आशीष जोशी को नेहरू पार्क से क्यों ले गई दिल्ली पुलिस?

पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी मामले में नया मोड़, जानें पूरी बात
पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी को लेकर हाल ही में एक ऐसी खबर सामने आई जिसने प्रशासनिक और आम गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू कर दीं। 1992 बैच के पूर्व अधिकारी आशीष जोशी जब दिल्ली के नेहरू पार्क में सुबह या शाम की नियमित सैर पर निकले थे, तो अचानक उन्हें वहां से ले जाया गया। इस दौरान न तो उन्हें कोई पूर्व नोटिस दिया गया था और न ही किसी पंजीकृत प्राथमिकी (FIR) की लिखित जानकारी दी गई।
नई दिल्ली/02 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स /राजकुमार अग्रवाल
नई दिल्ली। पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी को बुधवार सुबह दिल्ली के नेहरू पार्क से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अधिकारी पूछताछ के लिए अपने साथ ले गए। उस समय जोशी रोज की तरह सुबह की सैर पर निकले थे। उनके साथ मौजूद लोगों के मुताबिक, दो पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में उनके पास पहुंचे और उन्हें अपने साथ चलने को कहा।
इस घटना के बाद कुछ घंटों तक उनके परिवार और दोस्तों को यह साफ नहीं हो सका कि आशीष जोशी को आखिर कहां ले जाया गया है। यही वजह रही कि सोशल मीडिया पर उनके बारे में कई तरह की बातें सामने आने लगीं। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित समेत कई लोगों ने दिल्ली पुलिस से उनकी स्थिति और ठिकाने की जानकारी देने की मांग की।
शाम तक तस्वीर कुछ साफ हुई। पुलिस की ओर से बताया गया कि जोशी को गिरफ्तार नहीं किया गया था, बल्कि एक मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। शाम करीब साढ़े सात बजे जोशी ने सोशल मीडिया पर खुद बताया कि वह घर पहुंच चुके हैं।
उन्होंने लिखा कि दिल्ली स्पेशल सेल उन्हें घर छोड़कर गई है और बाकी जानकारी बाद में साझा करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने इसलिए भी ध्यान खींचा क्योंकि दिन के बड़े हिस्से में उनके परिवार और सहयोगियों को उनके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई थी।
सुबह नेहरू पार्क में क्या हुआ?
आशीष जोशी दिल्ली के मोती बाग इलाके में रहते हैं और नियमित रूप से नेहरू पार्क में सैर करने जाते हैं। बुधवार सुबह भी वह अपनी सामान्य दिनचर्या के मुताबिक पार्क पहुंचे थे। उनके साथ एक दोस्त भी मौजूद था।
रिपोर्टों के मुताबिक, इसी दौरान दो लोग उनके पास पहुंचे। दोनों ने खुद को दिल्ली पुलिस से जुड़ा बताया और जोशी से पूछताछ के लिए साथ चलने को कहा। बताया गया कि दोनों सादे कपड़ों में थे।
उनके साथ मौजूद व्यक्ति ने पुलिसकर्मियों से यह भी जानना चाहा कि आखिर जोशी को कहां ले जाया जा रहा है और पार्क में ही उनसे सवाल क्यों नहीं किए जा सकते। इसके बाद जोशी पुलिस के साथ चले गए।
घटना के बाद उनके दोस्तों और परिचितों के बीच चिंता बढ़ गई। कुछ समय तक उनका मोबाइल फोन भी संपर्क में नहीं था। इसके चलते परिवार और मित्रों को यह पता लगाने में परेशानी हुई कि वह इस समय कहां हैं।
परिवार को जानकारी क्यों नहीं मिली?
