटी खालिस्तान टेरेरिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष और चर्चित खालिस्तान विरोधी सिख नेता गुरसिमरन सिंह मंड अंबाला छावनी स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा पंजोखरा साहिब के दर्शन करने पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों और दर्ज शिकायतों के अनुसार, गुरुद्वारा परिसर की पार्किंग में गाड़ी खड़ी करने को लेकर स्थानीय लोगों, सेवादारों और मंड के सुरक्षाकर्मियों के बीच मामूली कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते काफी बढ़ गई।

गुरसिमरन सिंह मंड ने आरोप लगाया कि जब वे गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेकने जा रहे थे, तभी वहां मौजूद कुछ निहंगों और स्थानीय युवाओं ने उन्हें रोक लिया। मंड के मुताबिक, उन पर लाठियों, डंडों और तेजधार हथियारों से अचानक हमला कर दिया गया। जान बचाने के लिए जब वे मौके से भागने लगे, तो उग्र भीड़ ने उन्हें घेर लिया और उनकी बुरी तरह पिटाई कर दी। इस मारपीट के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिनमें कुछ युवक मंड को लाठियों से पीटते हुए और दौड़ाते हुए दिखाई दे रहे थे।

दूसरी ओर, पंजोखरा साहिब गुरुद्वारा प्रबंधन समिति और स्थानीय सिख संगत ने गुरसिमरन सिंह मंड के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। गुरुद्वारा समिति का पक्ष था कि मंड के चालकों ने गुरुद्वारा परिसर में बेहद लापरवाही और तेज रफ्तार से गाड़ी चलाई, जिससे वहां मौजूद कई सिख श्रद्धालु और संगत चोटिल हो गए। संगत के विरोध जताने पर मंड के सुरक्षाकर्मियों ने दबंगई दिखाने की कोशिश की, जिससे माहौल गरमा गया। हालांकि, घटना के बाद पंजोखरा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुरसिमरन सिंह मंड की शिकायत पर सिख समाज के कुछ युवाओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली और दो युवाओं को हिरासत में ले लिया।

घटनाक्रम का विवरण

समय / तिथि स्थान / क्षेत्र मुख्य घटना / बिंदु प्रभाव व स्थिति
07 अगस्त 2026 गुरुद्वारा पंजोखरा साहिब, अंबाला गुरसिमरन सिंह मंड और स्थानीय संगत/निहंगों के बीच झड़प और मारपीट। वीडियो वायरल, पंजोखरा थाना पुलिस द्वारा सिख युवाओं पर FIR दर्ज।
12 अगस्त, 10:00 AM पंजोखरा साहिब गुरुद्वारा परिसर सिख संगत की आकस्मिक बैठक। एचएसजीएमसी प्रधान जगदीश सिंह झींडा उपस्थित। पुलिस की एकतरफा कार्रवाई का आरोप, जीटी रोड जाम करने का निर्णय।
12 अगस्त, 12:00 PM गुरुद्वारा मार्ग से एनसीसी स्कूल तक सिख समाज के लोगों का मार्च। पुलिस के प्रथम व द्वितीय बैरिकेड्स तोड़े गए। पुलिस ने आंसू गैस के 4-5 गोले छोड़े, भीड़ बेकाबू होकर आगे बढ़ी।
12 अगस्त, 01:00 PM बलदेव नगर / एनसीसी स्कूल के पास तीसरा बैरिकेड तोड़ा गया। झींडा चोटिल। जीटी रोड दोनों तरफ से पूरी तरह बंद। ट्रैक्टरों व कंटेनरों से हाईवे ब्लॉक। हजारों वाहन और स्कूली बच्चे फंसे।
12 अगस्त, 04:00 PM अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे जाम स्थल आईजी पंकज नैन व एसपी अजीत सिंह शेखावत मौके पर पहुंचे, झींडा से वार्ता की। प्रदर्शनकारी मंड पर FIR और युवाओं की रिहाई की मांग पर अड़े रहे। वार्ता विफल।
12 अगस्त, 07:00 PM अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे अंधेरा होते ही उपद्रवियों ने पुलिस पर धारदार हथियारों (फरसे, भालों) से हमला किया। DSP क्राइम वीरेंदर का हाथ कटा, 6 पुलिसकर्मी घायल। गैस टैंकर की चाबी छीनी।
12 अगस्त, 08:00 PM अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पुलिस बल द्वारा भारी लाठीचार्ज और आंसू गैस की कार्रवाई। हाईवे खाली कराया गया। 7 घंटे बाद आवागमन बहाल, घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

