डेरा समर्थको ने नहीं खोले पत्ते, चुनाव में एकजुट होकर दिखा सकते है ताकत

हाथी की चाल व डेरा प्रेमियों का साथ बिगाड़ सकता है चुनावी गणित

जिला स्तरीय नामचर्चा में डेरा समर्थको ने नहीं खोले पत्ते, चुनाव में एकजुट होकर दिखा सकते है ताकत

16 को रादौर में पहुंचेगीं बसपा सुप्रीमो मायावती, बदल सकता है चुनावी माहौल

रादौर,

चुनावी समर जैसे जैसे आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे चुनाव का गणित हर दिन पेचिदा होता जा रहा है। पहले जहां सीधे सीधे मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के बीच होता दिखाई दे रहा था वहीं अब इस चुनावी रण में कभी भी तीसरे खेमे की एंट्री होने के आसार बनते दिखाई दे रहे है। चुनावी गणित को नया मोड़ देने में डेरा प्रेमियों व बसपा प्रमुख मायावती की रैली एक अहम रोल अदा कर सकती है। यह चर्चाएं उस समय भी बल पकड़ गई जब चुनावी समर में डेरा सच्चा सौदा की ओर से एक जिला स्तरीय नामचर्चा का आयोजन रादौर स्थित नामचर्चा घर में किया गया। कयास लगाया जा रहा था कि नामचर्चा के बहाने डेरा प्रेमी खुले तौर पर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करेगें लेकिन ऐसा हुआ नहीं। डेरा प्रेमियो ने राजनीति को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले। केवल एक संदेश जरूर दिया जिसमें डेरा प्रेमियो को एकजुट होकर मतदान करने दावा किया गया। रादौर में हुई इस नामचर्चा पर न केवल राजनीतिक खिलाडिय़ो की नजरे टिकी हुई थी वहीं दूसरी ओर खुफियां विभाग भी इस पर पैनी नजर रखे हुए था। लेकिन कोई बड़ा खुलासा न होने के कारण डेराप्रेमियों ने अंदुरूनी ताकत का अहसास बनाएं रखा। हालांकि यह चर्चाएं भी रही कि भले ही डेरा प्रेमियों ने खुले तौर पर किसी पार्टी व उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान नहीं किया गया लेकिन अंदरखाते डेरा प्रेमियों ने चुनाव को लेकर अपनी रणनीति अवश्य ही तैयार की है। जिसका खुलासा या तो मतदान से मात्र एक या दो दिन पहले किया जाएंगा या फिर डेरा प्रेेमी इस बार अंदरखाते एकजुट होकर मतदान करने की फिराक में है।

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डेरे की वोटो पर सबकी नजर

डेरा सच्चा सौदा से जुड़े समर्थको का हलके में अच्छा खासा वोटबैंक है। अगर डेरा प्रेमी एकजुट होकर मतदान करते है तो यह चुनावी रण की दिशा को किसी भी तरफ मोडऩे में सफल साबित हो सकते है। यही कारण है कि चुनाव में डेरा प्रेमियो के वोटबैंक पर सबकी निगाहे टिकी रहती है और राजनीतिक पार्टियां डेरे से आर्शीवाद लेने का प्रयास करती रहती है। गत वर्ष डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा मामले में डेरा प्रेमी भाजपा से नाराज दिख रहे है। वहीं इनेलो की ओर भी डेरा प्रेमियो का रवैया सकारात्मक नहीं दिखाई पड़ता। ऐसे में अब कांग्रेस व लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी इस वोटबैंक को साधने की कसरत कर रही है। पिछले दिनो लोसुपा सुप्रीमो जहां डेरा समर्थको के पक्ष में ब्यान भी दे चुके है वहीं कांग्रेस नेता अंदरखाते डेरा प्रेमियों का समर्थन लेने के प्रयास में जुटे हुए है।

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बसपा की रैली भी बिगाड़ सकती है चुनावी गणित

रादौर विधानसभा में पहली बार बसपा सुप्रीमो मायावती की रैली 16 अक्तूबर को होने जा रही है। रैली में भारी जनसमूह के पहुंचने की उम्मीद है। जिसको लेकर प्रशासन भी सर्तक दिखाई दे रहा है। रैली में भीड़ सडक़ो पर जमा न हो इसके लिए प्रशासन की ओर से निर्धारित रैली ग्राऊंड को भी बदल कर एस.के रोड़ पर स्वामी जी के डेरे के सामने कर दिया गया है। चर्चाएं ऐसी भी है कि अगर बसपा सुप्रीमो की रैली के बाद बसपा हलके में मजबूत होती है तो इसका सीधा सीधा नुकसान कांग्रेस पार्टी को हो सकता है। वहीं दूसरी ओर भाजपा से रादौर में श्यामसिंह राणा का टिकट कटने के बाद राजपूत समाज निराश दिखाई दे रहा है। चर्चाएं है कि राजपूत समाज एकजुट होकर कांग्रेस की तरफ रूख कर सकता है। वहीं डेरा प्रेमियो की भाजपा से नाराजगी भी भाजपा की मुश्किले बढ़ा सकती है।

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