इस मामले में सबसे ज्यादा सवाल इसी बात को लेकर उठे कि जोशी को ले जाने के बाद परिवार को तत्काल स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं मिली।
न्यूजलॉन्ड्री की रिपोर्ट के मुताबिक, जोशी के सहयोगियों ने कहा कि परिवार को पूरे दिन यह जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें किस जगह रखा गया है। उनके परिजनों और परिचितों ने पुलिस से संपर्क करने की कोशिश की।
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने भी सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्हें जोशी की पत्नी से इस घटना के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि सुबह से ही जोशी का पता लगाने की कोशिश की जा रही थी।
बाद में पता चला कि उन्हें दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित कार्यालय ले जाया गया था। वहां उनसे कई घंटे तक पूछताछ की गई।
क्या आशीष जोशी गिरफ्तार हुए थे?
यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा। शुरुआती जानकारी में उनके बारे में 'पिकअप' या 'उठाकर ले जाने' जैसी बातें सामने आईं, लेकिन पुलिस के मुताबिक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया था।
द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि जोशी से एक मामले के संबंध में पूछताछ की गई। पुलिस ने कहा कि उन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया और वह घर लौट गए।
पुलिस सूत्रों ने यह भी कहा कि मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका था और जोशी को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, मामला उनकी ऑनलाइन गतिविधि से जुड़ा बताया गया और इसमें भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 192 का उल्लेख किया गया।
यह धारा ऐसे कृत्य से संबंधित है जिसमें जानबूझकर ऐसी उकसाने वाली स्थिति पैदा करने का आरोप हो, जिससे दंगा होने की आशंका हो। हालांकि इस मामले में जोशी की कथित पोस्ट और पुलिस की कार्रवाई के बीच पूरा कानूनी आधार सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।
FIR को लेकर क्या सामने आया?
FIR को लेकर भी इस मामले में शुरुआत में भ्रम की स्थिति रही।
दिन में सामने आई रिपोर्टों में जोशी के परिवार और सहयोगियों की तरफ से कहा गया कि उन्हें FIR की जानकारी नहीं दी गई थी। पुलिस की तरफ से भी शुरुआती दौर में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मामला किस FIR के तहत है और उसमें कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं।
बाद में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया कि स्पेशल सेल में दो दिन पहले ही मामला दर्ज किया गया था। द प्रिंट ने पुलिस अधिकारी के हवाले से लिखा कि यह मामला BNS की धारा 192 के तहत दर्ज किया गया था।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी कहा गया कि स्पेशल सेल की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट ने सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े मामले में जोशी से पूछताछ की। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान उनके सोशल मीडिया पोस्ट के बारे में सवाल किए गए।
सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है मामला?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस की कार्रवाई का संबंध आशीष जोशी की सोशल मीडिया गतिविधियों से बताया जा रहा है।
जोशी सोशल मीडिया पर सरकार और मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। हाल के दिनों में उनके कुछ पोस्ट काफी चर्चा में रहे थे।
एक पोस्ट में उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर कथित तौर पर गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय गृह सचिव से जुड़ी एक अंदरूनी स्थिति का दावा किया था।
इस पोस्ट में उन्होंने दावा किया था कि गृह सचिव छात्रों के खिलाफ कड़ी पुलिस कार्रवाई के पक्ष में नहीं थे और मैदान में मौजूद कुछ अधिकारियों की ओर से भी इसका विरोध था। बाद में यह पोस्ट भारत में एक्स पर उपलब्ध नहीं रहा। एक्स की ओर से बताया गया था कि पोस्ट को कानूनी मांग के जवाब में भारत में रोका गया है।
हालांकि पुलिस ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा कि केवल इसी पोस्ट की वजह से कार्रवाई हुई। अलग-अलग रिपोर्टों में पुलिस कार्रवाई को जोशी की ऑनलाइन गतिविधि और हाल के सोशल मीडिया पोस्ट से जोड़ा गया है।
आशीष जोशी कौन हैं?
