हिसार में गड़बड़ाया सभी पार्टियों का हिसाब,इनेलो के सफाए के बीच कुलदीप को राहत, कैप्टन पर आफत

हिसार में गड़बड़ाया सभी पार्टियों का हिसाब,इनेलो के सफाए के बीच कुलदीप को राहत, कैप्टन पर आफत

-राजकुमार अग्रवाल –
चंडीगढ़। पिछले 23 साल से सत्ता का केंद्र बनने की हसरत लिए बैठे हिसार जिले की सातों सीटों का चुनावी नजारा 2014 की तुलना में पूरी तरह बदल गया है।
2014 में इनेलो 3 सीटों पर जीत हासिल करके सबसे आगे रही थी। 2 सीटों पर कुलदीप बिश्नोई फैमिली विधायक बनी थी और 2 सीटों पर भाजपा का कमल खिला था।
2019 के विधानसभा चुनाव में हालात पूरी तरह से बदले हुए नजर आ रहे हैं। इनेलो का पूरी तरह से सफाया होने की आशंका मंडरा रही है।
गलत टिकटों के बंटवारे के चलते कुलदीप बिश्नोई के अलावा कांग्रेस का बंटाधार हो रहा है।
पहली बार भाजपा सभी सातों सीटों पर मुकाबले में विरोधियों को ललकार रही है। दुष्यंत चौटाला की अगुवाई में जेजेपी बड़ी ताकत बनने की कसरत कर रही है। उकलाना और बरवाला सीटों पर दो पूर्व विधायक भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोक रहे हैं।
सातों सीटों का चुनावी नजारा इस प्रकार नजर आ रहा है

हिसार का नहीं बदलेगा हिसाब

हिसार विधानसभा सीट पर सावित्री जिंदल के कांग्रेसी प्रत्याशी नहीं बनने के चलते भाजपा प्रत्याशी व वर्तमान विधायक कमल गुप्ता की पौ बारह हो गई है। कांग्रेस के टिकट पर चुनावी जंग लड़ रहे रामनिवास राड़ा गुप्ता को कड़ी चुनौती देने के लिए हरिसिंह सैनी की तरह सियासी गोटियां फिट कर रहे हैं। जेजेपी ने युवा चेहरे जितेंद्र श्योराण पर दांव लगाकर शहरी सीट पर नए समीकरण को आजमाया है।

कुलदीप की राह आसान

भजनलाल परिवार का अभेद गढ़ रही आदमपुर सीट इस बार भी उनको निराश नहीं कर रही है। भजनलाल के सियासी वारिस कुलदीप बिश्नोई की राह खुद भाजपा ने आसान कर दी है। कुलदीप बिश्नोई के सामने भाजपा ने टिकटोक प्रत्याशी सोनाली फोगाट को उतारकर खुद अपने चुनावी संभावनाओं को दफनाने का काम किया है।
लोकसभा चुनाव के परिणाम ने कुलदीप बिश्नोई के लिए खतरे की घंटी बचाने का काम किया था। बिश्नोई परिवार ने परिणाम से सबक लेते हुए पिछले 2 महीने में आदमपुर विधानसभा हलके की गली गली की खाक छानता हुए नाराज वोटरों को मनाने का काम किया।
भाजपा द्वारा दमदार प्रत्याशी नहीं उतारे जाने के चलते कुलदीप बिश्नोई की राह आसान नजर आ रही है।

कैप्टन की कप्तानी खतरे में

चर्चा का केंद्र बन चुकी नारनौंद विधानसभा सीट पर प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कप्तानी खतरे में नजर आ रही है। जेजेपी प्रत्याशी राम कुमार गौतम ने उनकी राह में कांटे बिछा दिए हैं। चुनावी जंग जीतने के लिए कैप्टन अभिमन्यु को पूरे परिवार सहित गांव गांव की खाक छाधनी पड़ रही है।
कैप्टन अभिमन्यु की पत्नी का घर-घर वोट मांगना यह बता रहा है कि चुनावी मुकाबला फंसा हुआ है और कैप्टन की फौज को हार का डर सता रहा है। दुष्यंत चौटाला के मजबूत वोटबैंक और राम कुमार गौतम के व्यक्तिगत जनाधार ने जेजेपी के लिए इस सीट पर जीत की प्रबल संभावनाएं दिखाई हैं।
कांग्रेस प्रत्याशी बलजीत सिहाग और इनेलो प्रत्याशी जस्सी पटवाड़ का उठता हुआ चुनाव भी कैप्टन अभिमन्यु की जड़ों में तेल डालने का काम कर रहा है।

बरवाला में फंस गया पेंच

बरवाला विधानसभा सीट पर चुनावी पेंच फ़स गया है। भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र पुनिया और जेजेपी प्रत्याशी जोगीराम सिहाग के बीच कांटे की टक्कर चल रही है। दोनों ही प्रत्याशी बढ़त बनाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। सुरेंद्र पुनिया जहां सत्ता की संभावना को ढाल बना रहे हैं वहीं दूसरी तरफ जोगीराम सिहाग सत्ता की नाराजगी को भुना रहे हैं।
कांग्रेस के बागी प्रत्याशी रामनिवास घोड़ेला मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं।

हांसी में एकतरफा जीत फंसी

हांसी विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी विनोद भ्याना की एकतरफा जीत की राह में जेजेपी प्रत्याशी राहुल मक्कड़ ने रोड़े बिछाने का काम किया है। हांसी शहर में विनोद भ्याना की एकतरफा बड़ी बढ़त के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन एक दिन पहले राहुल मक्कड़ ने हांसी शहर में बड़ी जनसभा के जरिए सभी को चौंका दिया। राहुल मक्कड़ शहर में बड़ी हिस्सेदारी लेकर गांवों में दुष्यंत चौटाला के मजबूत जनाधार के बलबूते पर मुकाबले को नजदीकी बनाने की मुहिम में जुट गए हैं।

उकलाना मे उलझ गए समीकरण

उकलाना विधानसभा सीट पर चुनावी समीकरण उलझे हुए हैं। भाजपा प्रत्याशी आशा खेदड़ के लिए “वैवाहिक जागलान विवाद” बड़ी अड़चन बन गया है। कांग्रेस प्रत्याशी पर पार्टी के बागी पूर्व विधायक नरेश सेलवाल का चुनाव में उतरना भारी पड़ गया है।
जेजेपी प्रत्याशी अनूप धानक दोबारा विधायक बनने के लिए बड़ी नाराजगी के बीच भारी मशक्कत कर रहे हैं। उकलाना विधानसभा सीट पर अगले 1 सप्ताह में तस्वीर साफ होने के आसार हैं।

बात यह है कि 2014 की तुलना में 2019 का चुनाव हिसार जिले की सियासत के लिए पूरी तरह से अलग माहौल लेकर खड़ा हुआ है।
सत्ता के बलबूते पर भाजपा दूसरे दलों से आगे निकलने की भरपूर कोशिश कर रही है। नई नवेली जेजेपी सरप्राइस परिणाम देने की रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस के लिए आदमपुर के अलावा अच्छे संकेत नहीं मिल रहे हैं।
इनेलो का पूरी तरह से सफाया होने का आभास हो रहा है। हिसार का हिसाब भाजपा को फायदा तो दे रहा है लेकिन उसके मिशन 75 में बड़ा योगदान नहीं दे रहा है।

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