रेवाड़ी का 500 साल पुराना अस्थल बाबा मोहनदास धाम: आस्था, इतिहास और आध्यात्मिक विश्वास का प्रमुख केंद्र

रेवाड़ी जिले के भाड़ावास गांव में स्थित अस्थल बाबा मोहनदास धाम आस्था, इतिहास और आध्यात्मिक विश्वास का एक प्रमुख केंद्र है। यह जानकारी महंत महाबीर दास द्वारा दी गई है। यह प्राचीन धाम शहर से करीब सात किलोमीटर दूर पुराने दिल्ली-जयपुर मार्ग के समीप स्थित है। यह स्थान दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
बाबा मोहनदास जी का परिचय और मंदिर का इतिहास
गौड़ीय संप्रदाय के प्रवर्तक श्री चैतन्य महाप्रभु की शिष्य परंपरा में आसीन कृष्ण पंथी बाबा मोहनदास जी को संत शिरोमणि की प्रतिष्ठा प्राप्त है। मान्यता है कि भाड़ावास की देवधरा पर स्थित यह प्राचीन मंदिर करीब पांच सौ वर्ष पुराना है। बाबा मोहनदास जी की समाधि इस धाम का प्रमुख आकर्षण है। वर्तमान महंत महाबीर दास ने बताया कि यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु समाधि पर माथा टेकते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
चमत्कार और ऐतिहासिक साक्ष्य
बाबा मोहनदास जी की सिद्धि और चमत्कारों से जुड़ी अनेक लोक कथाएं आज भी इस क्षेत्र में पूरी तरह प्रचलित हैं। इनमें मुगल बादशाह अकबर से जुड़ी मान्यताएं भी शामिल हैं। ऐसा कहा जाता है कि बाबा की आध्यात्मिक शक्ति से प्रभावित होकर मुगल बादशाह अकबर को भी उनके समक्ष नतमस्तक होना पड़ा था। इस प्राचीन मंदिर का कोई विस्तृत लिखित इतिहास उपलब्ध नहीं है। लेकिन यहां मौजूद पुराने हस्तलिखित दस्तावेज, ऐतिहासिक स्मृति-चिह्न, पुराने सिक्के और अन्य सामग्री इसके गौरवशाली अतीत की पूरी झलक दिखाते हैं। इनमें कई दस्तावेज उस समय की फारसी भाषा में लिखे हुए बताए जाते हैं।
प्रमुख मेले और धार्मिक आयोजन
हर वर्ष चैत्र प्रतिपदा यानी होली-धुलेंडी के अवसर पर यहां एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। वहीं दूसरी ओर बाबा मोहनदास जी की पुण्यतिथि यानी श्रावण शुक्ल षष्ठी के अवसर पर भी विशेष धार्मिक आयोजन संपन्न होते हैं। जागरण, भंडारे और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। आज अस्थल बाबा मोहनदास धाम देश और विदेश में बसे श्रद्धालुओं की आस्था का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।
सांस्कृतिक विरासत और प्रसाद ग्रहण
शांत वातावरण और धार्मिक ऊर्जा से सराबोर यह धाम रेवाड़ी की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की एक महत्वपूर्ण पहचान है। आयोजित किए गए विशाल भंडारे में संघ के अजय मित्तल, रामौतार लांबा, रामौतार गौतम, श्रीमती गौतम, रामस्वरूप, आचार्य योगेंद्र, दीपक मंगला सहित अनेकों गांव के सरपंच, गणमान्य व्यक्तित्व और हजारों की संख्या में लोगों ने उपस्थित होकर प्रसाद ग्रहण किया।