आशीष जोशी 1992 बैच के इंडियन पोस्ट एंड टेलीकम्युनिकेशन अकाउंट्स एंड फाइनेंस सर्विस के अधिकारी रहे हैं। वह केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं।
उन्होंने मार्च 2026 में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति ली थी। सेवानिवृत्ति के समय वह अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी थे। इससे पहले वह दूरसंचार विभाग में भी जिम्मेदार पद पर काम कर चुके हैं।
इसलिए बुधवार को हुई पुलिस कार्रवाई इसलिए भी चर्चा में आई क्योंकि यह किसी सामान्य सोशल मीडिया यूजर के बजाय एक ऐसे पूर्व वरिष्ठ सरकारी अधिकारी से जुड़ी थी, जो लंबे समय तक केंद्र सरकार की सेवा में रह चुके हैं।
2019 में भी विवादों में आए थे जोशी
आशीष जोशी का नाम इससे पहले भी सोशल मीडिया से जुड़े एक मामले में चर्चा में आ चुका है।
2019 में उन्हें केंद्र सरकार ने निलंबित कर दिया था। उस समय जोशी ने तत्कालीन आम आदमी पार्टी विधायक कपिल मिश्रा से जुड़े एक विवादित सोशल मीडिया वीडियो को लेकर पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी।
जोशी उस समय दूरसंचार विभाग में अधिकारी के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने पुलिस को शिकायत देकर विवादित सामग्री पर कार्रवाई की मांग की थी।
बाद में उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई हुई और उन्हें निलंबित किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, उनका निलंबन नवंबर 2021 में वापस ले लिया गया था।
उस समय जोशी ने अपने बचाव में कहा था कि उन्होंने सरकारी अधिकारी के तौर पर संबंधित अधिकारियों को जानकारी देना अपना कर्तव्य समझा था और उन्हें अपने कदम पर पछतावा नहीं है।
बुधवार को करीब कितने घंटे पूछताछ हुई?
इस संबंध में अलग-अलग रिपोर्टों में समय को लेकर थोड़ा अंतर है, लेकिन सभी रिपोर्टें इस बात पर सहमत हैं कि जोशी से कई घंटे तक पूछताछ की गई।
इंडियन एक्सप्रेस ने पुलिस सूत्रों के हवाले से करीब नौ घंटे की पूछताछ की बात कही। वहीं न्यूजलॉन्ड्री ने उन्हें सुबह ले जाने और करीब 12 घंटे बाद घर पहुंचने का उल्लेख किया है।
द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, उनसे करीब 10 घंटे तक पूछताछ हुई। बाद में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल उन्हें घर छोड़कर गई।
इससे साफ है कि बुधवार सुबह नेहरू पार्क से शुरू हुआ घटनाक्रम शाम तक चला और इसी दौरान परिवार तथा उनके सहयोगियों की चिंता भी बनी रही।
शाम को खुद आशीष जोशी ने क्या बताया?
कई घंटे तक सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने के बाद शाम को खुद आशीष जोशी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।
उन्होंने बताया कि वह घर लौट आए हैं और दिल्ली स्पेशल सेल के अधिकारी उन्हें घर छोड़कर गए हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह बाद में पूरे घटनाक्रम की जानकारी देंगे।
उनकी इस पोस्ट के बाद परिवार और समर्थकों की चिंता कुछ कम हुई। हालांकि उस समय तक पूछताछ के दौरान उनसे क्या-क्या सवाल किए गए, इसका विस्तृत विवरण सामने नहीं आया था।
जोशी से मीडिया ने भी प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की। उन्होंने तत्काल विस्तृत बातचीत नहीं की और बाद में बात करने की बात कही।
विपक्ष ने दिल्ली पुलिस से सवाल पूछे
आशीष जोशी को सुबह पार्क से ले जाने की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी शुरू हो गई।
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने दिल्ली पुलिस से यह बताने की मांग की कि जोशी को कहां ले जाया गया है। उन्होंने कहा कि परिवार काफी देर तक उनके बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश करता रहा।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार जोशी की सोशल मीडिया पोस्ट से इतनी असहज है कि पुलिस को इस तरह कार्रवाई करनी पड़ी।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी पुलिस से पारदर्शिता बरतने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि जोशी को किस कानूनी प्रक्रिया के तहत पूछताछ के लिए ले जाया गया था।
पुलिस का पक्ष क्या है?