एकतरफा कार्रवाई का आरोप और जीटी रोड जाम की पूरी योजना

पंजोखरा थाने में सिख युवाओं के खिलाफ मामला दर्ज होने और दो लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद सिख समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया। सिख संगत का स्पष्ट आरोप था कि पुलिस प्रशासन पूरी तरह एकतरफा कार्रवाई कर रहा है। संगत के प्रतिनिधियों का कहना था कि उन्होंने भी पंजोखरा थाने में गुरसिमरन सिंह मंड के खिलाफ लिखित शिकायत दी थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मंड और उनके सुरक्षाकर्मियों ने गुरुद्वारा परिसर की मर्यादा भंग की और तेज रफ्तार गाड़ी से श्रद्धालुओं को चोटिल किया। लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की और केवल सिख युवाओं को निशाना बनाया।

इसी एकतरफा कार्रवाई के विरोध में वीरवार सुबह गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब में एक आपातकालीन महापंचायत बुलाई गई। इस बैठक में हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (HSGMC) के पूर्व प्रधान जगदीश सिंह झींडा सहित कई वरिष्ठ सिख नेताओं, स्थानीय गुरुद्वारा कमेटियों के सदस्यों और बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया। बैठक में पुलिस प्रशासन के रवैये पर कड़ा विरोध जताया गया और अंततः सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक पुलिस उनकी मांगें नहीं मानती, तब तक अंबाला-चंडीगढ़ जीटी रोड को अनिश्चितकाल के लिए जाम किया जाएगा।

बैठक समाप्त होते ही सैकड़ों की संख्या में सिख समाज के लोग हाथ में झंडे और तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए गुरुद्वारे से बाहर निकले और जीटी रोड की तरफ बढ़ने लगे। पुलिस प्रशासन को इस प्रदर्शन की पूर्व भनक थी, इसलिए पुलिस ने गुरुद्वारे से निकलने वाले मुख्य रास्ते पर भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। हालांकि, उग्र भीड़ को रोकने में शुरुआती पुलिस इंतजाम पूरी तरह नाकाफी साबित हुए।

तीन स्तरों की बैरिकेडिंग, आंसू गैस के गोले और पुलिस से सीधी भिड़ंत

प्रदर्शनकारियों को मुख्य हाईवे तक पहुंचने से रोकने के लिए अंबाला पुलिस ने तीन अलग-अलग स्थानों पर मजबूत बैरिकेड्स लगाए थे। जब भीड़ पहले बैरिकेड के पास पहुंची, तो पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोककर बातचीत करने का प्रयास किया। लेकिन आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की चेतावनियों को अनसुना करते हुए पहले बैरिकेड को उखाड़ फेंका और आगे बढ़ गए। इसके बाद पुलिस ने दूसरे बैरिकेड पर प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस के चार से पांच गोले दागे। आंसू गैस के धुएं के बावजूद भीड़ का हौसला कम नहीं हुआ और उन्होंने दूसरे बैरिकेड को भी धक्का देकर तोड़ दिया।

इसके बाद बलदेव नगर के पास एनसीसी स्कूल के सामने तीसरे और अंतिम बैरिकेड पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने भारी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और कंटेनरों की मदद से पुलिस बैरिकेड्स को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस धक्का-मुक्की और रस्साकशी के दौरान हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के नेता जगदीश सिंह झींडा की कोहनी में लोहे के बैरिकेड का एक हिस्सा लग गया, जिससे वे चोटिल हो गए। नेता के चोटिल होते ही भीड़ का गुस्सा और बढ़ गया और दोपहर ठीक एक बजे प्रदर्शनकारियों ने अंबाला-चंडीगढ़ जीटी रोड के दोनों ओर के रास्तों पर ट्रैक्टर, ट्रालियां और बड़े कंटेनर आड़े-तिरछे खड़े करके राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह सील कर दिया।

सात घंटे की नाकेबंदी: एंबुलेंस, स्कूली बसें और आम जनता की परेशानी

दोपहर एक बजे जैसे ही जीटी रोड पर जाम लगा, वैसे ही अंबाला से चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की ओर जाने वाले तमाम छोटे-बड़े वाहनों के पहिए थम गए। देखते ही देखते हाईवे पर दोनों ओर कई किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लग गईं। इस नाकेबंदी के कारण सबसे अधिक कठिनाई उन मासूम स्कूली बच्चों को उठानी पड़ी, जो दोपहर में स्कूलों की छुट्टी के बाद बसों से अपने घर लौट रहे थे। भीषण गर्मी और कड़े पहरे के बीच दर्जनों स्कूली बसें जाम में फंस गईं, जिससे बच्चों और उनके परिजनों में भारी घबराहट फैल गई।

