जजपा अपने लिए चार मंत्री पद की मांग कर रही ,एक फॉर्मूले के जरिए भाजपा ने तालमेल बिठाने का प्रयास 

जजपा अपने लिए चार मंत्री पद की मांग कर रही ,एक फॉर्मूले के जरिए भाजपा ने तालमेल बिठाने का प्रयास

फरीदाबाद(अटल हिन्द /योगेश गर्ग )। हरियाणा में (JJP)जजपा-(BJP)भाजपा गठबंधन की सरकार में नए मंत्रिमंडल के गठन पर भाजपा आलाकमान के बाद अब संघ ने भी हरी झंडी दिखा दी है। मुख्यमंत्री अपनी टीम में जातीय संतुलन साधते हुए राज्य के चारों कोनों को प्रतिनिधित्व देंगे। गुरुनानक देव जी के 550वें प्रकाश उत्सव के उपलक्ष्य में 9 नवंबर को अयोजित होने वाले कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी शामिल होंगे। यह समारोह पंजाब के डेरा बाबा नानक में होगा। इसके ठीक अगले दिन 10 नवंबर को कैबिनेट का गठन संभव है। तब तक प्रधानमंत्री व भाजपा (BJP)अध्यक्ष के साथ मनोहर कैबिनेट की नई टीम पर मंथन हो चुका होगा। वैसे हरियाणा के इतिहास में पहली बार नई सरकार का पहला विधानसभा सत्र बिना मंत्रिमंडल के ही संपन्न हुआ। सरकार की ओर से इस बार सिर्फ मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री को छोड़कर बाकी सभी सदस्य बतौर विधायक की हैसियत से ही पहले सत्र के दौरान सदन में मौजूद रहे। चूंकि इस बार हरियाणा में गठबंधन की सरकार है, इसलिए अभी तक मंत्रिमंडल तय होने में कई तरह के पेच फंसे हुए हैं। लेकिन फिर भी संभावनाएं जताई जा रही है कि 10 नवंबर तक हरियाणा के मंत्रिमंडल की घोषणा हो जाएगी। सूत्रों के अनुसार, इस मंत्रिमंडल को तैयार करने के लिए भाजपा ने विधायकों के संख्या बल के हिसाब से एक फॉर्मूला तैयार किया है। जिसके चलते मंत्रिमंडल गठन के दौरान भाजपा अपने सहयोगियों में पूरी तरह से तालमेल बिठाकर आगे बढ़ेगी। भाजपा की सोच है कि मंत्रिमंडल इस तरह से गठित हो कि न तो उनके सहयोगी जननायक जनता पार्टी नाराज रहे और न ही निर्दलीय विधायक। मुख्यमंत्री मनोहर लाल तो अपनी ओर से अपनी नई टीम पर होमवर्क पूरा कर चुके हैं। मगर सहयोगियों को भी साधते हुए मंत्रिमंडल पर आखिरी निर्णय हाईकमान को ही लेना है,जो इस वक्त महाराष्ट्र में चले रहे सियासी घमासान को पटरी पर लाने में व्यस्त है। बता दें इस बार भाजपा के पास अकेले बहुमत की सरकार बनाने वाला 46 विधायकों का आंकड़ा नहीं है, इसलिए जजपा से गठबंधन करना पड़ा। भाजपा इस बार हरियाणा विधानासभा(Haryana Vidhan Sabha_ चुनाव में कुल 90 में से 40 सीटों पर ही सिमट गई। ऐसे में भाजपा ने जननायक जनता पार्टी (जजपा) के 10 और सात निर्दलीय विधायकों की मदद लेकर गठबंधन की सरकार बनाई। अब गठबंधन की इस नई सरकार में सहयोगियों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलना लाजिमी है। मगर कुल 14 मंत्रियों में से सहयोगियों को कितने मंत्री पद दिए जाएंगे, इस पर एक फॉर्मूले के जरिए भाजपा ने तालमेल बिठाने का प्रयास किया है।

जजपा अपने लिए चार मंत्री पद की मांग कर रही
40 विधायकों वाला सबसे बड़ा दल भाजपा है,  इसलिए कुल 14 मंत्रियों में से सीएम समेत भाजपा अपने नौ मंत्री (राज्य मंत्री समेत) बनाएगी। स्पीकर भी भाजपा का ही बनाया गया है। जजपा के पास 10 विधायक हैं, इसलिए उन्हें डिप्टी सीएम समेत तीन विधायकों पर एक मंत्री के हिसाब से तीन मंत्री पद दिए जाएंगें। इसी तरह सात निर्दलीयों को भी दो मंत्री पद दिए जाएंगे। बाकी निर्दलीय विधायकों को बोर्ड एवं निगमों का चेयरमैन बनाया जा सकता है। भाजपा उक्त फॉर्मूले के तहत तालमेल बिठाकर सभी को साधते हुए अपने साथ रखना चाहती है, ताकि आगामी पांच वर्षों के दौरान सरकार चलाने में किसी प्रकार की सियासी बाधा उत्पन्न न हो। मगर इस फॉर्मूले से अलग जननायक जनता पार्टी भाजपा से सरकार में अपने लिए चार मंत्री पद की मांग कर रही है। इसी पर फैसला हाईकमान को लेना है कि जजपा को तीन मंत्री देने हैं या चार। जजपा यदि न मानी तो विधानसभा में डिप्टी स्पीकर का पद भी जजपा को ही दिया जा सकता है। इसके अलावा मंत्रिमंडल में मंत्री तय करते हुए यह भी देखा जाएगा कि अधिकतर जिलों को भी प्रतिनिधित्व मिल जाए।

मंत्री पद के प्रबल दावेदार
भाजपा की ओर से विधायक अनिल विज, कंवरपाल गुर्जर, सुभाष सुधा, हरविंद्र कल्याण, डॉ. कमल गुप्ता, डॉ. अभय सिंह यादव, डॉ. बनवारी लाल, रणबीर गंगवा, सीमा त्रिखा, मूलचंद शर्मा, रामकुमार कश्यप व महिलपाल ढांडा मंत्री पद के लिए प्रबल दावेदार माने जा रहें हैं। इसी तरह जजपा की ओर से विधायक ईश्वर सिंह, देवेंद्र सिंह बबली, अनूप धानक व रामकुमार गौतम और निर्दलीयों में से विधायक रणजीत सिंह चौटाला, बलराज कुंडू, सोमबीर सांगवान, रणधीर सिंह गोलन भी मंत्री पद के लिए दावेदार माने जा रहे हैं।

जल्द मंत्रिमंडल विस्तार के कई राजनीतिक कारण
राज्य में भाजपा सरकार के सहयोगी दल जजपा की तरफ से बेशक मंत्रिमंडल विस्तार के लिए कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखाई जा रही है मगर कई अन्य राजनीतिक कारणों से मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप देना चाहते हैं। सबसे बड़ा कारण तो यह है कि अगले सप्ताह अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय आना तय है। ऐसे में क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि राज्य में मज़बूत व स्थिर सरकार पूरे प्रशासनिक अमले के साथ काम करे। इसके अलावा भाजपा-जजपा के बीच न्यूनतम साझा कार्यक्रम को लागू करवाना भी मनोहर सरकार की प्राथमिकता रहेगी। प्रदूषण के मामले में जिस तरह सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख सामने आया है उससे भी मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल का विस्तार की जल्द करना चाहते हैं। इसके अलावा मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी गुरुवार से ही राज्यभर में सरकार के विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं, इसलिए भी मंत्रिमंडल की दरकार सामने आ रही है।

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