दिल्ली पुलिस की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, जोशी को किसी आपराधिक मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया था। उनसे एक पहले से दर्ज मामले के संबंध में पूछताछ की गई।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि मामला ऑनलाइन गतिविधि से जुड़ा है और इसमें BNS की धारा 192 लगाई गई है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ का उद्देश्य सोशल मीडिया पर किए गए दावों और पोस्ट के बारे में जानकारी हासिल करना था।
इंडियन एक्सप्रेस ने पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया कि पूछताछ के दौरान जोशी को उनके सोशल मीडिया पोस्ट दिखाए गए और उनसे उनके दावों के बारे में सवाल किए गए। इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि आशीष जोशी के खिलाफ दर्ज मामले की पूरी FIR में क्या लिखा है और पुलिस ने उनकी किन सोशल मीडिया पोस्ट को आधार बनाया है।
दूसरा सवाल यह है कि परिवार को शुरुआत में उनके ठिकाने की जानकारी क्यों नहीं मिल सकी। यदि मामला पहले से दर्ज था और जोशी को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, तो पुलिस की ओर से परिवार को जानकारी देने की प्रक्रिया क्या थी, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि अभी तक उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर जोशी को दोषी नहीं ठहराया गया है। उनके खिलाफ मामला दर्ज होने और पूछताछ किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन आरोपों का अंतिम कानूनी परिणाम अलग प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 1992 बैच के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी आशीष जोशी को बुधवार सुबह नेहरू पार्क से दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल पूछताछ के लिए ले गई थी। कई घंटे बाद उन्हें छोड़ दिया गया और पुलिस उन्हें घर तक छोड़कर गई।
घटनाक्रम एक नजर में
सुबह: आशीष जोशी नेहरू पार्क में रोज की तरह सैर कर रहे थे।
इसके बाद: सादे कपड़ों में पहुंचे पुलिसकर्मी उन्हें पूछताछ के लिए अपने साथ ले गए।
दिन में: परिवार और दोस्तों ने उनके बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की।
दोपहर: सोशल मीडिया पर उनके ठिकाने को लेकर सवाल उठने लगे।
पूछताछ: उन्हें दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी कार्यालय ले जाया गया।
शाम: कई घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
रात: आशीष जोशी ने खुद सोशल मीडिया पर घर पहुंचने की जानकारी दी।
निष्कर्ष
आशीष जोशी का मामला फिलहाल केवल एक पुलिस पूछताछ तक सीमित नहीं है। इसमें पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया, सोशल मीडिया पोस्ट पर कानूनी कार्रवाई और किसी व्यक्ति को पूछताछ के लिए ले जाने के बाद उसके परिवार को जानकारी देने जैसे सवाल भी उठ रहे हैं।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ ऑनलाइन गतिविधि से संबंधित मामला दर्ज किया है और इसी सिलसिले में उनसे पूछताछ की गई। वहीं दूसरी तरफ उनके सहयोगियों ने शुरुआत में यह सवाल उठाया कि परिवार को उनके बारे में तत्काल स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई।
अब इस मामले में आगे की तस्वीर FIR की पूरी जानकारी और पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई से ज्यादा साफ हो सकती है। आशीष जोशी ने भी संकेत दिया है कि वह बाद में पूरे घटनाक्रम के बारे में अपनी बात रखेंगे। तब यह समझना आसान होगा कि नेहरू पार्क से उन्हें ले जाने की कार्रवाई के पीछे वास्तव में कौन-सी पोस्ट और कौन-से आरोप थे।