इतना ही नहीं, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका भयावह असर पड़ा। चंडीगढ़ पीजीआई और अंबाला सिविल अस्पताल जाने वाली कई एंबुलेंस सायरन बजाती रहीं, लेकिन सड़क पर आड़े-तिरछे खड़े कंटेनरों और भीड़ के कारण उन्हें रास्ता नहीं मिल सका। कई घंटों तक एंबुलेंस में मरीज तड़पते रहे। सामान्य यात्रियों की हालत बेहद दयनीय हो गई; बसों और गाड़ियों में सवार महिला यात्रियों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को पीने के पानी तक के लिए तरसना पड़ा। कोई अन्य विकल्प न पाकर सैकड़ों यात्री भीषण गर्मी में अपने भारी-भरकम सामान के साथ कई किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर हुए। स्थानीय स्तर पर सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह ठप हो जाने से हरियाणा का उत्तरी राज्यों से संपर्क लगभग पूरी तरह कट गया।

उच्च अधिकारियों की मध्यस्थता प्रयास और प्रदर्शनकारियों की दो अड़ी मांगें

हाईवे पूरी तरह ठप होने और हजारों आम नागरिकों के फंसे होने की सूचना मिलते ही अंबाला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अजीत सिंह शेखावत और पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) पंकज नैन भारी पुलिस बल के साथ खुद मौके पर पहुंचे। उच्च अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बेहद शांतचित्त होकर मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों के मुख्य नेता जगदीश सिंह झींडा व अन्य वरिष्ठ सदस्यों से बातचीत की मेज पर आने का आग्रह किया।

वार्ता के दौरान प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस प्रशासन के समक्ष स्पष्ट रूप से दो प्रमुख शर्तें रखीं:

पहली मांग: इंटरनेशनल एंटी खालिस्तान टेरेरिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष गुरसिमरन सिंह मंड के खिलाफ पंजोखरा साहिब गुरुद्वारा परिसर में माहौल खराब करने और श्रद्धालुओं को चोटिल करने के आरोप में तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।

दूसरी मांग: पंजोखरा थाने की पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सिख युवाओं को तुरंत बिना किसी शर्त के रिहा किया जाए और दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए।

सिख नेताओं का कहना था कि जब तक ये दोनों मांगें पूरी नहीं की जातीं और पुलिस प्रशासन लिखित में आश्वासन नहीं देता, तब तक जीटी रोड से जाम नहीं हटाया जाएगा। एसपी और आईजी ने कानूनी प्रक्रिया का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया और हाईवे खाली करने की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। शाम तक कई दौर की वार्ताएं हुईं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका।

जानलेवा हमला: DSP वीरेंदर का हाथ कटा, 6 पुलिसकर्मी घायल

जैसे-जैसे दिन ढला और शाम के अंधेरे ने हाईवे को घेरा, प्रदर्शन का माहौल अचानक हिंसक और अनियंत्रित हो गया। अंबाला एसपी अजीत सिंह शेखावत के अनुसार, पुलिस प्रशासन जब शांतिपूर्ण ढंग से रास्ता खाली कराने की आखिरी कोशिशें कर रहा था, तभी भीड़ में छिपे असामाजिक और उग्र तत्वों ने पूर् नियोजित साजिश के तहत पुलिस कर्मियों पर हमला बोल दिया। उपद्रवियों ने छिपकर लाए गए भाले, फरसे, तलवारें, कुल्हाड़ियां और लोहे की रॉड निकालकर अग्रिम पंक्ति में तैनात पुलिसकर्मियों पर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए।

अंधेरे का फायदा उठाकर किए गए इस बर्बर हमले में डीएसपी क्राइम वीरेंदर सीधे निशाने पर आ गए। एक उपद्रवी ने उन पर धारदार हथियार से इतना जोरदार वार किया कि उनका हाथ बुरी तरह कट गया और वे खून से लथपथ होकर वहीं गिर पड़े। अपने अधिकारी को बचाने दौड़े पांच से छह अन्य पुलिसकर्मियों पर भी हमलावरों ने दया नहीं दिखाई और उन पर भी धारदार हथियारों व लाठियों से वार किए, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर चीख-पुकार मच गई। घायल पुलिसकर्मियों को तुरंत उनके सहयोगियों ने सुरक्षा घेरे में लेकर एंबुलेंस के जरिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां डीएसपी वीरेंदर की हालत गंभीर बनी हुई है।

