सेना नायक की ब्रेन डेड पत्नी ने छह लोगों को दिया जीवन दान, चंडीमंदिर अस्पताल से हुआ अंग आवंटन

सेना नायक की ब्रेन डेड पत्नी ने छह लोगों को दिया जीवन दान, चंडीमंदिर अस्पताल से हुआ अंग आवंटन

पश्चिमी कमान के चंडीमंदिर अस्पताल से अंगों का आवंटन हुआ है। पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर रोहतक, दिल्ली व नोएडा अंग पहुंचाए हैं। चंडीगढ़ में 09 सितंबर को यह बड़ी घटना सामने आई है। पंचकूला स्थित सेना के कमांड अस्पताल (पश्चिमी कमान) चंडीमंदिर में एक सैन्य कर्मचारी ने अपनी 30 वर्षीय ब्रेन डेड पत्नी के अंग दान कर दिए हैं। उन्होंने अंग दान करके समाज को एक नई दिशा प्रदान की है। मंगलवार रात से बुधवार दोपहर तक सेना की तरफ से हरियाणा पुलिस की मदद ली गई। पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर कमांड अस्पताल से अंगों को नोएडा, दिल्ली तथा पीजीआईएमएस रोहतक पहुंचाया है।

छह लोगों को मिला जीवन और दो छोटे बच्चे

अंगदान के माध्यम से छह लोगों को नया जीवन मिला है। जीवन देने वाली महिला का एक बच्चा तीन साल का है। वहीं दूसरा बच्चा मात्र एक साल का है। राजपूत रेजिमेंट के सेना नायक के परिवार ने यह फैसला लिया है। वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत अंगों का आवंटन किया गया है। अंगों में लीवर, हार्ट, किडनी और कॉर्निया शामिल रहे हैं। इस बड़े फैसले पर कमांडेंट हरकीरत सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय सशस्त्र बल परिवार का असली चेहरा है। अपने सबसे कठिन समय में एक युवा सैनिक ने छह अन्य परिवारों के बारे में सोचा है।

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राजस्थान के भीलवाड़ा की रहने वाली थीं संजू गुर्जर

कमांड अस्पताल के कमांडेंट हरकीरत सिंह के मुताबिक यह वीरांगना राजस्थान के भीलवाड़ा की रहने वाली थीं। उनका नाम संजू गुर्जर था। उनके पति सनावर लाल आर्मी की राजपूत रेजीमेंट में सेना नायक के पद पर तैनात हैं। संजू के पिता पैरा स्पेशल फोर्स से सेवानिवृत्त हैं। मंगलवार को संजू को अचानक दिमाग की नस फटने की समस्या हुई। इसके बाद परिवार के लोग उन्हें लेकर पंचकूला स्थित आर्मी कमांड अस्पताल (पश्चिमी कमान) चंडी मंदिर पहुंचे। लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। डॉक्टरों के अनुसार उनका ब्रेन पूरी तरह से डेड हो चुका था।

कानूनी और मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत की गई घोषणा

मंगलवार रात सभी कानूनी व मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत महिला को ब्रेन डेड घोषित किया गया। गहरे सदमे के बावजूद संजू के पति और ससुर ने अंग दान करने का फैसला लिया। परिवार से सहमति मिलते ही कमांड अस्पताल की टीमें सक्रिय हो गईं। इसमें सोटो, रोटो, पीजीआई चंडीगढ़ तथा नॉटो दिल्ली की टीमें शामिल थीं। वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत सभी अंगों का आवंटन किया गया। ऑर्गन के लिए दिल्ली, नोएडा और रोहतक के अस्पताल चिन्हित किए गए। इसके बाद ग्रीन कॉरिडोर बनाकर इन्हें बुधवार दोपहर में रवाना किया गया। पंचकूला ट्रैफिक पुलिस ने इस दौरान व्यवस्था को बहुत बेहतरी के साथ संभाला है।

आईपीएस अदिति सिंह ने दी ग्रीन कॉरिडोर की जानकारी

कमांड अस्पताल के कमांडेंट हरकीरत सिंह ने फिर दोहराया कि यह भारतीय सशस्त्र बल परिवार का असली चेहरा है। अपने सबसे कठिन समय में एक युवा राजपूत सैनिक ने छह अन्य परिवारों के बारे में सोचा। डीसीपी पंचकूला आईपीएस अदिति सिंह के अनुसार पूरी प्रक्रिया को समय पर पूरा किया गया। कमांड अस्पताल चंडीमंदिर से एक किडनी को पीजीआईएमएस रोहतक पहुंचाया जाना था। इसके लिए चंडीमंदिर से पंचकूला के रास्ते रोहतक तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। वहीं, हार्ट को निर्धारित गंतव्य तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रबंध किए गए। कमांड अस्पताल चंडीमंदिर से चंडीगढ़ एयरपोर्ट तक दूसरा ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया। इससे फोर्टिस अस्पताल की हार्ट रिट्रीवल टीम समय पर पहुंचने में सफल रही।

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