बरवाला में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का मामला, जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

बरवाला में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का मामला, जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

बरवाला नगर परिषद की करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। हिसार जिले के बरवाला में प्रशासन की कार्यप्रणाली एक बार फिर से गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। बरवाला निवासी नरेश कुमार ने नगर परिषद सचिव को एक लिखित शिकायत दी है। शिकायत में मंगतराम बूरा पर ब्राह्मण धर्मशाला के पास रोड से लगती नगर परिषद की करोड़ों रुपये की जमीन पर कथित रूप से कब्जा करने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस जमीन की तुरंत पैमाइश करवाई जाए। इसके साथ ही कब्जा हटाकर सरकारी संपत्ति को पूरी तरह से सुरक्षित किया जाए।

सरकारी संपत्ति पर गिद्ध नजर और शिकायतों पर ठंडी कार्रवाई

इस मामले के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बरवाला में सरकारी जमीनों की रखवाली कौन कर रहा है? स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप है कि नगर परिषद की खाली पड़ी बेशकीमती जमीनों पर कुछ लोग धड़ल्ले से अपनी नजर गड़ाए बैठे हैं। पहले किसी खाली जमीन पर अवैध कब्जा किया जाता है। इसके बाद वहां चारदीवारी या फिर निर्माण खड़ा कर दिया जाता है। धीरे-धीरे इस तरह से सरकारी जमीन को निजी इस्तेमाल में लाने का कथित खेल शुरू हो जाता है। लोगों का कहना है कि सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायतें लगातार नगर परिषद तक पहुंचती रहती हैं।

AtalHind की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल

लेकिन कार्रवाई के नाम पर कई बार केवल मौके का निरीक्षण और कागजी खानापूर्ति ही होती दिखाई देती है। नगर परिषद के कर्मचारी मौके पर पहुंचकर केवल लीपापोती करते हैं और उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इसके बाद कुछ समय बीतते ही उसी स्थान पर दोबारा निर्माण या फिर अन्य गतिविधियां शुरू होने की शिकायतें सामने आने लगती हैं। यदि सरकारी जमीन पर किया गया कब्जा पूरी तरह से अवैध है तो फिर उसे हटाने में इतनी देरी क्यों की जा रही है? और यदि अधिकारी कार्रवाई करते हैं तो फिर वही जमीन दोबारा से कब्जे में कैसे चली जाती है? ये सारे सवाल अब बरवाला के आम लोगों के बीच एक बड़ा चर्चा का विषय बने हुए हैं।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी गंभीर आरोप

यह पूरा मामला केवल कब्जाधारियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसमें आगे और भी खुलासे हो रहे हैं। स्थानीय लोगों में नगर परिषद से जुड़े कुछ खास जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप और चर्चाएं तेज हैं। लोगों का आरोप है कि कुछ जनप्रतिनिधि कथित रूप से सरकारी जमीनों और प्रॉपर्टी के मामलों में जरूरत से ज्यादा रुचि ले रहे हैं। वे अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करके कब्जों और अवैध निर्माण को बढ़ावा देने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कुछ प्रभावशाली लोग सरकारी जमीन को पहले अपने कब्जे में लेते हैं।

अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन की चुप्पी

इसके बाद वहां अवैध निर्माण या प्लॉटिंग की जाती है और अंत में उससे मोटा मुनाफा कमाने का कथित खेल खेला जाता है। इन सभी गंभीर आरोपों की एक निष्पक्ष जांच होना बहुत जरूरी है। इससे यह साफ हो सकेगा कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोग असल में कौन हैं। साथ ही यह भी पता चलेगा कि क्या उन्हें किसी उच्च स्तर से कोई संरक्षण मिल रहा है या नहीं। बरवाला में कथित अवैध कॉलोनियों के बहुत तेजी से विकसित होने को लेकर भी स्थानीय लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं। आरोप यह है कि सभी नियम-कानूनों को पूरी तरह से दरकिनार किया जा रहा है।

क्या यही है हमारी व्यवस्था

जगह-जगह अवैध रूप से प्लॉट काटे जा रहे हैं और सीधे साधे लोगों को जमीन बेचने का अवैध काम किया जा रहा है। यदि यह सब कुछ नगर परिषद और संबंधित विभागों की पूरी जानकारी के बावजूद हो रहा है। तो फिर प्रशासन की पूरी निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना एक स्वाभाविक बात है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरवाला में सरकारी संपत्ति को लेकर अब ऐसी कोई भी व्यवस्था नहीं चलनी चाहिए। जिसमें पहले जमीन पर अवैध कब्जा किया जाए, फिर उसकी लिखित शिकायत दी जाए। इसके बाद अधिकारी मौके पर पहुंचें, थोड़ी बहुत दिखावे की कार्रवाई करें और मामला फाइलों में दब जाए।

नगर परिषद प्रशासन की अग्निपरीक्षा

सरकारी जमीन किसी भी एक व्यक्ति, संस्था या जनप्रतिनिधि की निजी संपत्ति बिल्कुल नहीं है। यह सीधे तौर पर देश और आम जनता की अपनी संपत्ति होती है। अब नरेश कुमार की तरफ से दी गई इस नई शिकायत के बाद नगर परिषद प्रशासन की कड़ी अग्निपरीक्षा शुरू हो गई है। नगर परिषद को केवल एक ही मामले की जांच तक खुद को सीमित नहीं रखना चाहिए। इसके बजाय बरवाला में अपनी सभी बेशकीमती जमीनों का पुराना रिकॉर्ड खंगालना चाहिए। मौके पर जाकर निष्पक्ष रूप से पैमाइश करवानी चाहिए और जहां भी कब्जे मिलें वहां सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

Share:

Comments

Leave a comment