गैस टैंकर और वाहनों की चाबियां छीनकर बड़े हादसे की साजिश

अंबाला पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक बयान में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि हिंसक भीड़ में शामिल उपद्रवियों की नीयत केवल हाईवे जाम करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे किसी बड़े हादसे या भयानक त्रासदी को अंजाम देने की फिराक में थे। एसपी अजीत सिंह शेखावत ने बताया कि हाईवे पर फंसे एक ज्वलनशील एलपीजी गैस टैंकर को उपद्रवियों ने अपना जरिया बनाने की कोशिश की।

उपद्रवियों ने डरा-धमकाकर और मारपीट करके गैस टैंकर के चालक से चाबी छीन ली और चालक को जान बचाकर भागने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद उन्होंने उस विशाल गैस टैंकर को हाईवे के बीचों-बीच आड़ा खड़ा कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने जब टैंकर को वहां से हटाने की कोशिश की, तो उपद्रवियों ने पुलिस टीम पर पथराव किया और टैंकर को हटने नहीं दिया। हाईवे पर खड़े ज्वलनशील गैस टैंकर से जरा सी भी चिंगारी उठने पर पूरा इलाका तबाह हो सकता था, जिससे हजारों निर्दोष लोगों की जान खतरे में पड़ गई थी। इसके अतिरिक्त, उपद्रवियों ने दर्जनों अन्य निजी व वाणिज्यिक वाहनों की चाबियां भी जबरन छीन लीं और उनके चालकों को भगा दिया, ताकि गाड़ियों को धक्का देकर भी रास्ते से न हटाया जा सके।

पुलिस का लाठीचार्ज, आंसू गैस और 7 घंटे बाद हाईवे की बहाली

डीएसपी क्राइम वीरेंदर पर हुए जानलेवा हमले और एलपीजी टैंकर से पैदा हुए गंभीर सुरक्षा खतरे को देखते हुए पुलिस प्रशासन के सब्र का बांध टूट गया। स्थिति को और बिगड़ने से रोकने तथा आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधिकारियों ने कड़ा एक्शन लेने का आदेश दिया। भारी संख्या में तैनात पुलिस बल ने उपद्रवियों और प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए चौतरफा लाठीचार्ज शुरू कर दिया। इसके साथ ही पुलिस ने एक के बाद एक कई आंसू गैस के गोले छोड़े।

पुलिस की इस सख्त कार्रवाई के बाद हाईवे पर भगदड़ मच गई। उपद्रवी और प्रदर्शनकारी अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियां छोड़कर पास के खेतों और गलियों की ओर भाग निकले। पुलिस ने करीब आधे घंटे के कड़े मशक्कत के बाद जीटी रोड को प्रदर्शनकारियों के कब्जे से पूरी तरह मुक्त कराया। इसके बाद क्रेन और बुलडोजर की मदद से हाईवे पर खड़े कंटेनरों, ट्रैक्टरों और उस गैस टैंकर को हटाया गया, जिसकी चाबी छीनी गई थी। मास्टर की (Master Key) और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से गाड़ियों को किनारे कराया गया। आखिरकार, सात घंटे के लंबे और तनावपूर्ण घटनाक्रम के बाद रात के समय अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर यातायात को पुनः सुचारू रूप से बहाल किया जा सका।

प्रशासनिक कार्रवाई, एफआईआर और क्षेत्र में वर्तमान स्थिति

इस पूरी हिंसा और खूनी झड़प के बाद अंबाला जिला प्रशासन और पुलिस बेहद सख्त रुख अपना रही है। अंबाला के एसपी अजीत सिंह शेखावत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कानून को अपने हाथ में लेने, डीएसपी पर जानलेवा हमला करने, गैस टैंकर का दुरुपयोग कर लोगों की जान जोखिम में डालने और राष्ट्रीय राजमार्ग को अवैध रूप से बाधित करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

पुलिस ने इस संबंध में अलग-अलग धाराओं के तहत कई नई एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं, जिनमें हत्या के प्रयास (Attempt to Murder), सरकारी काम में बाधा डालने, लोक सेवकों पर हमला करने, दंगा भड़काने (Rioting) और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत गंभीर मामले शामिल हैं। वीडियो फुटेज, सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से मिली रिकॉर्डिंग के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। अंबाला, बलदेव नगर और पंजोखरा साहिब के आसपास के इलाकों में एहतियातन भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की कंपनियां तैनात कर दी गई हैं। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है, और पुलिस प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है।

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