मौत=50 फीट गहरे बोरवेल में गिरी शिवानी को 18 घंटे बाद निकाला, मुंह के बल गिरने से मिट्टी में धंसी,

50 फीट गहरे बोरवेल में गिरी शिवानी को 18 घंटे बाद निकाला, मुंह के बल गिरने से मिट्टी में धंसी, मौत
करनाल के हरीसिंहपुरा गांव में रविवार दोपहर करीब 3 बजे 50 फीट गहरे बोरवेल में गिरी शिवानी को नहीं बचाया जा सका। सोमवार सुबह 9 बजे एनडीआरएफ की टीम ने शिवानी का शव निकाला। एनडीआरएफ टीम का कहना था कि बच्ची मुंह के बल बोरवेल में गिरी थी, जिस वजह से वह मिट्टी में धंस गई। तभी उसकी जान नहीं बच पाई। बच्ची को बाहर निकालते ही कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में भेजा गया था लेकिन उसे वहां मृत घोषित कर दिया। फिलहाल उसका पोस्टमॉर्टम करवाया जा रहा है।

दोपहर में खेलते-खेलते गिरी, परिजनों को रात 9 बजे पता चला

परिजन लक्ष्मण बैरागी का कहना है कि साढ़े 5 साल की शिवानी रविवार दोपहर में घर के बाहर खेल रही थी। करीब 3 बजे वह अचानक से गायब हो गई। उन्होंने आसपास देखा लेकिन शिवानी नहीं मिली। काफी देर तक तलाश करने के बाद बच्ची नहीं मिली तो उन्होंने बोरवेल से लोहे की टीन हटाई और एक मोबाइल को वीडियो मोड पर लगाकर रस्सी के सहारे नीचे तक भेजा।

मोबाइल को बाहर निकालाकर वीडियो देखी तो उसमें शिवानी के पैर नजर आए। रात करीब 9 बजे ग्रामीणों ने बीडीपीओ व घरौंडा पुलिस को सूचना दी। पुलिस व प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। विधायक हरविंद्र कल्याण और डीसी मौके पर पहुंचे। पूरी रात बचाव अभियान चला। बच्ची की मां कविता की आवाज रिकॉर्ड करके भी नीचे भेजी गई ताकि बच्ची खौफ से बाहर रहे।

अलसुबह 3.30 बजे पहुंची एनडीआरएफ की टीम

अलसुबह 3.30 बजे गाजियाबाद से एनडीआरएफ की टीम हरीसिंहपुरा पहुंची। टीम के एसिस्टेंट कमाडेंट अनिल कुमार ने बताया कि वे 37 सदस्यों की टीम लेकर पहुंचे थे। बच्ची सिर के बल गिरी थी। जिस वजह से वह मिट्टी में धंस गई थी। इसी वजह से बच्ची की जान नहीं बचाई जा सकी। उन्होंने आते ही रेस्क्यू आप्रेशन शुरू किया था और मंगलवार सुबह 9 बजे बच्ची को बाहर निकाल लिया। बाहर निकालते ही करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज ले जाया गया लेकिन जान नहीं बचाई जा सकी।

विधायक बोले-सरासर लापरवाही है लोगों को सबक लेना चाहिए

घरौंडा विधायक हरविंद्र कल्याण पूरी रात मौके पर मौजूद रहे। सुबह जब बच्ची को बाहर निकाला गया और वह मृत मिली तो उन्हें बेहद अफसोस हुआ। उन्होंने कहा कि इस घटना से सबक लेना चाहिए। इस तरह बोरवेल खुले छोड़ देना सरासर लापरवाही है।

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