बेटी बचाو-बेटी पढ़ाओ अभियान के 11 साल पूरे, जन्म के समय लिंगानुपात और स्कूलों में लड़कियों की संख्या बढ़ी

बेटी बचाو-बेटी पढ़ाओ अभियान के 11 साल पूरे, जन्म के समय लिंगानुपात और स्कूलों में लड़कियों की संख्या बढ़ी

हरियाणा के पानीपत से 11 साल पहले शुरू हुए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को पानीपत से इस अभियान की शुरुआत की थी। अब 11 साल बाद संसद में पेश आंकड़ों से यह बात सामने आई है कि अभियान के बाद देश में जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार हुआ है। इसके साथ ही स्कूलों में लड़कियों की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के आंकड़े

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान के दौरान देश में जन्म के समय लिंगानुपात 918 से बढ़कर 929 हो गया है। वहीं, माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात 2014-15 के 75.51 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 2024-25 में 83.4 फीसदी तक पहुंच गया है। इस अभियान की शुरुआत उस समय की गई थी जब बेटियों के जन्म को लेकर सामाजिक असमानता एक बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई थी।

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प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राष्ट्रीय प्राथमिकता से जोड़ना

प्रधानमंत्री मोदी ने पानीपत से इस अभियान की शुरुआत करते हुए बेटियों के जन्म, संरक्षण और शिक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता से जोड़ा था। बाद में इस अभियान को स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जोड़ते हुए देश के सभी जिलों तक इसका विस्तार किया गया। फिलहाल यह पूरा अभियान ‘मिशन शक्ति’ के तहत संचालित किया जा रहा है। सरकार की तरफ से संसद में यह जानकारी दी गई कि जून 2026 तक इस अभियान पर कुल 1,075.37 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

देशभर में आयोजित हुए कार्यक्रम और जागरूकता

इस निश्चित अवधि के दौरान देशभर में कुल 78,305 कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें 3.37 करोड़ से अधिक लोगों की सक्रिय भागीदारी रही है। इन सभी कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य बेटियों के जन्म, शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक स्वीकार्यता को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना रहा है। लिंगानुपात और शिक्षा में आए इस बदलाव के पीछे स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तीकरण से जुड़े अन्य कार्यक्रमों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

नीति आयोग द्वारा स्वतंत्र मूल्यांकन

विभिन्न सांसदों ने इस अभियान की प्रमुख उपलब्धियों के साथ-साथ उसके प्रभाव और मूल्यांकन की पूरी जानकारी भी मांगी थी। इसी के चलते नीति आयोग द्वारा वर्ष 2020 और वर्ष 2025 में स्वतंत्र मूल्यांकन कराया गया था। दोनों ही आकलनों में इस अभियान को बेहद प्रभावी बताया गया है और इसके क्रियान्वयन को और अधिक बेहतर बनाने के लिए जरूरी सुझाव दिए गए हैं। वर्ष 2015 में देश के चुनिंदा जिलों से शुरू हुई यह मुहिम अब एक विशाल देशव्यापी अभियान बन चुकी है।

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