बाबैन में बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को किसान यूनियन का समर्थन, निजीकरण और एग्री डिस्कॉम का विरोध

बाबैन में बिजली व्यवस्था के निजीकरण तथा प्रस्तावित हरियाणा एग्री डिस्कॉम के विरोध में बिजली कर्मचारियों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन को आज बाबैन क्षेत्र के किसानों एवं किसान यूनियन का समर्थन मिला। आज बिजली सब-डिवीजन बाबैन के प्रांगण में किसान यूनियन के पदाधिकारियों एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर बिजली कर्मचारियों के साथ एकजुटता दिखाई। इस दौरान किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं और बिजली कर्मचारियों ने हरियाणा सरकार की निजीकरण की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
गुरुग्राम एवं नूंह की बिजली व्यवस्था के निजीकरण का विरोध
किसान यूनियन के नेताओं ने विशेष रूप से गुरुग्राम एवं नूंह (मेवात) की बिजली व्यवस्था के निजीकरण तथा प्रदेश में प्रस्तावित हरियाणा एग्री डिस्कॉम के गठन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि बिजली जैसी मूलभूत एवं आवश्यक सेवा को निजी हाथों में सौंपने से आम जनता, किसानों और बिजली कर्मचारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। किसान यूनियन ने कहा कि किसानों और बिजली कर्मचारियों के हितों की लड़ाई में वे उनके साथ खड़े हैं।
किसान यूनियन और बिजली कर्मचारी रहे मौजूद
इस अवसर पर किसान यूनियन के प्रधान रमेश कुमार एवं सुखविंदर भूखड़ी, सतबीर घिसरपड़ी विशेष रूप से मौजूद रहे। उनके साथ बड़ी संख्या में किसान यूनियन के कार्यकर्ता भी बिजली सब-डिवीजन बाबैन पहुंचे और कर्मचारियों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया। बिजली कर्मचारियों की ओर से सब-यूनिट बाबैन के प्रधान रणबीर, सेक्रेटरी विशाल सैनी, जसविंदर सैनी, उपप्रधान अजय कबीर, मोहित सैनी, सचिन, मुकेश, लाभ, मनोज, मनदीप, मयंक, अमनदीप सहित अन्य अनेक कर्मचारी मौजूद रहे।
सरकार से की फैसले वापस लेने की मांग
किसान यूनियन एवं बिजली कर्मचारियों ने सरकार से मांग की कि बिजली व्यवस्था के निजीकरण की प्रक्रिया को रोका जाए, गुरुग्राम एवं नूंह की बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में देने का निर्णय वापस लिया जाए तथा प्रस्तावित हरियाणा एग्री डिस्कॉम के गठन पर पुनर्विचार किया जाए। कर्मचारियों एवं किसान यूनियन के नेताओं ने कहा कि बिजली व्यवस्था केवल एक व्यावसायिक सेवा नहीं बल्कि किसानों, मजदूरों, घरेलू उपभोक्ताओं और आम जनता की मूलभूत आवश्यकता है। इसलिए बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकारी स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए, न कि उसका निजीकरण किया जाना चाहिए।