बाबैन के स्कूलों में शिक्षक प्रशिक्षण शिविर आयोजित, कहानी कला और जेंडर सेंसिटिविटी पर दिया गया जोर

Team Atal Hind8 August 20262 min read37 viewsशिक्षा
बाबैन के स्कूलों में शिक्षक प्रशिक्षण शिविर आयोजित, कहानी कला और जेंडर सेंसिटिविटी पर दिया गया जोर

कहानी के माध्यम से विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति कौशल का होता है विकास : पूर्व सांसद कैलाशो सैनी

बाबैन/ 8 अगस्त /सुरेश अरोड़ा/अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

भारत पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल और रिपु सूदन सिंह गीता विद्या मंदिर बाबैन में शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों से अवगत कराना और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रेरित करना रहा। इन आयोजनों में मुख्य रूप से कहानी कहने की कला यानी स्टोरी टेलिंग और लैंगिक संवेदनशीलता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

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भारत पब्लिक स्कूल में स्टोरी टेलिंग एज पेडागॉगी पर प्रशिक्षण

भारत पब्लिक स्कूल में “स्टोरी टेलिंग एज पेडागॉगी” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें रेनू भंडारी एवं ज्योतिष्मा ने रिसोर्स पर्सन के रूप में शिरकत की। विशेषज्ञों ने बताया कि कहानी केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता, भाषा कौशल, तर्कशीलता और आत्मविश्वास का विकास करने का एक प्रभावी शैक्षणिक उपकरण है। पूर्व सांसद कैलाशो सैनी ने कहा कि कहानी के माध्यम से कठिन से कठिन विषय को भी सरल भाषा में विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है और इससे ज्ञान लंबे समय तक बना रहता है। विद्यालय की प्रिंसिपल सुनीता खन्ना ने भी इस प्रकार के आयोजनों को विद्यार्थियों की शिक्षा की गुणवत्ता के लिए जरूरी बताया।

गीता विद्या मंदिर में जेंडर सेंसिटिविटी पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम

रिपु सूदन सिंह गीता विद्या मंदिर, बाबैन में सीबीएसई के तत्वावधान में ‘जेंडर सेंसिटिविटी’ यानी लैंगिक संवेदनशीलता विषय पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सीबीएसई द्वारा आमंत्रित विषय विशेषज्ञ दीपक सर और मीनाक्षी ने शिक्षकों को लैंगिक समानता, सम्मान और भेदभाव रहित शैक्षणिक वातावरण के महत्व की जानकारी दी। प्रशिक्षकों ने लैंगिक रूढ़िवादिता पर चर्चा करते हुए कहा कि बच्चों में ऐसी सोच विकसित की जानी चाहिए जिससे लड़के और लड़कियां दोनों समान रूप से आगे बढ़ सकें। विद्यालय की प्रधानाचार्य पूनम सैनी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से शिक्षक विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

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